मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध अब और जटिल होता जा रहा है। जंग का आज 24वां दिन है और हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि, अगर उसके तटीय इलाकों या द्वीपों पर हमला किया गया तो वह फारस की खाड़ी के समुद्री रास्तों में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम ईरान के साथ संभावित शांति वार्ता की तैयारी करती नजर आ रही है।
इस बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव सबसे ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया के करीब 20% तेल का ट्रांसपोर्ट होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है।
जंग के बीच ईरान ने युद्धविराम के लिए कई नई शर्तें सामने रखी हैं। लेबनानी मीडिया अल मयादीन को दिए गए इंटरव्यू में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि उनका देश पहले से तैयार रणनीति के अनुसार कदम उठा रहा है। ईरान ने युद्धविराम के लिए तीन नई शर्तें रखी हैं-
ईरान की नई शर्तें
इसके अलावा ईरान पहले भी कुछ शर्तें रख चुका है।
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पहले से रखी गई शर्तें
ईरान का कहना है कि जब तक दुश्मनों को सबक नहीं सिखाया जाएगा, तब तक उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए छह स्पष्ट शर्तें भी घोषित की हैं। इन शर्तों से साफ संकेत मिलता है कि ईरान केवल युद्धविराम नहीं बल्कि पूरे क्षेत्रीय समीकरण में बदलाव चाहता है।
ईरान की छह शर्तें
ईरान का कहना है कि यह उसकी नई रणनीति का हिस्सा है और इन शर्तों के बिना युद्धविराम संभव नहीं होगा।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम ईरान के साथ शांति वार्ता की संभावनाओं पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संभावित शांति योजना की अगुवाई ट्रंप के सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ कर रहे हैं। हालांकि, अभी अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। फिलहाल मिस्र, कतर और ब्रिटेन जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
जहां एक तरफ ईरान ने अपनी शर्तें रखी हैं, वहीं अमेरिका भी युद्ध खत्म करने के लिए कुछ सख्त मांगें कर रहा है।
अमेरिका की प्रमुख मांगें
ईरान पहले ही इनमें से कई शर्तों को खारिज कर चुका है।
ईरान युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर रहा है। लेकिन ट्रंप ने इस मांग को "नॉन-स्टार्टर" बताते हुए साफ कर दिया है कि अमेरिका इसके लिए तैयार नहीं है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका एक विकल्प के तौर पर ईरान की जमी हुई संपत्तियों को वापस करने पर विचार कर सकता है।
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अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आसान नहीं होगी। इसके कई कारण हैं-
अमेरिका मध्यस्थ के रूप में कतर को प्राथमिकता दे रहा है, लेकिन बातचीत अभी शुरुआती चरण में ही है।
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है। उन्होंने कहा कि BRICS देशों को ईरान पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए भूमिका निभानी चाहिए। ईरानी राष्ट्रपति ने यह भी सुझाव दिया कि मिडिल ईस्ट के देशों को मिलकर एक नया क्षेत्रीय सुरक्षा सिस्टम बनाना चाहिए ताकि बाहरी देशों का हस्तक्षेप कम हो सके।
ईरान की नेशनल डिफेंस काउंसिल ने सोमवार को कहा कि, अगर उसके तटीय इलाकों या द्वीपों पर हमला किया गया तो वह फारस की खाड़ी के समुद्री रास्तों में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है। इसका मतलब साफ है कि, ईरान जरूरत पड़ने पर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से ब्लॉक कर सकता है। ईरान का कहना है कि, अगर इस रास्ते से जहाजों को गुजरना है तो देशों को पहले ईरान से बातचीत करनी होगी। अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो इसका असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ सकता है। कई देशों की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।
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दो दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि, अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल नहीं दिया गया तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर बड़ा हमला कर सकता है। ट्रंप की इस चेतावनी की डेडलाइन आज रात खत्म होने वाली है। ईरान ने इस पर पलटवार करते हुए कहा है कि, अगर अमेरिका या उसके सहयोगी देशों ने हमला किया तो वह गल्फ देशों के पावर ग्रिड को निशाना बना सकता है। यानी दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
हाल ही में खबरें आई थीं कि, ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से 2 मिलियन डॉलर तक का शुल्क वसूल रहा है। लेकिन भारत में मौजूद ईरान के दूतावास ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। दूतावास ने अपने बयान में कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह निराधार हैं और इनका ईरान सरकार की आधिकारिक नीति से कोई संबंध नहीं है। ईरान का कहना है कि, कुछ व्यक्तियों की निजी राय को उसकी सरकारी नीति के रूप में पेश किया जा रहा है।
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ईरानी अधिकारियों का कहना है कि, मौजूदा सैन्य रणनीति पहले से तैयार की गई थी। पहले बड़े पैमाने पर मिसाइल हमले किए गए, लेकिन अब ईरान अधिक सटीक और रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के हमलों में इजरायल के अराद और डिमोना क्षेत्रों को भारी नुकसान हुआ है। ईरान का दावा है कि, उसने दुश्मन की कई वायु रक्षा प्रणालियों को नष्ट कर दिया है।
ईरान के वरिष्ठ राजनीतिक-सुरक्षा अधिकारी ने कहा है कि, मौजूदा हालात में तुरंत युद्धविराम की संभावना कम है। उनका कहना है कि ईरान की नीति अब हमलावरों को सजा देने पर केंद्रित है। ईरान का साफ संदेश है कि जब तक पूर्ण युद्धविराम की गारंटी नहीं मिलती, तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।