तेहरान। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है। जंग के 24वें दिन हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। सबसे बड़ा विवाद अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर खड़ा हो गया है। ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले कुछ जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने का फैसला किया है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देकर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने की चेतावनी दी है। इस फैसले के बाद वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग कंपनियों और कई देशों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि दुनिया के करीब 20% तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है।
फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने मिडिल ईस्ट में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। इसी बीच ईरान ने फारस की खाड़ी को दुनिया से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को और मजबूत करना शुरू कर दिया है।
यह जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम है। दुनिया भर में भेजे जाने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।
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विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले कुछ कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों से 2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 18 करोड़ रुपए से ज्यादा की ट्रांजिट फीस लेना शुरू कर दिया है। लंदन स्थित एक मीडिया हाउस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, यह शुल्क कई जहाजों से पहले ही वसूला जा चुका है। इस फैसले को ईरान द्वारा इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण दिखाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह शुल्क पहले ही लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह कदम दशकों बाद उठाया गया है और इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के संप्रभु अधिकार को स्पष्ट किया जाता है।
बोरौजेर्दी ने कहा कि, कुछ जहाजों से 2 मिलियन डॉलर का टोल वसूलना ईरान की ताकत को दिखाता है। युद्ध की कीमत होती है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हमें यह कदम उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि, इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट शुल्क लेना इस्लामिक गणराज्य के अधिकारों को दर्शाता है।
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तेल कंपनियों और शिपिंग ऑपरेटरों के हवाले से पहले भी ऐसी खबरें सामने आई थीं कि होर्मुज से गुजरने वाले कुछ जहाजों को भारी रकम चुकानी पड़ रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक टैंकर ऑपरेटर ने सुरक्षित मार्ग के बदले ईरान को लगभग 20 लाख डॉलर का भुगतान किया था। हालांकि, इस तरह के लेनदेन शिपिंग कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण भी हैं, क्योंकि ईरान पर पहले से कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू हैं।
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोलता, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों पर हमला कर सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि, अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता रखती है। ट्रंप की इस चेतावनी ने मिडिल ईस्ट में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।
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अमेरिका की धमकी पर ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया है। ईरानी सांसद बोरौजेर्दी ने कहा कि, अगर अमेरिका ने हमला किया, तो इजरायल के ऊर्जा केंद्र भी ईरान की पहुंच में हैं और उन्हें एक दिन में नष्ट किया जा सकता है। इस बयान के बाद क्षेत्र में सैन्य टकराव का खतरा और बढ़ गया है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के लिए खुला है, लेकिन उन देशों के लिए नहीं जो ईरान की संप्रभुता और अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। उनका इशारा सीधे अमेरिका और इजरायल की ओर माना जा रहा है।
पेजेशकियान ने ट्रंप की धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, ईरान को नक्शे से मिटाने का सपना देखने वाले देशों की धमकियां हमारी एकता को और मजबूत करती हैं। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध के मैदान में ऐसी धमकियों का डटकर सामना करेगा।
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ईरानी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। लेकिन अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए यह रास्ता बंद किया जा सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि यह जलमार्ग सिर्फ दुश्मन देशों और उनके सहयोगियों के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखने लगा है। दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन संकट बढ़ गया है। पाकिस्तान, श्रीलंका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। तेल कंपनियों ने भी ईंधन के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।
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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारत पर भी दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। कुछ क्षेत्रों में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। अगर होर्मुज में स्थिति और बिगड़ती है तो भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों का तेल इसी रास्ते से दुनिया भर में भेजा जाता है। अगर यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भारी असर पड़ सकता है।