ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर युद्ध के कारण पाबंदी लगाए जाने से अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है। अमेरिका और इजरायल के बढ़ते तनाव के बीच नाटो (NATO) महासचिव मार्क रुट ने संकेत दिए हैं कि 20 से ज्यादा देश अब इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं। रुट ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने सहयोगी देशों से इस महत्वपूर्ण शिपिंग चैनल को सुरक्षित बनाने में सक्रिय भूमिका निभाने की मांग कर रहे हैं।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार के लिए सबसे अहम मार्ग है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध की परिस्थितियों के कारण इस रास्ते पर पाबंदी लगा दी है। इससे तेल निर्यात में बाधा आई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है। नाटो महासचिव मार्क रुट ने हाल ही में कहा कि सहयोगी देशों की सुस्ती के कारण ट्रंप नाराज हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप चाहते हैं कि इस संकट के समाधान के लिए सभी सहयोगी देश मिलकर सक्रिय कदम उठाएं।
मार्क रुट ने खुलासा किया कि उन्होंने इस हफ्ते कई बार ट्रंप से बातचीत की। उनके अनुसार, ट्रंप चाहते हैं कि सहयोगी देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करें। रुट ने कहा कि अब 20 से ज्यादा देश इस शिपिंग चैनल के कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए उनके विज़न के अनुरूप कदम उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, सहयोगी देशों को एकजुट करना इस मिशन की सफलता के लिए बेहद आवश्यक है।
नाटो प्रमुख ने दावा किया कि ट्रंप का दबाव असर दिखा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस अंतरराष्ट्रीय संकट को हल करने में अधिक जिम्मेदारी लेने को तैयार हो रहा है। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों की सक्रिय भूमिका से यह सुनिश्चित होगा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से सभी के लिए खुला और सुरक्षित हो।
मार्क रुट ने ईरान पर अमेरिका के संभावित हमलों का समर्थन किया। उन्होंने इसे वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिए आवश्यक कदम बताया। रुट के मुताबिक, ईरान का परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम दुनिया के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय तेल मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए इन खतरों का मुकाबला करना जरूरी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर सीधे वैश्विक तेल की कीमतों पर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। नाटो की सक्रिय भूमिका और सहयोगी देशों की भागीदारी से इस मार्ग को फिर से सुरक्षित बनाने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार सामान्य हो सकता है और सप्लाई चेन सामान्य रहेगी।