पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई एक अहम फोन कॉल में दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में से एक एलन मस्क भी शामिल थे। यह दावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में किया गया है, जिसने कूटनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
यह बातचीत ऐसे समय पर हुई जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है और वैश्विक स्तर पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इस कॉल में मस्क की मौजूदगी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं-क्या यह सिर्फ एक संयोग था या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीतिक वजह है?
सूत्रों के मुताबिक, इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया था। दोनों नेताओं के बीच मुख्य रूप से ईरान-इजरायल संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चर्चा हुई। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मुद्दा बातचीत का अहम हिस्सा रहा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। इस रास्ते पर किसी भी प्रकार की रुकावट दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है।
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अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस महत्वपूर्ण बातचीत में एलन मस्क भी लाइन पर मौजूद थे। दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। आम तौर पर दो देशों के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली इस तरह की संवेदनशील बातचीत में किसी निजी व्यक्ति की मौजूदगी बेहद असामान्य मानी जाती है। ऐसे में मस्क की भागीदारी ने कई कूटनीतिक और राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मस्क इस कॉल में किस भूमिका में शामिल हुए थे। यह भी जानकारी सामने नहीं आई है कि उन्होंने बातचीत में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया या सिर्फ श्रोता के रूप में जुड़े थे। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि मस्क के टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रभाव के चलते उनकी मौजूदगी रणनीतिक कारणों से हो सकती है। उनकी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय संचार और रक्षा तकनीकों से भी जुड़ी हुई हैं, जो युद्ध जैसे हालात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि इस घटनाक्रम से ट्रंप और मस्क के रिश्तों में सुधार के संकेत मिलते हैं। पिछले साल दोनों के बीच कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए थे, लेकिन हालिया घटनाएं उनके संबंधों में नई नजदीकी का इशारा करती हैं।
28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। भारत जैसे देश, जो इस क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर हैं, स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही साफ कर चुके हैं कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थन करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा था कि भारत क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति बहाल करने के पक्ष में है। भारत की विदेश नीति इस समय संतुलन बनाए रखने और सभी पक्षों से संवाद जारी रखने पर केंद्रित है।