Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

OBC Reservation :हाईकोर्ट में शुरू हुई अंतिम सुनवाई, विरोधी पक्ष ने कहा 52% आबादी आरक्षण बढ़ाने का पैमाना नहीं

मप्र में ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में बुधवार से सुनवाई शुरू हुई। आरक्षण का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि 52% आबादी आरक्षण बढ़ाने का पैमाना नहीं है।
हाईकोर्ट में शुरू हुई अंतिम सुनवाई, विरोधी पक्ष ने कहा 52% आबादी आरक्षण बढ़ाने का पैमाना नहीं

जबलपुर। मध्यप्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बुधवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बढ़े हुए आरक्षण का विरोध कर रहे याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि भले ही मप्र में ओबीसी की आबादी 52 फीसदी से ज्यादा है, लेकिन महज आबादी को आधार बनाकर आरक्षण की सीमा तय करना पूरी तरह असंवैधानिक है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के समक्ष इन मामलों पर गुरुवार को दोपहर तीन से साढ़े चार बजे तक आगे सुनवाई होगी। हाईकोर्ट में इन मामलों की सुनवाई पर राज्य के लाखों उम्मीदवारों की नजरें टिकी हैं। 

आरक्षण के विरोध में 12 याचिकाएं

गौरतलब है कि अशिता दुबे व 11 अन्य की ओर से दायर इन मामलों में प्रदेश की कमलनाथ सरकार द्वारा ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने को चुनौती दी गई थी। तत्कालीन सरकार ने 8 जुलाई 2019 को आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने के संबंध में विधानसभा से बिल पारित किया और फिर उसका गजट नोटिफिकेशन 17 जुलाई 2019 को प्रकाशित किया था। आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाए जाने को इन मामलों में असंवैधानिक और सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशानिर्देशों के खिलाफ बताया गया है।

ये भी पढ़ें: Former MLA Vijay Mishra : 46 साल पुराने हत्या केस में विजय मिश्रा को उम्रकैद, प्रयागराज कोर्ट का बड़ा फैसला

सीजे ने पूछा: किसको कितना आरक्षण?

89 मामलों पर सुनवाई की शुरुआत होते ही चीफ जस्टिस ने वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी से पूछा कि फिलहाल मप्र में किस वर्ग को कितना आरक्षण दिया जा रहा है? लेखी ने कहा कि ओबीसी को पहले 14 फीसदी आरक्षण मिलता था, जो बढ़ाकर 27 फीसदी किया गया। इसके अलावा अनुसूचित जाति को 16 और अनुसूचित जनजाति को 20 फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है। इस तरह कुल 63 प्रतिशत आरक्षण मप्र में तय किया गया, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के खिलाफ है।

सुधारने के बजाए वही गलती दोबारा की

वरिष्ठ अधिवक्ता लेखी ने कहा कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने बिना तैयारी के ओबीसी आरक्षण को 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किया। सत्ता बदलने के बाद प्रदेश में आई भाजपा सरकार ने भी बिना किसी तैयारी के उसे अपनाकर नया एक्ट लागू कर दिया। आरक्षण बढ़ाने के मुद्दे पर भारत के संविधान के साथ एक तरह से फ्रॉड हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि आरक्षण का निर्धारण संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई मर्यादाओं के भीतर होना चाहिए, न कि केवल जनसंख्या के आंकड़ों पर।

ये भी पढ़ें: सबरीमाला केस पर सुप्रीम कोर्ट : 'हिंदू धर्म जीवन जीने का तरीका', आस्था के लिए मंदिर जाना जरूरी नहीं, घर में दीया जलाना काफी है

बड़ी संख्या में हाईकोर्ट पहुंचे उम्मीदवार

/img/89/1778682426686

हाईकोर्ट में शुरू हुई सुनवाई को लेकर बड़ी संख्या में ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार बुधवार को हाईकोर्ट पहुंचे। इन युवाओं ने महाधिवक्ता के आवास से हाईकोर्ट परिसर तक रैली भी निकाली। ओबीसी वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के अनुसार होल्ड किए गए उम्मीदवारों को पुलिस ने हाईकोर्ट परिसर के बाहर ही रोक दिया।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

Latest Posts