MP News:हरदा में 9 किमी दूर स्कूल शिफ्टिंग मामले में हाईकोर्ट सख्त, 23 जून को होगी अगली सुनवाई

जबलपुर। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने जवाब पेश करने अनावेदकों को चार सप्ताह का समय दिया है। अगली सुनवाई 23 जून को होगी। यह जनहित याचिका हरदा के स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद भोरगा, समाजसेवी मुकेश चौहान और ग्राम पंचायत मोहल कलां की सरपंच मनीषा आमे की ओर से दाखिल की गई है। आवेदकों का कहना है कि हरदा के शिक्षा विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर एक ऐसा तुगलकी फरमान जारी किया, जिससे गरीब और ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई छूटने की नौबत आ गई है।
9 किलोमीटर दूर शिफ्टिंग पर उठे सवाल
बता दें कि मोहालकलां से खिरकिया की दूरी 9 किलोमीटर है। ऐसे में छात्रों के सामने दो ही विकल्प हैं, या तो वे 9 किमी दूर जाएं या फिर पढ़ाई छोड़ दें। डीईओ के आदेश को अव्यवहारिक और बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए उसे निरस्त किए जाने की प्रार्थना याचिका में की गई है। आवेदकों ने इस फैसले को ग्रामीण छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय बताया है। उनका कहना है कि इतनी दूरी तय करना छोटे बच्चों के लिए बेहद कठिन है। इससे शिक्षा व्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
ये भी पढ़ें: Power Cut Alert! भोपाल के इन इलाकों में गुरुवार को बिजली कटौती, मेंटेनेंस के चलते सप्लाई रहेगी प्रभावित
कोर्ट ने अनावेदकों को दिया चार हफ्ते का समय
मामले पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार चौरसिया ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद बेंच ने याचिका में बनाए गए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। इसके लिए चार सप्ताह का समय निर्धारित किया गया है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। मामला आगे क्या मोड़ लेगा, यह जवाब के बाद ही तय होगा।
जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश किया था जारी
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 20 मार्च 2026 को जारी आदेश के तहत कई गांवों के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को 9 किलोमीटर दूर संदीपनि स्कूल, खिरकिया में मर्ज कर दिया गया है। आवेदकों का दावा है कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि प्राथमिक स्कूल 1 किलोमीटर और माध्यमिक स्कूल 3 किलोमीटर के दायरे में होने चाहिए।
ये भी पढ़ें: हल्दी नहीं, मौत का ज़हर! मंडप सजने से पहले उठी दुल्हन की अर्थी
शिक्षा का अधिकार कानून का हवाला
आवेदकों का दावा है कि शिक्षा का अधिकार कानून 2009 में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि प्राथमिक स्कूल 1 किलोमीटर और माध्यमिक स्कूल 3 किलोमीटर के दायरे में होने चाहिए। ऐसे में 9 किलोमीटर की दूरी नियमों के खिलाफ बताई जा रही है। याचिका में कहा गया है कि इस फैसले से कानून का उल्लंघन हुआ है। छात्रों के मौलिक अधिकारों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही संसाधनों की कमी है। ऐसे में यह निर्णय और भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
अगली सुनवाई 23 जून को होगी
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 23 जून तय की है। इस दिन अनावेदकों की ओर से जवाब पेश किया जाएगा। कोर्ट इस जवाब के आधार पर आगे की सुनवाई करेगा। फिलहाल कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नोटिस जारी किया है। यह मामला अब शिक्षा और कानून दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले समय में इसका असर कई अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है।












