रतलाम। मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष का असर अब पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर दिखने लगा है। कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कई देशों में संकट की स्थिति बन रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस की कमी अब लोगों की रसोई तक पहुंच चुकी है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई कई जगह ठप है, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर के लिए 5 से 7 दिन तक की वेटिंग चल रही है। इसी को देखते हुए गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है।
इस बीच रतलाम जिले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अवैध गैस रिफिलिंग सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जहां घरेलू गैस सिलेंडरों से वाहनों में एलपीजी भरने का गैरकानूनी कारोबार चल रहा था।
रतलाम जिले के नामली थाना क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई कर एक अवैध गैस रिफिलिंग सेंटर का खुलासा किया। ग्रामीण तहसीलदार आशीष उपाध्याय के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में पुलिस और खाद्य विभाग की टीम शामिल रही। टीम ने नामली क्षेत्र में स्थित एक कथित गैस सर्विस सेंटर पर छापा मारा, जहां बिना अनुमति गैस सिलेंडरों का भंडारण और रिफिलिंग की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान वहां से 22 भरे और 9 खाली गैस सिलेंडर, यानी कुल 31 सिलेंडर जब्त किए गए।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आया कि यहां घरेलू गैस सिलेंडरों से चार पहिया वाहनों में एलपीजी भरने का काम किया जा रहा था। यह गतिविधि न केवल गैरकानूनी थी, बल्कि इससे भीषण आगजनी और विस्फोट का खतरा भी बना हुआ था। मौके से अलग-अलग कंपनियों के गैस सिलेंडर भी मिले, जिनका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। अधिकारियों का कहना है कि, यह सेंटर लंबे समय से चोरी-छिपे गैस रिफिलिंग का केंद्र बना हुआ था।

इस मामले में सेंटर संचालक शहजाद खान के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। नामली थाना प्रभारी के मुताबिक, आरोपी से पूछताछ की जा रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में घरेलू गैस सिलेंडर उसके पास कैसे पहुंचते थे और इस अवैध नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार यह पहला मामला नहीं है। आरोपी के ठिकाने पर पहले भी तीन बार छापे पड़ चुके हैं, लेकिन इस बार गैस संकट के बीच मिली शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि गैस सिलेंडरों की सप्लाई कहां से हो रही थी और इस अवैध कारोबार में कितने लोग शामिल हैं।
रतलाम कलेक्टर मिशा सिंह को जिले में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जांच के आदेश दिए गए थे। इसके बाद गठित संयुक्त टीम ने छापेमारी कर पूरे मामले का खुलासा किया। प्रशासन का कहना है कि, जिले में ऐसी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है और आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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दूसरी ओर मध्य प्रदेश में गैस संकट तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। पिछले तीन दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई ठप बताई जा रही है। वहीं घरेलू सिलेंडर के लिए कई शहरों में लंबी वेटिंग चल रही है। ऑयल कंपनियों के अनुसार, फिलहाल केवल करीब 15 प्रतिशत गैस सप्लाई उपलब्ध है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर इमरजेंसी सेवाओं और घरों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
सरकारी व्यवस्था के अनुसार फिलहाल कमर्शियल गैस सिलेंडर सिर्फ जरूरी संस्थानों को ही दिए जाएंगे, जैसे-
इसके अलावा होटल, मैरिज गार्डन, सराफा कारीगर और अन्य व्यवसायों को फिलहाल कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल पाएंगे।
भोपाल होटल एसोसिएशन के अनुसार, राजधानी में ही 1500 से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट हैं, जहां रोज करीब 2 से 2.5 हजार गैस सिलेंडर इस्तेमाल होते हैं। होटल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि, जिन होटलों के पास स्टॉक है, वहां भी सिर्फ 48 घंटे का गैस स्टॉक बचा है। अगर सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो कई होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं।
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एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अनुसार, मध्य प्रदेश में गैस की औसत दैनिक सप्लाई इस प्रकार है-
प्रदेश में कुल सवा करोड़ से ज्यादा एलपीजी उपभोक्ता हैं।
गैस की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने घरेलू सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया है। अब नए नियम इस प्रकार हैं-
इसके अलावा गैस डिलीवरी के समय OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी अनिवार्य किया गया है।
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मार्च महीने में मध्य प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा शादियां तय हैं। शादियों और बड़े आयोजनों में बड़ी मात्रा में कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है। लेकिन पिछले तीन दिनों से कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने के कारण आयोजकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे देश में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है। इसके तहत गैस को चार कैटेगरी में बांटा गया है-
1. पहली कैटेगरी
घर की रसोई गैस और वाहनों की CNG को पूरी सप्लाई मिलेगी।
2. दूसरी कैटेगरी
खाद बनाने वाले कारखानों को लगभग 70 प्रतिशत गैस दी जाएगी।
3. तीसरी कैटेगरी
बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80 प्रतिशत गैस मिलेगी।
4. चौथी कैटेगरी
छोटे उद्योग, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी खपत के हिसाब से करीब 80 प्रतिशत गैस दी जाएगी।
1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का लगभग बंद होना
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पाद इसी रास्ते से गुजरते हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल और 54 प्रतिशत LNG इसी मार्ग से आयात करता है।
2. LNG प्लांट पर ड्रोन हमला
हाल ही में हुए हमलों के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का उत्पादन रोक दिया है। भारत अपनी जरूरत की लगभग 40 प्रतिशत LNG कतर से आयात करता है, जिससे सप्लाई में भारी कमी आ गई है।
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ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। प्रमुख कदम-
इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) केएम ठाकुर ने कहा कि, उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अमेरिका सहित अन्य देशों से गैस कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है। इसके अलावा रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चे तेल की सप्लाई की उम्मीद जताई जा रही है।
यदि गैस एजेंसी सिलेंडर देने में अनियमितता कर रही है तो उपभोक्ता इन हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं: