MP Wine : मप्र में तैयार होगी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शराब और माल्ट स्प्रिट

संतोष चौधरी, भोपाल। मध्यप्रदेश में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की उच्च गुणवत्ता वाली शराब और माल्ट स्प्रिट (अल्कोहल) तैयार होगी। वाणिज्यिक कर विभाग ने मप्र स्प्रिट परिपक्वन नियम, 2026 (Spirit Maturation Rules) का 9 जून को गजट नोटिफिकेशन किया है। यह नियम प्रदेश की उन सभी डिस्टिलरी और बॉटलिंग प्लांट पर लागू होगा, जिनके पास शराब बनाने का लाइसेंस है। मप्र में 11 डिस्टिलरी और 34 बॉटनिंग प्लांट है।
यूनिट के अंदर ही बनाना होगा सुरक्षित रूम
नए नियमों के अनुसार, शराब कंपनियों को अपनी यूनिट के अंदर ही एक बेहद सुरक्षित रूम बनाना होगा। इसमें केवल एक ही मुख्य दरवाजा होगा, जो डबल लॉक होगा। अंदर और बाहर 24 घंटे सीसीटीवी से नजर रखी जाएगी और उसकी रिकॉर्डिंग 90 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी। शराब मामलों के जानकारों का कहना है कि नए नियम लागू होने से विदेशी शराब पर मप्र की निर्भरता कम होगी।
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उड़ने वाली शराब (एंजल्स शेयर) पर टैक्स छूट
लकड़ी के पीपों में बारीक छेद होने और मप्र के गर्म मौसम के कारण, लंबे समय में कुछ शराब प्राकृतिक रूप से भाप बनकर उड़ जाती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘एंजल्स शेयर' कहते हैं। सरकार ने इस प्राकृतिक नुकसान को स्वीकार करते हुए शराब निर्माताओं को 0.5 प्रतिशत प्रतिमाह तक की टैक्स-फ्री छूट दी है। शराब में पानी मिलाना, फ्लेवर या कलर डालने पर पूरी बैन रहेगा।
आम, सागौन की लकडी के पीपे में रखी जाएगी शराब
शराब या माल्ट को पहले चीड़ के पीपों में रखा जाता था। अब आम, साल, सागौन के पीपों में रखा जा सकेगा। इस दौरान शराब लकड़ी के रंग, स्वाद और खुशबू को प्राकृतिक रूप से अपने अंदर सोख लेती है, जिससे उसकी गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है। नए नियमों के अनुसार, किसी भी स्प्रिट को परिपक्व (मैच्योर्ड) तभी माना जाएगा, जब उसे कम से कम एक साल तक लकड़ी के पीपे में रखा गया हो। इसके लिए 100 प्रतिशत जौ से बने माल्ट स्प्रिट और ईएनए का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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पीपों के लिए तय मानक
स्प्रिट रखने के लिए केवल ओक, साल या सागौन (टीक) जैसी मंजूरशुदा लकड़ी से बने पीपों का ही इस्तेमाल होगा। एक पीपे की अधिकतम क्षमता 700 लीटर से ज्यादा नहीं होगी। हर पीपे पर स्प्रिट का नाम, उसे भरने की तारीख और तैयार होने की अनुमानित तारीख का अमिट स्याही से लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
लापरवाही पर भारी जुर्माना
नियमों का उल्लंघन पर करने पर बाटलिंग प्लांट और डिस्टिलरीज पर 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगेगा।












