Twisha Sharma Case :सीबीआई गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद भी गिरिबाला सिंह की कुर्सी नहीं हिली

भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत और दहेज के मामले में सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई जांच के बाद उन्हें जेल भी भेज दिया गया, इसके बावजूद वे जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग भोपाल-2 की अध्यक्ष बनी हुई हैं। सरकार और उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग कार्रवाई की बात एक दूसरे पर टाल रहे हैं।
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सीबीआई गिरफ्तारी और जेल जाने के बाद भी गिरिबाला सिंह की कुर्सी नहीं हिली
गिरिबाला सिंह फाइल फोटो

राजीव सोनी, भोपाल। एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में उसकी सास गिरिबाला सिंह, सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी एवं जेल जाने के दो सप्ताह बाद भी जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग भोपाल-2 अध्यक्ष पद पर बनी हुई हैं। उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई का मामला सरकार और आयोग के बीच पेंडुलम बना हुआ है। संबंधित विभाग को आयोग से जानकारी का इंतजार है जबकि सूत्रों का दावा है कि शासन को सूचना पहुंचा दी गई है।

पुलिस कस्टडी के 24 घंटे बाद होती है विभागीय कार्रवाई

सामान्य तौर पर गिरफ्तारी अथवा पुलिस कस्टडी के 24 घंटे बाद संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभागीय कार्रवाई स्वत: हो जाती है। लेकिन पूर्व जिला जज और अध्यक्ष जिला उपभोक्ता विवाद प्रतिपोषण आयोग अध्यक्ष रहते हुए किसी महिला जज को सीबीआई ने दहेज प्रताड़ना की विभिन्न धाराओं में 28 मई को गिरफ्तार किया था। 5 दिन की पुलिस रिमांड के बाद कोर्ट ने गिरिबाला और समर्थ को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। सूत्रों का कहना है कि नियुक्ति और पद से हटाने का अधिकार शासन के पास ही है। गिरिबाला की कोर्ट का प्रभार फिलहाल दूसरी कोर्ट के अध्यक्ष को सौंप दिया गया है।

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दहेज प्रताड़ना की धाराएं

गिरिबाला के खिलाफ बीएनएस की धारा 80(2), 85, 3/5 और दहेज प्रति. अधिनियम की धारा 3/4 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। 12 मई को उनकी बहू ट्विशा (33वर्ष) की संदिग्ध मौत हुई थी। 15 मार्च को गिरिबाला को निचली अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई जिसे हाईकोर्ट ने 28 को रद्द कर दी। इसके बाद सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पत्र के बाद चुप्पी

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा रजिस्ट्रार राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग को पत्र (20 मई 2026) भेजकर नियुक्ति अर्हता, भर्ती पद्धति, कार्यकाल और पद से हटाने आदि को लेकर जांच प्रतिवेदन मांगा गया था। इसके बाद विभाग द्वारा की गई कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।

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यह मिलती है सुविधा

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग अध्यक्ष के लिए शासन द्वारा वाहन की सुविधा के साथ स्टाफ के रूप में माली, कुक और ड्राइवर की सेवा मुहैया कराई जाती है। 4 साल अथवा 65 वर्ष की उम्र तक शासन द्वारा यह नियुक्ति की जाती है। गिरिबाला इस पद पर करीब 3 साल से पदस्थ हैं।

आयोग से जानकारी तलब की है

गिरिबाला के संबंध में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग से जानकारी मांगी गई है। उनकी तरफ से सूचना आना है। आयोग की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी।
गोविंद सिंह राजपूत, मंत्री- खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मप्र

नहीं मिली प्रतिक्रिया

इस संबंध में राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग की अध्यक्ष जस्टिस सुनीता यादव से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन वह कार्यालय में उपलब्ध नहीं हुईं।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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