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वर्ल्ड चैंपियनशिप में दौड़ेगी भोपाल की बनी बोट:जुगाड़ की नाव से शुरू हुआ सफर, अब देशभर की वाटर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में इस्तेमाल हो रही नाव

भोपाल में बनी एक साधारण नाव अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही है। इसका सफर 'जुगाड़' से शुरू हुआ था और आज यह देशभर की वाटर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में इस्तेमाल हो रही है।
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जुगाड़ की नाव से शुरू हुआ सफर, अब देशभर की वाटर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में इस्तेमाल हो रही नाव

विजय एस. गौर, भोपाल। शहर में बनी बोट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की पहचान बन रही है। कभी छोटे तालाब में जुगाड़ की नाव से प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ी आज उसी शहर में तैयार बोट से वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे हैं। पोलैंड के पोजनान में होने वाली कयाकिंग-कैनोइंग वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम भोपाल में बनी बोट से बड़े तालाब में अभ्यास करेगी। भोपाल की इन बोट्स का इस्तेमाल अब देशभर में आयोजित होने वाली वाटर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में किया जा रहा है। खास बात यह है कि जिन बोट्स की शुरुआत एक छोटे से टिन शेड और जुगाड़ से हुई थी, वही आज भारतीय खिलाड़ियों को ओलिंपिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

2013 में जुगाड़ से हुई थी शुरुआत

करीब एक दशक पहले प्रदेश में पैरा कैनोइंग और वाटर स्पोर्ट्स के लिए जरूरी इक्विपमेंट उपलब्ध नहीं थे। 2013-14 में एमपी वाटर स्पोर्ट्स अकादमी के लिए खिलाड़ियों का चयन हुआ तो सामने आया कि पैरा कैनोइंग की बोट भारत में बनती ही नहीं थी और इन्हें विदेशों से मंगाना पड़ता था। उस समय खिलाड़ियों की प्रैक्टिस रुक न जाए इसलिए सामान्य कैनो बोट को मॉडिफाई किया गया। बोट के एक तरफ सपोर्ट देने के लिए बांस और ऑयल बैरल लगाया गया, क्योंकि पैरा कैनो में साइड सपोर्ट जरूरी होता है। इसी जुगाड़ वाली कैनो से प्रैक्टिस कर प्राची यादव ने 2015 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता और 2020 एशियाड में दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए। वह दो बार ओलिंपिक के लिए भी क्वालिफाई कर चुकी हैं।

अब भोपाल में बन रही हर तरह की बोट

‘मेक इन इंडिया’ के तहत अब भोपाल में के-1, के-2, सी-2, सी-4, कैनो स्लालम, कैनो पोलो और ड्रैगन बोट जैसी सभी प्रकार की बोट तैयार की जा रही हैं। इनकी कीमत विदेशी बोट्स की तुलना में काफी कम है। भोपाल में तैयार कयाक करीब 35 हजार रुपए और कैनो करीब 50 हजार रुपए में तैयार हो जाती है जबकि विदेशों से आने वाली कयाक की कीमत करीब 5.5 लाख रुपए और कैनो की कीमत 6 लाख रुपए तक होती है। यही वजह है कि अब देश की कई वाटर स्पोर्ट्स अकादमियां भोपाल में बनी कार्गो बोट खरीद रही हैं।

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टिन शेड से शुरू हुआ था कार्गो भोपाल

जब यह साफ हो गया कि अगले कई वर्षों तक भारत में पैरा कैनो का निर्माण शुरू होने की संभावना नहीं है तब मयंक ठाकुर ने खुद ही बोट बनाने का फैसला किया। उन्होंने डिजाइन, मटेरियल और टेक्नोलॉजी पर रिसर्च की और नवंबर 2014 में एमएसएमई के तहत रजिस्ट्रेशन करवाकर गांधीनगर के एक छोटे टिन शेड में बोट निर्माण शुरू किया। धीरे-धीरे यह पहल ‘कार्गो भोपाल’ के रूप में विकसित हुई और आज राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं से लेकर खिलाड़ियों की ट्रेनिंग तक में इन बोट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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ओलिंपिक तक पहुंच रहे खिलाड़ी

कार्गो भोपाल के डिजाइनर एवं डायरेक्टर मयंक ठाकुर के अनुसार शुरुआत में छोटे तालाब में खाली तेल के ड्रम बांधकर बोट चलाई जाती थी। वहीं से यह विचार आया कि अगर भोपाल में ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार बोट बनाई जाए तो खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि अब भोपाल में तैयार बोट्स से खिलाड़ी प्रैक्टिस कर ओलिंपिक तक पहुंच रहे हैं और वाटर स्पोर्ट्स के लगभग सभी इवेंट्स के लिए यहां बोट तैयार की जा रही हैं।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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