जबलपुर :प्रदेश के 9 हजार से अधिक डॉक्टर्स और कर्मचारियों की नहीं बनी एम्प्लाई कोड आईडी, 5 मेडिकल कॉलेज का मामला

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक एम्प्लाई कोड न होने के कारण कर्मचारियों का डेटा नई एकीकृत वित्तीय प्रणाली 'आईएफएमआईएस' में अपडेट नहीं किया जा पा रहा है।
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प्रदेश के 9 हजार से अधिक डॉक्टर्स और कर्मचारियों की नहीं बनी एम्प्लाई कोड आईडी, 5 मेडिकल कॉलेज का मामला

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। मेडिकल कॉलेजों में अपनी सेवाएं देने वाले स्वशासी डॉक्टरों व कर्मचारियों के वित्तीय और सेवा-संबंधी लाभ के लिए 'एम्प्लाई कोड'  न होना सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। पॉलिसी मैटर होने के कारण प्रदेश के जबलपुर, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और रीवा के करीब 9 हजार स्वशासी चिकित्सक एवं कर्मचारी एम्प्लाई कोड आईडी से अब तक वंचित हैं। अब जब संचालनालय ने इन कॉलेजों के डीन को पत्र लिखा, तो पूरे विभाग में इसे लेकर खलबली मच गई। वहीं कर्मचारी संघ भी तेजी से सक्रिय हो गया और एम्पलाई कोड आईडी बनाने की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी में लग गया है।

इन कॉलेजों के कर्मचारी हैं एम्प्लाई कोड से वंचित

डॉक्टर्स व कर्मचारी संघ के मुताबिक जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 1684 कर्मचारी, भोपाल में 2010, इंदौर में 2240, ग्वालियर में 1970 व रीवा में 1590 कर्मचारियों के एम्प्लाई कोड नहीं हैं। राज्य के सबसे पुराने इन मेडिकल कॉलेजों में करीब 9 हजार 494 ऐसे चिकित्सक और कर्मचारी हैं जो इससे अब तक वंचित हैं।

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एम्प्लाई कोड क्यों है अनिवार्य?

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक एम्प्लाई कोड न होने के कारण कर्मचारियों का डेटा नई एकीकृत वित्तीय प्रणाली 'आईएफएमआईएस' में अपडेट नहीं किया जा पा रहा है। एम्प्लाई कोड के बिना कर्मचारियों का अंतर-विभागीय या अन्य स्थानों पर स्थानांतरण करना तकनीकी रूप से संभव नहीं हो पा रहा है। साथ ही, उनकी सर्विस बुक का आधिकारिक सत्यापन भी रुका हुआ है।

वित्तीय लाभों से हो जाएंगे वंचित

वर्तमान में कार्यरत कर्मचारी इस बात को लेकर टेंशन में हैं कि यदि एम्प्लाई कोड नहीं जनरेट किया गया तो ग्रेज्युटी, समयमान वेतनमान और अन्य सेवानिवृत्ति के बाद इससे जुड़े हुए लाभ लेना मुश्किल हो जाएगा।

तैयार नहीं हो पा रहा है कर्मचारियों का डेटा बेस 
कर्मचारी संघ के मुताबिक वर्तमान डिजिटल युग में, आॅनलाइन अवकाश रिकॉर्ड और अन्य व्यक्तिगत सेवा विवरणों का प्रबंधन एम्प्लाई कोड के माध्यम से ही होता है। कोड न होने से कर्मचारियों का यह डेटाबेस तैयार नहीं हो पा रहा है, जिससे उन्हें अपने ही रिकॉर्ड के लिए बार-बार प्रशासनिक चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

केवल पत्राचार से नहीं चलेगा काम : कर्मचारी संघ

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संघ ने इस मुद्दे को लेकर तीखा रुख अपनाते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग, भोपाल को पत्र लिखा है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र तिवारी ने बताया कि शासन केवल पत्राचार कर रहा है, जबकि कर्मचारियों का नुकसान हर दिन बढ़ता जा रहा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस बुनियादी तकनीकी समस्या का निराकरण तत्काल प्रभाव से नहीं किया गया, तो वे कर्मचारी  एक जुट होकर अधिकारों के लिए बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

डॉ. आशुतोष सिलोदिया का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में करीब 15 वर्ष पहले स्वशासी व्यवस्था के अंतर्गत चिकित्सकों की नियुक्ति हुई है। आज प्रदेश में करीब दो हजार शिक्षक स्वशासी में काम कर रहे हैं। ये कोड दिया जाना चाहिए ताकि वित्तीय संबंधी लाभ मिल सकें। 

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प्रो. डॉ. नवनीत सक्सेना, डीन एनएससीबी मेडिकल कॉलेज जबलपुर ने कहा कि शासन ने कॉलेज से एम्प्लाई कोड के लिए स्वशासी व्यवस्था में चिकित्सकों और कर्मचारियों की जानकारी मांगी थी। हमने पूरी जानकारी शासन को भेज दी है। ये कोड मुख्यालय स्तर से बनाया जाना है। 

डीएमई ने नहीं रिसीव किया फोन 
इस संबंध में जब डीएमई डॉ. अरुणा कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन ही रिसीब नहीं किया।

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Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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