पोलैंड में बड़ा सियासी बवाल, राष्ट्रपति ने बीच रास्ते से लौटाया विमान, सड़कों पर बवाल

Poland Political Crisis: पोलैंड में न्यायपालिका को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। देश की संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष को पद से हटाए जाने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। मामला इतना बढ़ गया कि राष्ट्रपति कारोल नवरोत्स्की ने अपनी सेनेगल यात्रा बीच में ही छोड़ दी और विमान वापस पोलैंड की ओर मोड़ दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे मुश्किल समय में उनका देश में रहना जरूरी है। दूसरी तरफ अदालत के बाहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस पूरे विवाद में प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और विपक्षी पार्टी लॉ एंड जस्टिस (PiS) आमने-सामने हैं।
राष्ट्रपति ने बीच रास्ते से वापस मोड़ा विमान
पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नवरोत्स्की सेनेगल की यात्रा पर जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें देश की संवैधानिक अदालत में चल रहे विवाद की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपना विदेश दौरा बीच में ही रद्द कर दिया। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि मौजूदा हालात को देखते हुए उनका पोलैंड में मौजूद रहना जरूरी है। इसलिए उन्होंने विमान वापस लौटाने का फैसला किया। राष्ट्रपति के इस कदम के बाद पोलैंड में जारी राजनीतिक विवाद और चर्चा में आ गया है।
अदालत के अध्यक्ष को हटाने पर भड़का विवाद
पोलैंड की संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष बोगदान स्विएंत्कोव्स्की को शुक्रवार को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद पुलिस अदालत की इमारत में पहुंची और वहां की सुरक्षा अपने हाथ में ले ली। इस फैसले से नाराज लोग अदालत के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार ने अदालत के अध्यक्ष को गलत तरीके से हटाया है। कुछ प्रदर्शनकारी पोस्टर लेकर पहुंचे थे, जिन पर सरकार के खिलाफ नारे लिखे थे। वहीं, कुछ लोग अदालत के बाहर प्रार्थना करते दिखाई दिए।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प
अदालत के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ गया। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों की तरफ खतरनाक वस्तुएं फेंकीं। इसके बाद अदालत के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। प्रदर्शनकारी सरकार के फैसले का विरोध कर रहे थे और अदालत के कामकाज में राजनीतिक दखल देने का आरोप लगा रहे थे। इस घटना ने पोलैंड में पहले से चल रहे न्यायपालिका और सरकार के विवाद को और बढ़ा दिया है।
सरकार और विपक्ष के बीच क्यों है टकराव?
पोलैंड में न्यायपालिका को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। एक तरफ प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की यूरोप समर्थक सरकार है, जबकि दूसरी तरफ दक्षिणपंथी पार्टी लॉ एंड जस्टिस (PiS) है। इस पार्टी ने 2015 से 2023 तक पोलैंड में शासन किया था। PiS पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने अपने शासन के दौरान अदालतों और न्यायिक संस्थानों पर राजनीतिक नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की। इन्हीं विवादों के कारण यूरोपीय संघ ने पोलैंड पर जुर्माना भी लगाया था। हालांकि, PiS इन आरोपों का विरोध करती रही है।
जजों की नियुक्ति को लेकर भी विवाद
राष्ट्रपति कारोल नवरोत्स्की को PiS का करीबी माना जाता है। उन्होंने इस साल संसद द्वारा चुने गए छह जजों में से तीन को शपथ दिलाने से इनकार कर दिया था। वहीं, संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष बोगदान स्विएंत्कोव्स्की ने मौजूदा संसद के बहुमत से चुने गए जजों को काम करने की अनुमति नहीं दी थी। स्विएंत्कोव्स्की की नियुक्ति पिछली PiS सरकार के दौरान हुई थी। वह पहले उप-कानून मंत्री भी रह चुके हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर सरकार और अदालत के बीच विवाद बढ़ता गया।
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PM टस्क बोले- कानून का राज बहाल करना जरूरी
प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि देश में कानून का राज वापस लाना उनकी सरकार की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, पिछली PiS सरकार के दौरान न्याय व्यवस्था में कई नियमों का उल्लंघन हुआ था। अब व्यवस्था को सुधारना आसान नहीं है और इसके लिए सख्त फैसले लेने होंगे। टस्क सरकार 2023 में सत्ता में आने के बाद से न्यायपालिका में बदलाव करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, PiS से जुड़े राष्ट्रपतियों ने सरकार के कई फैसलों का विरोध किया है।
विपक्ष ने लगाया तख्तापलट का आरोप
पूर्व कानून मंत्री ज्बिग्निएव जियोब्रो ने अदालत में हुई कार्रवाई को तख्तापलट बताया। उन्होंने लोगों से सरकार के फैसले का विरोध करने की अपील की। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री मोराविएत्स्की ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना एक जज ने खुद को अदालत का प्रमुख घोषित कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि एक विवादित व्यवस्था को हटाकर दूसरी विवादित व्यवस्था बनाने से भविष्य में भी ऐसे टकराव हो सकते हैं।
अमेरिका ने भी जताई चिंता
पोलैंड में अमेरिकी राजदूत टॉम रोज ने अदालत में चल रहे घटनाक्रम को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और अदालत के बाहर बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से हालात बिगड़ सकते हैं। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि अमेरिका पोलैंड की सुरक्षा, स्थिरता और लोकतांत्रिक भविष्य को लेकर चिंतित है। हालांकि, अमेरिका पोलैंड के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देना चाहता। फिलहाल पोलैंड में सरकार, राष्ट्रपति और विपक्ष के बीच विवाद जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संवैधानिक अदालत का संकट कैसे सुलझता है।




















