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क्या अमेरिका में खत्म हो जाएगा लोकतंत्र? चुनाव से पहले एलन मस्क की चेतावनी, 442 मिलियन डॉलर का लगाया दांव

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है। एलन मस्क ने 2028 में डेमोक्रेट्स की जीत से लोकतंत्र को खतरा होने की आशंका जताई है। रिपोर्ट के अनुसार, मस्क रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में 442 मिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। वहीं, चुनावी सर्वे में डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।
क्या अमेरिका में खत्म हो जाएगा लोकतंत्र? चुनाव से पहले एलन मस्क की चेतावनी, 442 मिलियन डॉलर का लगाया दांव
अमेरिका में किसकी बनेगी सरकार? चुनाव से पहले डेमोक्रेट्स को बढ़त, एलन मस्क ने खोला पैसों का पिटारा

US Midterm Elections 2026: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ डेमोक्रेटिक पार्टी चुनावी मैदान में बढ़त बनाती दिखाई दे रही है। इसी बीच दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क की एक चेतावनी ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मस्क ने आशंका जताई है कि अगर 2028 में डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति पद और अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर कब्जा कर लेती है, तो देश की राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह बदल सकती है। इस बीच मस्क के चुनाव में 442 मिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च करने की जानकारी भी सामने आई है।

अमेरिका में लोकतंत्र खत्म होने की आशंका क्यों?

जानकारी के मुताबिक, एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अमेरिका के राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंता जताई है। उनकी आशंका है कि अगर 2028 में डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति चुनाव के साथ प्रतिनिधि सभा और सीनेट में भी बहुमत हासिल कर लेती है, तो देश में बड़े राजनीतिक बदलाव हो सकते हैं। इस स्थिति में अमेरिका की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था प्रभावित होने और एक ही पार्टी का लंबे समय तक दबदबा बनने की आशंका जताई गई है। हालांकि, यह एक राजनीतिक अनुमान है। डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से लोकतंत्र समाप्त होने का कोई निश्चित आधार सामने नहीं आया है।

डेमोक्रेट्स की जीत से क्या बदल सकता है?

जानकारी के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी के सत्ता में आने की स्थिति को लेकर तीन बड़ी आशंकाएं सामने आई हैं। पहली आशंका वॉशिंगटन डीसी और प्यूर्टो रिको को अमेरिका के नए राज्य बनाने से जुड़ी है। ऐसा होने पर सीनेट में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। दूसरी आशंका अमेरिका की आव्रजन नीति से जुड़ी है। इसमें सीमाओं और अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को कानूनी दर्जा देने जैसे संभावित फैसलों का जिक्र है। तीसरी आशंका सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को लेकर है। ऐसा कोई बदलाव होने पर अदालत के राजनीतिक और संस्थागत संतुलन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ये संभावनाएं हैं, न कि तय फैसले।

51 सीनेट सीटों पर क्यों टिकी नजर?

अमेरिका में सीनेट की 100 सीटें हैं। सामान्य परिस्थितियों में 51 सीटों का समर्थन बहुमत के लिए पर्याप्त होता है। जानकारी के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी के लिए 2029 में सीनेट में कम से कम 51 सांसदों की मौजूदगी को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। दरअसल, सीनेट में बहुमत होने से किसी भी पार्टी को कानून बनाने और सरकारी नियुक्तियों से जुड़े फैसलों में बड़ी ताकत मिलती है। यही वजह है कि आगामी मध्यावधि चुनाव में सीनेट की सीटों को लेकर मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है।

चुनाव में मस्क ने खर्च किए 442 मिलियन डॉलर

अमेरिकी चुनाव में एलन मस्क की आर्थिक भागीदारी भी चर्चा में है। चुनावी चंदे से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, मस्क ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों और राजनीतिक संगठनों के समर्थन में 442 मिलियन डॉलर से ज्यादा की राशि खर्च की है। हालिया जानकारी के मुताबिक, पिछले एक महीने में उन्होंने अपने राजनीतिक संगठन अमेरिका पीएसी को अतिरिक्त 76.8 मिलियन डॉलर दिए। इससे पहले भी वह रिपब्लिकन उम्मीदवारों और उनसे जुड़े संगठनों पर करीब 366 मिलियन डॉलर खर्च कर चुके थे।

क्या है एलन मस्क का America PAC?

एलन मस्क ने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अमेरिका पीएसी नाम से एक राजनीतिक संगठन बनाया था। इसका उद्देश्य चुनावी गतिविधियों और उम्मीदवारों के समर्थन में आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है। अक्टूबर में इस संगठन को मस्क की ओर से बड़ी धनराशि मिली है। अमेरिका पीएसी उन चुनावी क्षेत्रों में भी सक्रिय है, जहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर है।

सर्वे में डेमोक्रेट्स को बढ़त

अमेरिका में चुनाव से पहले सामने आए सर्वे ने रिपब्लिकन पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा में 229 सीटें मिलने का अनुमान है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में कुल 435 सीटें हैं और बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में 229 सीटों का अनुमान डेमोक्रेट्स के लिए अच्छी खबर माना जा रहा है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के पास भी बहुमत बचाने की संभावना बनी हुई है।

महंगाई और अर्थव्यवस्था बने बड़े मुद्दे

अमेरिकी चुनाव में महंगाई और आर्थिक परेशानियां प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने आई हैं। सर्वे के मुताबिक, बड़ी संख्या में मतदाता अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं। लोगों को रोजगार, महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कई मतदाताओं को अभी भी किसी एक पार्टी की आर्थिक योजनाओं पर पूरा भरोसा नहीं है। डेमोक्रेट्स को बढ़त मिलने के बावजूद उनके पक्ष में कोई बड़ी चुनावी लहर दिखाई नहीं दे रही है।

टेक्सास चुनाव में भी मस्क की बड़ी भूमिका

अमेरिकी राज्य टेक्सास का सीनेट चुनाव भी चर्चा में है। यहां रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको के बीच मुकाबला बताया जा रहा है। चुनावी चंदे से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, मस्क ने सितंबर में सीनेट लीडरशिप फंड को कुल 158 मिलियन डॉलर दिए। इसमें 9 सितंबर को 75 मिलियन डॉलर और लगभग दो सप्ताह बाद 83 मिलियन डॉलर का योगदान शामिल है। यह संगठन रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवारों का समर्थन करता है।

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कई रिपब्लिकन संगठनों को मिला चंदा

एलन मस्क ने दूसरे राजनीतिक संगठनों को भी बड़ी आर्थिक सहायता दी है। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने केन पैक्सटन का समर्थन करने वाले लोन स्टार लिबर्टी पीएसी को 10 मिलियन डॉलर दिए। इसके अलावा कांग्रेसनल लीडरशिप फंड को 20 मिलियन डॉलर, रिपब्लिकन गवर्नर्स एसोसिएशन को 10 मिलियन डॉलर और रिपब्लिकन अटॉर्नी जनरल्स एसोसिएशन को 2 मिलियन डॉलर दिए गए। इन संगठनों की भूमिका रिपब्लिकन उम्मीदवारों के चुनावी अभियानों को समर्थन देना है।

ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट

चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता को लेकर भी नए आंकड़े सामने आए हैं। सितंबर में प्रकाशित वॉल स्ट्रीट जर्नल के सर्वे के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग घटकर 37 प्रतिशत रह गई थी। महंगाई और अर्थव्यवस्था से जुड़ी चिंताएं उनकी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इस बीच ट्रंप ने 27 अक्टूबर को निष्पक्ष चुनाव होने की स्थिति में नतीजे स्वीकार करने की बात कही थी।

3 नवंबर को तय होगा सत्ता का संतुलन

अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति पद के लिए नहीं, बल्कि संसद में राजनीतिक ताकत तय करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल करती है, तो ट्रंप प्रशासन के लिए कई कानून और प्रस्ताव पारित कराना मुश्किल हो सकता है। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी अपना नियंत्रण बनाए रखने में सफल होती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी नीतियां आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल चुनावी सर्वे, राजनीतिक चंदे और एलन मस्क की चेतावनी ने अमेरिकी राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 3 नवंबर के चुनावी नतीजों पर है।

Dolly Wasvani
By Dolly Wasvani

डोली वासवानी | People’s Institute of Media Studies से BAMC Student। पत्रकारिता की दुनिया में नई शुरु...

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