अमेरिका की नाटो सहयोगियों को सलाह- रूस के खिलाफ बयानबाजी में बरतें संयम, पेंटागन ने दी चेतावनी

वॉशिंगटन। पेंटागन के अधिकारियों ने नाटो के कई सहयोगी देशों से निजी बातचीत में रूस से जुड़े खतरों पर सार्वजनिक बयान देते समय संयम बरतने की अपील की है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि हाल के हफ्तों में कुछ यूरोपीय नेताओं की बयानबाजी पूरे महाद्वीप की सुरक्षा के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इस बातचीत से परिचित चार लोगों के हवाले से बताया कि अमेरिका की ओर से यह संदेश पाने वाले देशों में लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया शामिल हैं। इन देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों के दौरान यह मुद्दा उठाया गया। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वॉशिंगटन ने अन्य यूरोपीय सरकारों से भी इसी तरह का अनुरोध किया है या नहीं।
बातचीत से यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म कराने की कोशिश
अमेरिका का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन बातचीत के जरिए यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के प्रयास तेज कर रहा है। पांचवें साल में पहुंच चुके इस संघर्ष को खत्म करने के लिए वॉशिंगटन ने नई राजनयिक पहल शुरू की है। इसके तहत मॉस्को को कुछ रियायतें देने, जैसे प्रतिबंधों में ढील पर विचार किया जा रहा है। वहीं, कीव पर रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए जा रहे हमले रोकने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
पेंटागन के अधिकारियों ने बात करने से इंकार किया
इस मामले पर पेंटागन के एक अधिकारी ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा- सहयोगी देशों के बीच हुई निजी बातचीत निजी ही रहती है, इसलिए हम इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। चर्चा से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को यूरोप के कुछ नेताओं के उन बयानों पर आपत्ति है, जिनमें रूस को घिरा हुआ और यूक्रेन में अपनी धीमी पड़ती सैन्य प्रगति से हताश बताया गया है। सूत्रों ने बताया कि यूरोपीय सहयोगियों तक यह संदेश पहुंचाने वालों में पेंटागन के नीति प्रमुख एलब्रिज कोल्बी भी शामिल थे। वह यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समीक्षा की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, रॉयटर्स यह पता नहीं लगा सका कि अमेरिकी पक्ष की ओर से इस बातचीत में और कौन-कौन शामिल था। इस मामले से जुड़े तीन यूरोपीय अधिकारियों और एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि बातचीत का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा और किसी तरह का टकराव नहीं हुआ।
पेंटागन का संदेश- रूस को उकसाने वाली बयानबाजी से बचें
अमेरिका की इस पहल ने नाटो के भीतर रूस की बढ़ती आक्रामकता पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देने के तरीके को लेकर मौजूद मतभेदों को सामने ला दिया है। कुछ पश्चिमी अधिकारियों का मानना है कि मॉस्को के इरादों को लेकर बेहद सख्त चेतावनी देना उल्टा क्रेमलिन के हित में जा सकता है। उनका तर्क है कि इस तरह के बयानों से लोगों के बीच डर बढ़ सकता है और यूक्रेन के समर्थन में जनमत कमजोर पड़ सकता है।
रूसी खतरे को सामने लाएं सरकारें
वहीं, दूसरे पक्ष का मानना है कि यूरोपीय सरकारों को अपने नागरिकों के सामने रूसी खतरे की वास्तविक स्थिति खुलकर रखनी चाहिए। उनके अनुसार, मॉस्को को रोकने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने और इसके लिए आवश्यक बलिदानों के प्रति जनता का समर्थन हासिल करना महत्वपूर्ण है। खासकर ऐसे समय में जब पूरे यूरोप में रूस से जुड़े कथित तोड़फोड़ अभियानों को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। हालांकि, रूस ने इस तरह के किसी भी अभियान में अपनी भूमिका से इनकार किया है। मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने रॉयटर्स को बताया कि कोल्बी ने हाल ही में बाल्टिक देश के एक अधिकारी को रूस को उकसाने से बचने की सलाह दी थी। उस अधिकारी के मुताबिक, कोल्बी ने उन टिप्पणियों का भी जिक्र किया था, जिनमें रूस को चूहे की तरह कोने में फंसा हुआ बताया गया था। उन्होंने इस तरह की भाषा को अनुपयोगी करार दिया है।




















