चीन के कदम पर भड़का अमेरिका, फिलीपींस के मछुआरों को लेकर जताई चिंता

दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। विवाद की वजह स्कारबोरो रीफ (Scarborough Reef) को लेकर चीन का नया कदम है। चीन ने इस इलाके में ‘राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व’ के प्रबंधन के लिए नए नियम जारी किए हैं। अमेरिका ने चीन की इस कार्रवाई का खुलकर विरोध किया है और कहा है कि इससे फिलीपींस के मछुआरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अमेरिका ने चीन के कदम को किया खारिज
अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका स्कारबोरो रीफ पर चीन के कथित अस्थिर करने वाले कदम को स्वीकार नहीं करता। अमेरिका का कहना है कि नए नियमों के जरिए फिलीपींस के मछुआरों को उनके पारंपरिक मछली पकड़ने वाले इलाकों तक पहुंचने से रोका जा सकता है। वॉशिंगटन ने साफ किया कि वह अपने सहयोगी फिलीपींस के साथ खड़ा है। अमेरिका ने एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
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चीन बना रहा पड़ोसी देशों पर दबाव
अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया कि वह दक्षिण चीन सागर में अपने क्षेत्रीय और समुद्री दावों को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी और पर्यावरण से जुड़े तर्कों का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिका के मुताबिक, स्कारबोरो रीफ पर राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व और उससे जुड़े नए नियम चीन की ओर से अपने पड़ोसी देशों की कीमत पर क्षेत्रीय दावों को मजबूत करने की एकतरफा कोशिश का एक और उदाहरण हैं।
चीन ने जारी किए नए नियम
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चीन ने 1 अगस्त को स्कारबोरो शोआल के लिए नए प्रबंधन नियम जारी किए। इन नियमों में कुल 16 अनुच्छेद हैं। चीन का कहना है कि इनका मकसद हाल ही में बनाए गए ‘राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व’ के प्रबंधन को बेहतर तरीके से चलाना है। इन नियमों को चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय, राष्ट्रीय वानिकी एवं घासभूमि प्रशासन, चाइना कोस्ट गार्ड और हैनान प्रांत की सरकार ने मिलकर जारी किया है। चीनी मीडिया के अनुसार, इनका उद्देश्य अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल, सूचना साझा करने और निगरानी को मजबूत करना है।
2025 में चीन ने रिजर्व बनाने को दी थी मंजूरी
चीन की स्टेट काउंसिल ने सितंबर 2025 में स्कारबोरो शोआल पर राष्ट्रीय प्रकृति रिजर्व बनाने की मंजूरी दी थी। इसके बाद अब इसके प्रबंधन को लेकर नए नियम सामने आए हैं। फिलीपींस और अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों में इस इलाके को स्कारबोरो शोआल कहा जाता है। यह क्षेत्र दक्षिण चीन सागर में स्थित है और लंबे समय से चीन और फिलीपींस के बीच विवाद का बड़ा कारण रहा है।
2016 के फैसले का भी है विवाद
स्कारबोरो रीफ का विवाद सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून भी जुड़ा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत बने मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने 2016 में फैसला सुनाया था कि फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मौजूद संसाधनों पर चीन के दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है। हालांकि, चीन ने इस फैसले को शुरू से ही मानने से इनकार किया है। अब अमेरिका ने चीन के नए कदम को 2016 के फैसले के खिलाफ बताया है।
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अमेरिका-फिलीपींस की नजदीकी से बढ़ सकती है हलचल
दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर टकराव होता रहा है। ऐसे में अमेरिका का खुलकर फिलीपींस के समर्थन में आना क्षेत्रीय तनाव को और चर्चा में ला सकता है। अमेरिका ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह फिलीपींस के साथ खड़ा है और स्वतंत्र एवं खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करता है।












