🌤️
--Bhopal, India

PU Special :अब AI गुरु-ये है बच्चों का नया ट्यूटर, गणित, निबंध, प्रोजेक्ट और साइंस असाइनमेंट में ले रहे मदद

इंदौर में मिडिल और सीनियर क्लास के विद्यार्थी होमवर्क, प्रोजेक्ट, निबंध, गणित और साइंस असाइनमेंट के लिए ChatGPT समेत अन्य AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिक्षक इसे पढ़ाई में सहायक मानते हैं, लेकिन खुद सोचने और लिखने की क्षमता कमजोर होने, गलत जानकारी और कॉपी-पेस्ट की आदत बढ़ने को लेकर चिंता भी जता रहे हैं।
Follow on Google News
अब AI गुरु-ये है बच्चों का नया ट्यूटर, गणित, निबंध, प्रोजेक्ट और साइंस असाइनमेंट में ले रहे मदद
AI Generated

प्रभा उपाध्याय, इंदौर। कभी होमवर्क में माता-पिता की मदद ली जाती थी, अब बच्चों का नया 'ट्यूटर' एआई बन गया है। मिडिल और सीनियर क्लास के कई छात्र गणित के सवालों से लेकर हिंदी-इंग्लिश के निबंध, प्रोजेक्ट और साइंस असाइनमेंट तक चैटजीपीटी और दूसरे एआई टूल्स से तैयार करा रहे हैं। इससे स्कूलों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है- क्या बच्चे सीख रहे हैं या सिर्फ उत्तर जमा कर रहे हैं?

क्या कहते हैं शिक्षक?

गरिमा विद्यालय के कंप्यूटर शिक्षक अंशुल चौहान बताते हैं कि 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी विज्ञान और गणित विषयों में एआई का सबसे अधिक उपयोग कर रहे हैं। इससे समय बचता है और विषय से जुड़ी जानकारी एक ही जगह मिल जाती है। हालांकि उनका मानना है कि एआई पढ़ाई का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक माध्यम होना चाहिए। सांदीपनि आश्रम, मूसाखेड़ी की शिक्षिका निधि शर्मा के अनुसार विद्यार्थी कठिन अवधारणाओं को आसान भाषा में समझने के लिए एआई का सहारा ले रहे हैं। स्कूलों में भी बच्चों को तकनीक के जिम्मेदार उपयोग की जानकारी दी जा रही है। 

छात्रों ने बताया एआई का उपयोग किस काम में सबसे ज्यादा

  • 62% प्रोजेक्ट
  • 40% होमवर्क
  • 48% निबंध
  • 41% गणित
  • 29% प्रेजेंटेशन
    (आंकड़े छात्रों और शिक्षकों से बातचीत के आधार पर)

Breaking News

AI के फायदे 

  • कठिन विषय आसान भाषा में समझाता है।
  • प्रोजेक्ट और प्रेजेंटेशन जल्दी तैयार हो जाते हैं।
  • अलग-अलग स्रोतों की जानकारी एक जगह मिलती है।
  • परीक्षा की तैयारी में समय बचता है।

ये भी पढ़ें: JPSC आंदोलन: सरकार और छात्रों के बीच बनी सहमति, 3 परीक्षाएं रद्द; वित्तीय लेन-देन की ED करेगी जांच

AI के नुकसान

  • खुद सोचने और लिखने की आदत कमजोर हो सकती है।
  • गलत या अधूरी जानकारी मिलने का खतरा।
  • कॉपी-पेस्ट संस्कृति बढ़ने का जोखिम।
  • शिक्षकों के लिए असली और एआई से बने उत्तर पहचानना मुश्किल।

शिक्षकों के लिए नई चुनौती

शिक्षकों का कहना है कि एआई से तैयार उत्तर अधिक व्यवस्थित और परिपक्व दिखाई देते हैं। ऐसे में कई बार पहचान पाना मुश्किल हो जाता है कि उत्तर विद्यार्थी ने लिखा है या एआई ने।

परीक्षा प्रणाली को बदलना होगा

'आने वाले समय में परीक्षा प्रणाली को भी बदलना होगा। केवल लिखित उत्तरों के बजाय मौखिक परीक्षा, प्रोजेक्ट आधारित मूल्यांकन और विश्लेषण क्षमता को अधिक महत्व देना पड़ेगा।'

मोहित दुबे, वाइस प्रिंसिपल, सत्य साईं स्कूल इंदौर

ये भी पढ़ें: हर घर तिरंगा अभियान का बने हिस्सा, आजादी के जश्न से पहले PM मोदी की देशवासियों से अपील

एआई पढ़ाई को सरल और रोचक बना रहा है

'मैं प्रोजेक्ट और प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए एआई का उपयोग करती हूं। जिन विषयों पर संदर्भ सामग्री आसानी से नहीं मिलती, वहां यह काफी मददगार साबित होता है। चैटजीपीटी पढ़ाई को सरल और रोचक बना रहा है।'

शर्लिन उपाध्याय, छात्रा

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

icon

Latest Posts