PU Special :पितरों के तर्पण में बेटियों की बढ़ रही भागीदारी, रोज अर्पित कर रहीं जल
सिद्धार्थ तिवारी, जबलपुर। पितरों का तर्पण और श्राद्ध केवल बेटों का ही दायित्व है, यह सोच अब बदल रही है। शहर में पितृपक्ष के दौरान अपने पितरों का तर्पण करने वाली युवतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शनिवार को पूर्णिमा के अवसर पर पितरों का आह्वान करने के लिए गौरीघाट समेत अन्य घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इनमें युवतियां भी शामिल रहीं। उन्होंने पंडितों से तर्पण की विधि समझी और पूरे विधान के साथ अपने पितरों का तर्पण किया। तर्पण के बाद युवतियों ने पितरों का आह्वान कर घर के लिए प्रस्थान किया। इस दौरान उन्होंने पंडितों से यह भी जाना कि पितृपक्ष में रोजाना किस प्रकार पितरों को जल अर्पित करना है। कई युवतियां ऐसी भी थीं, जो पहले से अपने पितरों का तर्पण करती आ रही हैं, जबकि कुछ ने इस वर्ष से इसकी शुरुआत की है।
5-10 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंची संख्या
गौरीघाट में पितरों का पूजन कराने वाले पंडितों के अनुसार कुछ वर्षों पहले तर्पण करने आने वाली महिलाओं और युवतियों की संख्या करीब 5 से 10 प्रतिशत तक रहती थी। अब यह बढ़कर करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। खासतौर पर इकलौती संतान बेटियां अपने माता-पिता और पूर्वजों के प्रति बेटे की तरह जिम्मेदारी निभाते हुए तर्पण कर रही हैं। ये युवतियां पितृमोक्ष अमावस्या पर पितरों को विदाई देने भी घाट पहुंचती हैं।
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सोशल मीडिया से भी बढ़ रही जागरुकता
तर्पण के दौरान कुछ युवतियां पूजा और जल अर्पित करते हुए वीडियो और रील्स भी बना रही हैं। सोशल मीडिया पर इनके प्रसारित होने से अन्य युवतियों में भी पितरों का तर्पण करने को लेकर जागरुकता बढ़ रही है। लोगों द्वारा इन रील्स को लाइक और शेयर कर बेटियों के समर्पण की सराहना की जा रही है।
पितरों का तर्पण बेटी या बेटा कोई भी कर सकता है
हर साल की तरह इस बार भी युवतियां पितरों के तर्पण के लिए पहुंचीं, लेकिन इस बार उनकी संख्या अधिक रही। विधान के अनुसार पितरों का तर्पण बेटा या बेटी कोई भी कर सकता है। इसमें किसी तरह का बंधन नहीं है।
पंडित चंद्रभूषण उपाध्याय, तलवार वाले पंडा, गौरीघाट, जबलपुर
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