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इंदौर ग्रामीण पुलिस की सोच भी ग्रामीण जैसी:300 किलो विस्फोटक का सुराग नहीं, मंदिर चोरी पकड़कर थपथपा रही पीठ

इंदौर की ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बड़गोंदा के सीतापाट स्थित गोडाउन से 300 किलो विस्फोटक और 375 मीटर डेटोनेटिंग फ्यूज चोरी हुए एक महीना बीत गया, लेकिन अब तक सुराग नहीं मिला। इतनी संवेदनशील सामग्री कहां गई, इसका जवाब नहीं है। दूसरी ओर, मंदिर चोरी के खुलासे पर पीठ थपथपाई जा रही है। सवाल है-जनता की सुरक्षा प्राथमिकता है या सिर्फ उपलब्धियां गिनाना?
इंदौर ग्रामीण पुलिस की सोच भी ग्रामीण जैसी:300 किलो विस्फोटक का सुराग नहीं, मंदिर चोरी पकड़कर थपथपा रही पीठ
प्रतीकात्मक फ़ोटो

इंदौर। प्रदेश में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बाद शहर और ग्रामीण पुलिस की जिम्मेदारियां अलग-अलग कर दी गईं। लेकिन बड़गोंदा थाना क्षेत्र के सीतापाट में हुई विस्फोटक चोरी की वारदात ने ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पुलिस छोटी-मोटी चोरियों का खुलासा कर अपनी पीठ थपथपाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर करीब 300 किलो विस्फोटक सामग्री चोरी होने के मामले में अब तक ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। सवाल यह है कि आखिर ग्रामीण पुलिस की प्राथमिकता क्या है। अपनी उपलब्धियां गिनाना या जनता की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों का खुलासा करना?

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300 किलो विस्फोटक गायब, जिम्मेदारों के पास जवाब क्या?

बड़गोंदा थाना क्षेत्र के सीतापाट स्थित गोडाउन से 1 माह पहले  बदमाश 300 किलो विस्फोटक सामग्री और 375 मीटर डेटोनेटिंग फ्यूज चोरी कर ले गए। बताया गया कि आरोपी खिड़की तोड़कर अंदर घुसे और सीधे उस हिस्से तक पहुंचे, जहां विस्फोटक रखा था। वारदात को एक महीना बीतने के बाद भी चोरी गई सामग्री का पता नहीं चलना पुलिस की जांच पर सवाल खड़े करता है।

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यह कोई सामान्य चोरी नहीं है, जिसे केवल एक संपत्ति संबंधी अपराध मानकर फाइलों में सीमित कर दिया जाए। इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक का गायब होना सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। यदि यह सामग्री गलत हाथों में पहुंच गई, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि विस्फोटक कहां गया, किसके पास है और उसे बरामद करने के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई?

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मंदिर चोरी का खुलासा उपलब्धि, विस्फोटक चोरी का क्या?

पुलिस के लिए मंदिरों में हुई चोरी का खुलासा करना भी जरूरी है। लेकिन सवाल प्राथमिकताओं का है। जब एक ओर 300 किलो विस्फोटक और सैकड़ों मीटर डेटोनेटिंग फ्यूज चोरी होने जैसी गंभीर वारदात का खुलासा नहीं हो पा रहा, तब केवल दूसरी चोरियों के खुलासे को उपलब्धि बताकर संतुष्ट होना उचित नहीं माना जा सकता।ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को बताना चाहिए कि इस मामले में जांच कहां तक पहुंची, कितने संदिग्धों से पूछताछ हुई और विस्फोटक बरामद करने के लिए क्या रणनीति अपनाई गई। आखिर इतनी संवेदनशील सामग्री की चोरी के मामले में जवाबदेही किसकी है?

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आपसी खींचतान में कहीं सुरक्षा से तो समझौता नहीं?

पुलिस महकमे के भीतर अधिकारियों के बीच तालमेल और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस मामले में किसी आंतरिक विवाद की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि विभागीय मतभेद या समन्वय की कमी जांच को प्रभावित कर रही है, तो यह स्थिति और भी चिंताजनक होगी। देश और प्रदेश की सुरक्षा से जुड़े मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।विस्फोटक चोरी के मामले में पुलिस को केवल कार्रवाई का दावा करने के बजाय जांच की प्रगति और बरामदगी की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जनता को यह जानने का अधिकार है कि इतनी बड़ी मात्रा में संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा में चूक कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की गई।

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सवाल पूछने वालों से शिकायत, लेकिन जवाब कौन देगा?

पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि गंभीर मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। यदि कोई मीडिया संस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, तो उसका जवाब तथ्यों और कार्रवाई से दिया जाना चाहिए। आलोचना से असहज होने के बजाय पुलिस को यह बताना चाहिए कि विस्फोटक चोरी के मामले में अब तक क्या हासिल हुआ है।

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सबसे बड़ा सवाल यही है-सीतापाट के गोडाउन से चोरी हुआ 300 किलो विस्फोटक आखिर कहां है? जब तक सामग्री बरामद नहीं होती और वारदात के पीछे शामिल लोगों का पता नहीं चलता, तब तक इस मामले को सामान्य चोरी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ग्रामीण पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सामने आकर जांच की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही का भी है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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