ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के 12-13 सैन्य विमान प्रभावित, एयर चीफ एपी सिंह ने बताई हमलों की पूरी तस्वीर

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 3 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान में किए गए भारतीय हमलों और वहां हुए नुकसान को लेकर कई अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई एयरबेस और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इन हमलों में रडार, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रनवे और हैंगर को नुकसान पहुंचा। एपी सिंह के मुताबिक, अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पास स्पष्ट लक्ष्य थे और तीनों सेनाओं ने मिलकर उन्हें हासिल करने के लिए काम किया। उन्होंने कहा कि अभियान में लंबी दूरी के हथियारों और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान में भारतीय हमलों का असर सैन्य बुनियादी ढांचे से लेकर विमानन क्षमता तक दिखाई दिया।
चार जगहों पर रडार और दो स्थानों पर कमांड सेंटर प्रभावित
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि भारतीय हमलों में पाकिस्तान के कम से कम चार स्थानों पर रडार प्रभावित हुए। इसके अलावा दो जगहों पर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को नुकसान पहुंचा। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के दो रनवे क्षतिग्रस्त हुए और तीन अलग-अलग स्थानों पर बने हैंगर भी हमलों की चपेट में आए। इसके अलावा एक SAM सिस्टम के नष्ट होने की जानकारी भी उन्होंने दी। इन सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों का आकलन भारतीय वायुसेना की पोस्ट-स्ट्राइक असेसमेंट के आधार पर बताया गया था।
चार से पांच F-16 को जमीन पर नुकसान का दावा
एपी सिंह ने बताया कि भारतीय हमलों में पाकिस्तान के चार से पांच लड़ाकू विमान जमीन पर नष्ट या प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि ये विमान संभवतः F-16 थे, क्योंकि संबंधित स्थान पर उस समय F-16 विमानों की मौजूदगी और रखरखाव की गतिविधियां थीं। उन्होंने साथ ही एक C-130 श्रेणी के विमान के प्रभावित होने के संकेत मिलने की बात कही। भारतीय वायुसेना प्रमुख ने यह भी बताया कि एक अन्य लंबी दूरी के हमले में एक ऐसा विमान प्रभावित हुआ, जो AEW&C या SIGINT श्रेणी का हो सकता है।
कुल नुकसान 12 से 13 सैन्य विमानों का आकलन
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को हुए कुल विमानन नुकसान के बारे में एपी सिंह ने कहा कि भारतीय आकलन के अनुसार करीब 12 से 13 पाकिस्तानी सैन्य विमान नष्ट या प्रभावित हुए। इसमें जमीन पर हुए नुकसान के साथ हवा में हुई कार्रवाई को भी शामिल किया गया। उन्होंने बताया कि हवाई कार्रवाई में भी पाकिस्तानी विमानों को नुकसान पहुंचाया गया। उनके मुताबिक इनमें F-16 और JF-17 श्रेणी के लड़ाकू विमान शामिल थे। अलग-अलग बयानों में उन्होंने जमीन पर हुए नुकसान और हवा में हुई कार्रवाई के आंकड़ों को जोड़ते हुए कुल संख्या का आकलन बताया। भारतीय वायुसेना की ओर से सामने रखे गए इस आकलन में कुछ विमानों के पूरी तरह नष्ट होने और कुछ के प्रभावित होने को एक साथ गिना गया था।
लंबी दूरी के हमलों से सैन्य ठिकानों तक पहुंच
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने ऑपरेशन की क्षमता बताते हुए लंबी दूरी के हथियारों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक भारतीय वायुसेना ने ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया, जिनकी मदद से पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे को दूर से निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि एक लंबी दूरी के हमले में 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर मौजूद लक्ष्य को निशाना बनाए जाने के संकेत मिले थे। इस कार्रवाई में एक AEW&C या SIGINT श्रेणी का विमान प्रभावित होने की बात कही गई। साथ ही F-16 और JF-17 श्रेणी के पांच उन्नत लड़ाकू विमानों के प्रभावित होने की जानकारी भी दी गई।
एयर डिफेंस ने भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका का भी एपी सिंह ने उल्लेख किया। इससे पहले उन्होंने S-400 जैसी लंबी दूरी की एयर डिफेंस प्रणाली की उपयोगिता पर बात करते हुए कहा था कि लंबी दूरी के रडार और मिसाइल सिस्टम दुश्मन के विमानों को उनकी हथियार इस्तेमाल करने की दूरी तक पहुंचने से पहले ही खतरे में डाल सकते हैं। उनके मुताबिक आधुनिक युद्ध में केवल लड़ाकू विमान ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि एयर डिफेंस, रडार, लंबी दूरी की मिसाइल और दूसरे नेटवर्क आधारित सिस्टम को साथ लेकर चलना जरूरी है।
सिर्फ ड्रोन के भरोसे नहीं जीता जा सकता युद्ध
ड्रोन की भूमिका पर भी एपी सिंह ने स्पष्ट राय रखी थी। उनका कहना था कि भविष्य के युद्ध में मानवयुक्त विमानों और मानव रहित सिस्टम के बीच संतुलन जरूरी होगा। केवल ड्रोन के भरोसे किसी बड़े युद्ध को जीतना संभव नहीं माना जा सकता। उन्होंने ड्रोन को वायु शक्ति का विस्तार बताते हुए कहा कि बड़ी संख्या में ड्रोन का एक साथ इस्तेमाल कर किसी दुश्मन की व्यवस्था पर दबाव बनाया जा सकता है। हालांकि, उनके मुताबिक इसके साथ लंबी दूरी की मारक क्षमता, भारी हथियार और आधुनिक लड़ाकू विमान भी जरूरी रहेंगे। यानी आने वाले समय की हवाई लड़ाई में ड्रोन, लड़ाकू विमान, लंबी दूरी के हथियार और एयर डिफेंस सिस्टम को एकीकृत तरीके से इस्तेमाल करने पर जोर रहेगा।
ऑपरेशन में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल पर जोर
एपी सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सशस्त्र सेनाओं के बीच समन्वय की भी बात कही थी। उनके मुताबिक अभियान के उद्देश्य स्पष्ट थे और उन्हें हासिल करने के लिए सेनाओं ने मिलकर काम किया। भारतीय वायुसेना प्रमुख के अनुसार ऑपरेशन में किसी एक हथियार या प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग क्षमताओं को एक साथ इस्तेमाल किया गया। इसका हिस्सा लंबी दूरी के हथियार, ड्रोन, लड़ाकू विमान और एयर डिफेंस सिस्टम रहे।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता क्यों जरूरी
एयर चीफ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत पर भी जोर दिया। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे संघर्षों के बीच सैन्य उपकरणों, हथियारों और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। ऐसे में युद्ध के समय केवल हथियारों का होना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके लिए जरूरी कलपुर्जे, रखरखाव और लॉजिस्टिक सपोर्ट की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण हो जाती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में आत्मनिर्भरता, लॉजिस्टिक मजबूती और सप्लाई चेन सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक आधुनिक युद्ध की बदलती परिस्थितियों में लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और नई तकनीक से जुड़ी तैयारियों को मजबूत करना जरूरी है।
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ऑपरेशन सिंदूर से सामने आई आधुनिक युद्ध की नई तस्वीर
एपी सिंह के बयानों से ऑपरेशन सिंदूर की एक ऐसी तस्वीर सामने आती है, जिसमें लंबी दूरी के हमले, सटीक लक्ष्य, एयर डिफेंस, मानवयुक्त विमान और ड्रोन जैसी क्षमताएं एक साथ काम करती दिखाई देती हैं। पाकिस्तान को हुए 12 से 13 सैन्य विमानों के नुकसान और रडार, कमांड सेंटर, रनवे तथा हैंगर पर हमलों का आंकड़ा भारतीय वायुसेना के आकलन के रूप में सामने रखा गया था। इन दावों की अलग-अलग स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है। एयर चीफ के मुताबिक भविष्य की हवाई लड़ाई में तकनीकी क्षमता के साथ मजबूत सप्लाई चेन, घरेलू रक्षा उत्पादन और अलग-अलग सैन्य प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।




















