
इंदौर। करीब 1.35 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों में से एक लाख से अधिक ने एग्जाम दिया और यह परीक्षा प्रदेश के 54 जिलों के 365 केंद्रों पर आयोजित की गई। इंदौर में 46 केंद्रों पर 18 हजार से अधिक पंजीकरण हुए थे, जिनमे लगभग 45 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज हुई। परीक्षा दो सत्रों में आयोजित हुई और इस बार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग लागू की गई, जिसमें प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक काटे गए। सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के चलते प्रवेश में समय लगा, वहीं परीक्षा शुरू होने से 30 मिनट पहले ही गेट बंद कर दिए गए, जिससे देर से आने वालों को एंट्री नहीं मिल सकी। अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड का क्यूआर कोड स्कैन किया गया। इसके बाद बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (आंखों की स्कैनिंग, फिंगरप्रिंट और फेस रिकग्निशन) किया गया। आखिर में मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया। कई उम्मीदवारों को ज्वेलरी, बेल्ट और जूते तक बाहर रखने पड़े। केंद्रों पर पुलिस बल तैनात रहा, जिसने व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
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परीक्षा दो शिफ्ट में आयोजित हुई। पहली सुबह 10 से 12 बजे तक और दूसरी दोपहर 2:15 से 4:15 बजे तक। इस बार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग लागू की गई, जिसमें प्रत्येक गलत उत्तर पर एक-तिहाई अंक काटे गए। अभ्यर्थियों के अनुसार, पेपर सिलेबस के अनुसार था। लेकिन नेगेटिव मार्किंग के कारण उन्होंने केवल उन्हीं प्रश्नों का उत्तर दिया, जिनमें वे पूरी तरह जानते थे। सुबह से ही परीक्षा केंद्रों के बाहर अभ्यर्थियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। सख्त जांच प्रक्रिया के कारण कई उम्मीदवार निर्धारित समय से दो घंटे पहले ही केंद्र पहुंच गए थे।
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करीब 1.35 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों में से एक लाख से अधिक ने परीक्षा दी। यह परीक्षा प्रदेश के 54 जिलों के 365 केंद्रों पर आयोजित की गई। इंदौर में 46 केंद्रों पर 18 हजार से अधिक पंजीकरण हुए थे। जिनमे लगभग 45 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज हुई। परीक्षा में कुल 72 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई। डॉ. आर. पंचभाई ने बताया कि परीक्षा शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न हुई और कहीं से भी गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली।
भीषण गर्मी के बीच परीक्षा देने पहुंचे अभ्यर्थियों को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ा। 90 मिनट पहले पहुंचने की अनिवार्यता के कारण सुबह से ही केंद्रों के बाहर भीड़ लग गई। कई जगह बैठने या छाया की व्यवस्था नहीं होने से अभ्यर्थियों को तेज धूप में इंतजार करना पड़ा। हालांकि कुछ केंद्रों पर सीमित सुविधाएं दी गईं। तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के चलते प्रवेश में समय लगा। सख्त जांच प्रक्रिया के कारण कई उम्मीदवार निर्धारित समय से दो घंटे पहले ही केंद्र पहुंच गए थे।