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LPG क्राइसिस :भारतीय तेल कंपनियां अंगोला से कर रही संपर्क, दोनों देशों के बीच मजबूत भरोसा, डील हुई तो ये फायदे मिलेंगे

इसके अलावा लॉजिस्टिक्स के लिहाज से भी अंगोला एक मजबूत विकल्प है। समुद्री रास्ते से गैस 12 से 18 दिनों में भारत पहुंच सकती है। साथ ही वहां एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित है और एनर्जी सेक्टर सरकार के नियंत्रण में होने से समझौते करना आसान हो जाता है।
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भारतीय तेल कंपनियां अंगोला से कर रही संपर्क, दोनों देशों के बीच मजबूत भरोसा, डील हुई तो ये फायदे मिलेंगे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। ईरान से जुड़े तनाव और सप्लाई चेन पर पड़े असर के बीच भारत में रसोई गैस (LPG) की कमी को लेकर सरकार और तेल कंपनियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। हालात से निपटने के लिए अब देश की बड़ी सरकारी कंपनियां नए विकल्प तलाश रही हैं। इसी कड़ी में देश की तेल कंपनियां हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और गेल अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल  से LPG खरीदने को लेकर बातचीत कर रही हैं।

    भारत खाड़ी देशों पर LPG के लिए 92 % निर्भर

    भारत की करीब 92% LPG सप्लाई खाड़ी देशों से होती है। मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए सरकार अब इस निर्भरता को कम करना चाहती है। यही वजह है कि वैकल्पिक सप्लाई स्रोतों की तलाश तेज कर दी गई है। अगर अंगोला के साथ यह डील होती है, तो गैस सप्लाई का नया रास्ता खुलेगा। जिससे देश में LPG की  सप्लाई कम समय और युद्ध क्षेत्रों के घेरे से बचते हुए देश में पहुंचेगी।

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    होर्मुज स्ट्रेट की झंझट होगी खत्म

    इस संभावित डील की एक बड़ी खासियत यह है कि अंगोला से आने वाली LPG को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। जहाज अटलांटिक और अरब सागर के रास्ते सीधे भारत पहुंच सकेंगे, जिससे जियो-पॉलिटिकल रिस्क कम होगा और सप्लाई ज्यादा सुरक्षित हो सकेगी।

    क्यों चुना गया अंगोला?

    भारत और अंगोला के बीच पहले से तेल और गैस व्यापार होता रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसा बना हुआ है। अंगोला में LPG के लिए जरूरी प्रोपेन और ब्यूटेन का पर्याप्त उत्पादन होता है, जिससे भारत को सीधे सप्लाई मिल सकती है।

    इसके अलावा लॉजिस्टिक्स के लिहाज से भी अंगोला एक मजबूत विकल्प है। समुद्री रास्ते से गैस 12 से 18 दिनों में भारत पहुंच सकती है। साथ ही वहां एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित है और एनर्जी सेक्टर सरकार के नियंत्रण में होने से समझौते करना आसान हो जाता है।

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    अगर डील हुई तो ये बड़े फायदे मिलेंगे

    • विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह डील फाइनल होती है, तो भारत में पहली बार अंगोला से LPG की सप्लाई शुरू होगी। 
    • इससे न सिर्फ गैस संकट से राहत मिलेगी, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
    • फिलहाल बातचीत शुरुआती दौर में है, लेकिन संकेत साफ हैं कि भारत अब गैस सप्लाई के लिए नए और सुरक्षित विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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