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संसद :नक्सलवाद सफाया से पहले अमित शाह बोले- जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगा...

गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी गई है। उन्होंने बताया कि एक समय रेड कॉरिडोर  कहे जाने वाले 12 राज्यों के बड़े हिस्से में फैले नक्सल प्रभाव में अब काफी कमी आई है।
नक्सलवाद सफाया से पहले अमित शाह बोले- जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगा...
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।
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    नई दिल्ली। देश की संसद में सोमवार का दिन नक्सलवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा को लेकर बेहद अहम रहा। अमित शाह ने लोकसभा में नियम 193 के तहत हुई शॉर्ट ड्यूरेशन चर्चा में हिस्सा लेते हुए सरकार की रणनीति, सुरक्षा बलों की भूमिका और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हुए विकास कार्यों का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। खास बात यह है कि केंद्र सरकार द्वारा नक्सलवाद के खात्मे के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन अब बेहद करीब है।

    नक्सलवाद विकास नहीं, विचारधारा की समस्या- शाह

    लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें विकास की कमी में नहीं, बल्कि एक खास विचारधारा में हैं। उन्होंने बताया कि 1925 में कम्युनिस्ट पार्टी का गठन विदेशी प्रभाव में हुआ, जिसके बाद 1964 में CPI(M) और 1969 में CPI(ML) बनी। शाह ने आरोप लगाया कि इन संगठनों का उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र का विरोध कर सशस्त्र क्रांति को बढ़ावा देना था।

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    मोदी सरकार में बदली तस्वीर

    गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी गई है। उन्होंने बताया कि एक समय रेड कॉरिडोर  कहे जाने वाले 12 राज्यों के बड़े हिस्से में फैले नक्सल प्रभाव में अब काफी कमी आई है। खासतौर पर बस्तर जैसे क्षेत्रों में नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है।

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    उन्होंने कहा कि सरकार ने इन इलाकों में हर गांव तक सड़क, स्कूल, राशन दुकान, बैंकिंग और मोबाइल नेटवर्क पहुंचाने का काम किया है। शाह ने सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान की सराहना करते हुए कहा कि उनकी वजह से छत्तीसगढ़, झारखंड, तेलंगाना, गढ़चिरौली और बालाघाट जैसे इलाकों में हालात तेजी से सुधरे हैं।

    ‘हथियार उठाने का जवाब सख्ती से मिलेगा’

    अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि किसी के साथ अन्याय हो सकता है, लेकिन इसका समाधान हथियार उठाना नहीं हो सकता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह भारत सरकार का है, जो भी हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता किया जाएगा।

    विपक्ष पर भी साधा निशाना

    गृह मंत्री ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के बाद 60 साल तक सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंचाई गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन इलाकों में दशकों तक घर, पानी, स्कूल और बैंकिंग तक नहीं थी, वहां अब विकास को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं है।

    डेडलाइन से पहले सरकार का दावा

    गौरतलब है कि अमित शाह ने एक साल पहले घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त कर दिया जाएगा। अब इस डेडलाइन से ठीक पहले सरकार का दावा है कि हालात में ऐतिहासिक सुधार हुआ है। हालांकि, इस मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर और बहस देखने को मिल सकती है।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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