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Iran Petroleum Minister:रूस के बाद तेहरान से भी म‍िलेगा सस्‍ता कच्‍चा तेल? ईरान के पेट्रोलियम मंत्री के दिल्ली दौरे पर टिकी निगाहें

अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद ऊर्जा बाजार में नई हलचल शुरू हो गई है। अगले सप्ताह ईरान के पेट्रोलियम मंत्री नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच तेल व्यापार, ऊर्जा सहयोग और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।
रूस के बाद तेहरान से भी म‍िलेगा सस्‍ता कच्‍चा तेल? ईरान के पेट्रोलियम मंत्री के दिल्ली दौरे पर टिकी निगाहें
फाइल फोटो

नई दिल्ली। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक बार फिर नई शुरुआत के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हाल में हुए अंतरिम समझौते के बाद दोनों देशों के संबंधों में नरमी आई है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी देखने को मिल सकता है। इसी बीच ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद अगले सप्ताह नई दिल्ली आने वाले हैं। उनके दौरे को भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और सस्ते क्रूड ऑयल की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

ऊर्जा सहयोग के नए दौर की तैयारी

अगले सप्ताह भारत में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक में ईरान की ओर से पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद हिस्सा लेंगे। यह यात्रा सुरक्षा संबंधी बैठक के लिए है लेकिन इसके साथ ही भारत और ईरान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को लेकर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। यह दौरा केवल औपचारिक नहीं है बल्कि दोनों देशों के बीच भविष्य की ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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अमेरिका-ईरान समझौते से बदली स्थिति

अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते ने वैश्विक तेल बाजार का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस समझौते के बाद ईरान के तेल निर्यात से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में राहत मिलने की खबरें सामने आई हैं। इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर भी स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। इस बदलाव के बाद ईरान अब दुनिया के बड़े ऊर्जा बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश उसके लिए सबसे अहम संभावित साझेदारों में शामिल हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है ईरानी तेल

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार बड़े पैमाने पर तेल आयात करना पड़ता है। ऐसे में यदि ईरान से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर तेल मिलना शुरू होता है तो इससे भारत की आयात लागत कम हो सकती है। सस्ता क्रूड ऑयल मिलने से परिवहन, उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र को भी राहत मिल सकती है। इसके अलावा भारत को अपने तेल आयात स्रोतों में विविधता लाने का अवसर भी मिलेगा।

फिर मजबूत हो सकते हैं व्यापारिक रिश्ते

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने हाल ही में कहा कि ईरान भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रतिबंध लागू होने से पहले दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 17 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका था। राजदूत का कहना है कि यदि प्रतिबंध पूरी तरह हट जाते हैं और बैंकिंग व्यवस्था सामान्य हो जाती है तो दोनों देशों के बीच व्यापार एक बार फिर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में तेल व्यापार के साथ साथ अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ने की संभावना है।

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मंत्री स्तर की बातचीत पर टिकी नजरें

नई दिल्ली यात्रा के दौरान मोहसिन पाकनेजाद और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच मुलाकात हो सकती है। अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है लेकिन ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकार इस संभावित बैठक को काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। यदि दोनों देशों के बीच तेल आपूर्ति और ऊर्जा निवेश को लेकर सकारात्मक बातचीत होती है तो आने वाले महीनों में भारत ईरान संबंधों में नई गति देखने को मिल सकती है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

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