पानी पर हाई कोर्ट का सवाल: आखिर निगम कर क्या रहा है?700 टैंकर, 1157 करोड़ खर्च... फिर भी क्यों प्यासा है इंदौर?

जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने नगर निगम से जलसंकट, भूजल संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की।
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700 टैंकर, 1157 करोड़ खर्च... फिर भी क्यों प्यासा है इंदौर?
फाइल फोटो

इंदौर में गहराते जलसंकट को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने नगर निगम को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि शहर में लगातार गिरते भूजल स्तर और पेयजल संकट से निपटने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। नगर निगम को 8 जून तक विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की युगलपीठ ने मानसून से पहले जल संरक्षण की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने पर विशेष जोर दिया। अदालत ने कहा कि वर्षा जल के अधिकतम संचयन और भूजल पुनर्भरण के लिए सभी शासकीय भवनों में स्थापित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तत्काल चालू किए जाएं।

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रेन वाटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज चैनलों की सफाई के निर्देश

कोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी सरकारी भवनों में लगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई कर उन्हें कार्यशील बनाया जाए। इसके साथ ही शहर में बने सभी रिचार्ज चैनलों की मानसून पूर्व सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षा का पानी सीधे भूजल स्तर बढ़ाने में उपयोग हो सके।

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जनहित याचिका में उठाए गए गंभीर सवाल

राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि शहर के कई हिस्सों में लोग पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण हजारों परिवार टैंकरों पर निर्भर हैं। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि तालाबों, जल स्रोतों, कुओं और बावड़ियों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास नहीं किए गए, जबकि भूजल पुनर्भरण की व्यवस्थाओं का भी उचित रखरखाव नहीं हो रहा है।

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48 साल बाद भी 20% शहर नर्मदा जल से वंचित

याचिका में उल्लेख किया गया है कि नर्मदा परियोजना का पहला चरण लगभग 48 वर्ष पहले शुरू हुआ था। इसके बाद तीन चरण पूरे हो चुके हैं और चौथे चरण का भूमिपूजन भी हो चुका है, लेकिन आज भी शहर का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा नर्मदा जलापूर्ति नेटवर्क से नहीं जुड़ पाया है। इन क्षेत्रों के निवासी अब भी बोरवेल और टैंकरों पर निर्भर हैं। गर्मियों में बड़ी संख्या में बोरवेल सूख जाने से हालात और गंभीर हो गए हैं।

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कान्ह नदी पर 1157 करोड़ खर्च, फिर भी हालत खराब

याचिका में कान्ह नदी की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि नदी के शुद्धिकरण पर अब तक लगभग 1157 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। याचिकाकर्ताओं के अनुसार नदी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) 70 से 104 एमजी प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि यह अधिकतम 3 एमजी प्रति लीटर होनी चाहिए।

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जलसंकट की वर्तमान स्थिति

  • नगर निगम का दावा है कि करीब 700 टैंकरों से जल वितरण किया जा रहा है।
  • शहर के कई हिस्सों में पानी को लेकर प्रदर्शन और चक्काजाम हुए।
  • बड़ी संख्या में बोरवेल गर्मी में सूख गए।
  • लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र अब भी नर्मदा जलापूर्ति से वंचित है।
  • हजारों परिवार टैंकरों पर निर्भर हैं।

हाई कोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • सभी शासकीय भवनों के रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम चालू किए जाएं।
  • मानसून से पहले उनकी सफाई सुनिश्चित की जाए।
  • सभी रिचार्ज चैनलों की सफाई कराई जाए।
  • जलसंकट से निपटने के लिए किए गए उपायों की विस्तृत जानकारी कोर्ट को दी जाए।
Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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