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हेलिकॉप्टर मिल जाए तो तुरंत पहुंच जाऊंगा... जस्टिस सप्रे का तंज

सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सप्रे ने गिनाईं कमियां; बोले- फुटपाथ कब्जामुक्त हों, सड़कों की बाधाएं हटें और बिना हेलमेट स्कूल-कॉलेज में एंट्री बंद हो
हेलिकॉप्टर मिल जाए तो तुरंत पहुंच जाऊंगा...  जस्टिस सप्रे का तंज
बुधवार को सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन व पुलिस की बैठक

 इंदौर। सड़क हादसों के आंकड़ों में सुधार को लेकर सुप्रीम कोर्ट सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष अभय मनोहर सप्रे ने इंदौर में मजाकिया अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “जहां जा रहा हूं, दुर्घटनाओं के आंकड़ों में कमी आ रही है, और सुधार हो रहा है। हेलिकॉप्टर मिल जाए तो अच्छा... तुरंत कहीं भी जा सकता हूं और पूरे भारत में बैठक ले सकता हूं।” उनके इस हल्के-फुल्के अंदाज के पीछे सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर संदेश भी था।  जस्टिस सप्रे ने कहा कि सड़क दुर्घटना होने के बाद केवल आंकड़े जुटाना पर्याप्त नहीं है। हर हादसे के पीछे की वजह तलाशनी होगी और अगली बैठक से पहले उस कमी को दूर करना होगा। उनका कहना था कि किसी स्थान पर बार-बार दुर्घटनाएं हो रही हैं तो यह देखना जरूरी है कि सड़क, यातायात व्यवस्था, अतिक्रमण या किसी अन्य कारण से समस्या पैदा हो रही है।

 

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रोड सेफ्टी कमेटी के चेयरमैन जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने बुधवार को सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों की जमकर क्लास ली। उन्होंने अफसरों से सीधे सवाल किया कि जो ब्लैक स्पॉट 2022 में हादसों के लिए चिन्हित थे, वे 2023, 2024 और अब 2026 में भी ब्लैक स्पॉट ही क्यों बने हुए हैं? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब इन स्थानों पर एक भी मौत नहीं होनी चाहिए। जस्टिस सप्रे ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। ‘यू आर आंसरेबल... ऐसा नहीं कि साहब गए तो सब खत्म।’ उन्होंने अधिकारियों से हादसों के कारणों पर काम करने और उन्हें दोबारा होने से रोकने की जवाबदेही तय करने को कहा।

 

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इंदौर की रफ्तार बढ़ी, अब ‘जीरो फैटलिटी’ की बारी

सप्रे ने कहा कि इंदौर तेजी से विकसित हो रहा है। वहीं उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। ऐसे में इंदौर को ‘जीरो फैटलिटी’ अभियान से जोड़ना जरूरी है। भोपाल को राजधानी होने के कारण अभियान में शामिल किया गया है, लेकिन इंदौर की बढ़ती गतिविधियों और यातायात दबाव को देखते हुए यहां भी सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए विशेष प्रयास जरूरी हैं।

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फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए, कब्जाधारियों के लिए नहीं

उन्होंने कहा कि फुटपाथ से अवैध कब्जे हटाना, सड़क पर यातायात में बाधा बनने वाली चीजों को हटाना और ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना सरकारी विभागों की जिम्मेदारी है। इसके लिए केवल कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरी रोड सेफ्टी व्यवस्था को मजबूत करना होगा।उन्होंने दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट नियम को लेकर भी सख्ती बरतने की बात कही। उनका कहना था कि हेलमेट पहनना महज चालान से बचने का तरीका नहीं, बल्कि जान बचाने का सबसे जरूरी सुरक्षा उपाय है।

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बिना हेलमेट स्कूल पहुंचे तो स्कूल में ही रोकें

सप्रे ने सड़क सुरक्षा की शुरुआत स्कूल-कॉलेज से करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं और बिना हेलमेट दोपहिया वाहन से आने वाले विद्यार्थियों और स्टाफ को संस्थान में प्रवेश नहीं दिया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों के ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए स्कूल-कॉलेज में ही शिविर लगाने का सुझाव दिया। पुलिस अधिकारियों को भी विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर उन्हें यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने की बात कही।

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ओवरस्पीडिंग बनी सबसे बड़ा खतरा

ग्रामीण क्षेत्र में आठ महीनों के दौरान 953 हादसे हुए। इनमें से 909 मामले ओवर-स्पीडिंग या रैश ड्राइविंग से जुड़े हैं। वहीं शहरी क्षेत्र में भी ओवर-स्पीडिंग से जुड़े 2,004 हादसे सामने आए हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट की अनदेखी भी जानलेवा साबित हो रही है। इस साल हेलमेट या सीट बेल्ट नहीं लगाने से 86 लोगों की मौत हुई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 79 था। वहीं हेलमेट या सीट बेल्ट लगाने के बावजूद इस साल 18 मौतें हुई हैं, जो पिछले साल 13 थीं।

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साइनेज है तो हादसे कम, नहीं है तो खतरा ज्यादा

बैठक में संकेतक बोर्डों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। जिन स्थानों पर संकेतक बोर्ड लगे थे, वहां इस साल अब तक 42 दुर्घटनाएं हुईं, जबकि जहां संकेतक नहीं लगे थे वहां 127 हादसे हुए। जस्टिस सप्रे ने बड़े-बड़े होर्डिंग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सड़कों के किनारे लगे बड़े होर्डिंग वाहन चालकों का ध्यान भटका सकते हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जहां बड़े होर्डिंग लगे हैं, वहां उनकी जगह जरूरत के मुताबिक बड़े और स्पष्ट रोड साइनेज लगाए जाएं।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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