'मैं भी स्वदेशी समर्थक हूं' अभियान : कारगिल विजय दिवस पर स्वदेशी का संकल्प, हरदा में एक लाख लोगों को जोड़ने का लक्ष्य

हरदा। कारगिल विजय दिवस केवल शहीदों को याद करने का दिवस नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा एवं प्रगति के लिए दलगत राजनीति, धर्म, अलगाववाद और जाति-पांति से ऊपर उठकर राष्ट्र सर्वोपरि के मंतव्य को दृष्टिगत रखते हुए स्वयं को समर्पित करने का संकल्प दिवस भी है। आज युद्ध केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापारिक कूटनीति के माध्यम से विकासशील देशों की बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर करने के लिए भी लड़े जा रहे हैं। अमेरिका लगातार अपनी टैरिफ नीति की धमकियों से भारत समेत अनेक प्रगतिशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर कुठाराघात कर आर्थिक संकट की स्थिति पैदा कर रहा है। ऐसी अवस्था में स्वदेशी का ब्रह्मास्त्र ही इन नीतियों पर विजय पाने का एकमात्र कारगर उपाय है। उक्त विचार डॉ. एलएन पाराशर ने एक अगस्त से 20 अगस्त तक संपूर्ण देश में चलने वाले स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘मैं भी स्वदेशी समर्थक हूं’ के जिले में क्रियान्वयन संबंधी बैठक में व्यक्त किए।
विद्यार्थियों, नागरिकों को ‘स्वदेशी’ से जोड़ेंगे
उल्लेखनीय है कि इस अभियान के तहत हरदा जिले के हाईस्कूल से लेकर महाविद्यालय के विद्यार्थियों, समस्त समाज के जागरूक नागरिकों, व्यापारियों, ग्राम पंचायतों एवं ग्रामीणों तथा विभिन्न संगठनों को स्वदेशी भावना से अवगत कराया जाएगा। अभियान के माध्यम से जिले में लगभग एक लाख लोगों को "मैं भी स्वदेशी समर्थक हूं" का संकल्प दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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बैठक में बनी रणनीति, शहीदों को दी श्रद्धांजलि
प्रांतीय अधिकारी रविलाल पटेल के व्यावसायिक प्रतिष्ठान पर आयोजित बैठक में पालक नरेंद्र भांबू, नरेंद्र राठी, ओमप्रकाश राठौड़, महेंद्र पटेल, विपिन अग्रवाल तथा योगमाया शर्मा ने निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में कारगिल युद्ध के अमर शहीदों एवं भारतीय सैनिकों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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