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Kaveri Engine ने रूस में रचा इतिहास, 48.5 kN थ्रस्ट के साथ पास किया हाई-एल्टीट्यूड टेस्ट पास, अब Ghatak Drone में लगेगा

भारत के लिए बड़ी जीत: कावेरी इंजन ने रूस में पास किया सबसे मुश्किल टेस्ट, Tejas के लिए नाकाम रहा कावेरी, अब Ghatak का बनेगा ब्रह्मास्त्र
 Kaveri Engine ने रूस में रचा इतिहास, 48.5 kN थ्रस्ट के साथ पास किया हाई-एल्टीट्यूड टेस्ट पास, अब Ghatak Drone में लगेगा
Kaveri Engine ने रूस में रचा इतिहास

नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी जेट इंजन प्रोग्राम को बड़ी कामयाबी मिली है। DRDO द्वारा बनाया गया Kaveri Dry Engine रूस में हाई-एल्टीट्यूड और फ्लाइट कंडीशन वाले सभी ट्रायल्स पास कर चुका है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस सफलता के बाद अब भारत के सबसे सीक्रेट और एडवांस्ड स्टील्थ UCAV 'घातक' में इस इंजन को लगाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सूत्रों ने बताया कि कावेरी ने रूस में कठिन टेस्टिंग के दौरान 48.5 किलोन्यूटन (kN) का पीक ड्राई थ्रस्ट पैदा किया, जबकि DRDO को 46 kN की उम्मीद थी, यानी इंजन ने उम्मीद से ज्यादा परफॉर्म किया है।

टेस्ट डेटा की जांच और एयरवर्दीनेस क्लीयरेंस

Ghatak UCAV के साथ इंटीग्रेशन कर भारतीय वायुसेना के साथ फ्लाइट ट्रायल किया जाएगा। सब कुछ ठीक रहा तो अगले 2-3 साल में घातक ड्रोन सर्विस में शामिल होने के लिए तैयार होगा।

क्या है कावेरी डेरिवेटिव इंजन

DRDO की लैब GTRE (Gas Turbine Research Establishment) द्वारा बनाए गए इस इंजन को Kaveri Derivative Engine (KDE) भी कहा जाता है। ये बिना आफ्टरबर्नर वाला जेट इंजन है। इसकी टेस्टिंग रूस के दो टॉप संस्थानों - CIAM (Central Institute of Aviation Motors) और Gromov Flight Research Institute में हुई है।

जानें क्यों खास है घातक UCAV

घातक कोई आम ड्रोन नहीं, बल्कि एक फ्यूचरिस्टिक हथियार है। इसका डिजाइन बिना पूंछ वाला Flying-Wing डिजाइन, जिसमें घुमावदार एयर इनटेक और स्पेशल एग्जॉस्ट है ताकि रडार इसे पकड़ न सके। इसका बॉडी 80-90% कार्बन-फाइबर प्रीप्रेग कंपोजिट से बनी है, जो वजन कम करती है और रडार वेव्स को सोख लेती है।

यह कर सकता है घातक

इसे डीप-स्ट्राइक मिशन के लिए बनाया गया है। यह मिसाइलें, बम और प्रिसिजन-गाइडेड हथियार इंटरनल वेपन बे में कैरी करेगा ताकि स्टील्थ प्रोफाइल बनी रहे। DRDO के इस स्टील्थ कॉम्बैट ड्रोन को तीन सबसे खतरनाक मिशनों के लिए तैयार किया जा रहा है। यह हैं...

  • डीप स्ट्राइक : दुश्मन की सबसे मजबूत एयर डिफेंस को चीरते हुए उसके कमांड सेंटर और रडार स्टेशनों को तबाह करना।
  • SEAD मिशन: दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को सप्रेस और डिस्ट्रॉय करना ताकि पीछे से फाइटर जेट्स के लिए रास्ता साफ हो सके।
  • मैनड-अनमैनड टीमिंग: भविष्य की जंग में ये तेजस Mk1A/Mk2 और 5th Gen AMCA फाइटर जेट के साथ मिलकर एक टीम की तरह लड़ेगा।

1980 से शुरू हुई कावेरी की कहानी, अब जाकर मिली मंजिल

कावेरी इंजन का सफर आसान नहीं रहा। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 1980 के दशक के आखिर में LCA तेजस के लिए हुई थी।लेकिन, तब ये इंजन जरूरी थ्रस्ट-टू-वेट रेश्यो हासिल नहीं कर पाया और वजन ज्यादा होने के कारण तेजस के प्रोडक्शन मॉडल में GE-404 इंजन लगाना पड़ा। इसी नाकामी से सीख लेकर वैज्ञानिकों ने नया रास्ता निकाला। उन्होंने कावेरी से आफ्टरबर्नर सेक्शन हटा दिया और एक नॉन-आफ्टरबर्निंग वैरिएंट - Kaveri Derivative Engine (KDE) बनाया।अब यही KDE वर्जन घातक UCAV को पावर देगा और भारत के आत्मनिर्भर स्टील्थ ड्रोन के सपने को पूरा करेगा।

Puneet Pandey
By Puneet Pandey

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