इंदौर। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पहले जहां 30 से 40 प्रतिशत मरीज फैटी लिवर के होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 50 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो चिंता का विषय है। खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके पीछे मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।
जब लिवर में सामान्य से अधिक चर्बी जमा हो जाती है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन बीमारी बढ़ने पर लगातार थकान, कमजोरी, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन और बिना वजह वजन कम होना इसके संकेत हो सकते हैं। आगे चलकर पीलिया, त्वचा में खुजली और शरीर में सूजन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं, जिससे यह बीमारी और गंभीर रूप ले सकती है।
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गैस्ट्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित अग्रवाल के अनुसार खराब लाइफस्टाइल इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है। जंक फूड, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय, घंटों बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ता मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं। एमवाय अस्पताल में करीब 20 प्रतिशत मरीज फैटी लिवर के हैं, जबकि हर साल लगभग 500 लिवर सिरोसिस के मरीज भर्ती हो रहे हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दिखाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि शराब फैटी लिवर का एक कारण जरूर है, लेकिन यह अकेली वजह नहीं है। ज्यादा शराब पीने से अल्कोहोलिक फैटी लिवर होता है, जबकि बिना शराब पिए भी खराब खान-पान और जीवनशैली के कारण नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में केवल शराब से दूरी ही नहीं, बल्कि खानपान पर नियंत्रण भी जरूरी है।
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फास्ट फूड का बढ़ता चलन, देर रात तक जागना, स्क्रीन टाइम बढ़ना, तनाव और एक्सरसाइज की कमी के कारण युवा और बच्चों में तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। फैटी लिवर शुरुआत में साइलेंट रहता है, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में बदल सकता है, इसलिए समय रहते सावधानी बेहद जरूरी है विशेषज्ञों के अनुसार नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, जंक फूड से दूरी, शराब का सीमित सेवन और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच इस साइलेंट बीमारी से बचाव के प्रभावी उपाय हैं, जिससे लिवर को स्वस्थ रखा जा सकता है।