डबरा के चीनौर स्थित एक सरकारी स्कूल में शुक्रवार रात भीषण आग लगने से 500 से ज्यादा साइकिलें और उनके पुर्जे जलकर खाक हो गए। ये साइकिलें छात्रों को वितरित करने के लिए लाई गई थीं लेकिन वितरण से पहले ही आग की चपेट में आ गईं। आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया लेकिन जब तक आग पर काबू पाया जाता तब तक पूरा सामान पूरी तरह जल चुका था। फिलहाल आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन मामले को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात में अचानक स्कूल परिसर से धुआं उठता देखा गया जिसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। बावजूद इसके, कई घंटों तक कोई राहत टीम मौके पर नहीं पहुंची। लोगों का कहना है कि लगातार कॉल करने के बाद भी सुबह तक फायर ब्रिगेड नहीं आई जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरा स्टॉक जल गया।
जांच में सामने आया है कि ये साइकिलें मुख्यमंत्री साइकिल वितरण योजना के तहत आई थीं। साइकिलों को अलग-अलग पुर्जों में मंगाकर स्कूल परिसर में ही असेंबल किया जा रहा था। इसी कारण बड़ी मात्रा में साइकिलों के पार्ट्स स्कूल में अलग-अलग जगह रखे गए थे जिससे आग फैलने में तेजी आई।
इस घटना के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि साइकिलों के पुर्जों की गुणवत्ता और असेंबलिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी हो सकती है। कुछ लोगों ने ठेकेदार और अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की भी आशंका जताई है हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और प्रशासन को सूचित किया गया। उन्होंने कहा कि जली हुई साइकिलें असेंबल होने के लिए लाई गई थीं और पूरे मामले की जांच की जा रही है।