नाबालिग बेटी को मां ने देह व्यापार के दलदल में धकेला, आरोपी मां को जमानत नहीं; MP हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

ग्वालियर। सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि जब एक नाबालिग बच्ची अपनी ही मां के पास सुरक्षित नहीं है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
पहली जमानत याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई। आपराधिक अपील क्रमांक 7741/2024 में आरोपी मां की ओर से सजा निलंबित कर जमानत दिए जाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया था। यह उसकी पहली जमानत याचिका थी। अदालत ने मामले से जुड़े तथ्यों, आरोपों की गंभीरता और पीड़िता की गवाही का परीक्षण करने के बाद राहत देने से इनकार कर दिया।
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पीड़िता ने जिरह में मां-पिता पर लगाए गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयान का विशेष रूप से उल्लेख किया। पीड़िता ने जिरह के दौरान स्पष्ट रूप से कहा था कि उसकी मां और पिता ने ही उसे देह व्यापार में धकेल दिया था। इसके अलावा उसने बताया कि जब सह आरोपी उसके साथ यौन शोषण कर रहे थे, तब उसकी मां भी वहां मौजूद रहती थी। पीड़िता के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में मां या तो कमरे से बाहर चली जाती थी या फिर सोने का नाटक करती थी। अदालत ने पीड़िता की गवाही में सामने आए इन तथ्यों को गंभीरता से लिया।
मां की भूमिका पर अदालत ने जताई गंभीर चिंता
हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर चिंता जताते हुए कहा कि एक नाबालिग बच्ची के लिए सबसे सुरक्षित स्थान उसका परिवार और मां का संरक्षण होता है। लेकिन जब बच्ची अपनी ही मां के पास सुरक्षित नहीं है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों और पीड़िता की गवाही को देखते हुए जमानत देने का कोई उचित आधार नहीं पाया। इसी के साथ आरोपी मां की पहली जमानत याचिका खारिज कर दी गई।




















