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भारत ने फिर छुआ अंतरिक्ष! GSLV-F17 की सफलता पर PM मोदी ने कहा- गर्व का पल, खेती से बाढ़ तक आएगा काम….

ISRO ने GSLV-F17 रॉकेट से EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज दिया। मिशन की सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों और भारतीय उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की बढ़ती ताकत, नई तकनीक और लगातार हो रहे इनोवेशन का उदाहरण बताया। सैटेलाइट से खेती और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी।
भारत ने फिर छुआ अंतरिक्ष! GSLV-F17 की सफलता पर PM मोदी ने कहा- गर्व का पल, खेती से बाढ़ तक आएगा काम….
GSLV-F17 ने सफलतापूर्वक भरी अंतरिक्ष उड़ान

श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने शुक्रवार को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट ने EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक तय कक्षा की ओर रवाना किया। उड़ान के करीब 18 मिनट बाद उपग्रह को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया। इस मिशन का इस्तेमाल पृथ्वी की तस्वीरें और जरूरी जानकारी जुटाने के लिए किया जाएगा। इससे खेती, मौसम, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में मदद मिलने की उम्मीद है। मिशन की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO की टीम को बधाई देते हुए इसे देश के लिए गौरव का क्षण बताया।

GSLV-F17 ने भरी सफल उड़ान

ISRO का GSLV-F17 रॉकेट शुक्रवार तड़के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रवाना हुआ। लॉन्च के बाद रॉकेट ने EOS-05 को तय कक्षा में पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी की। करीब 18 मिनट बाद सैटेलाइट को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया। EOS-05 का वजन करीब 2,367 किलोग्राम बताया गया है। यह एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जिसका काम पृथ्वी की निगरानी से जुड़ी जरूरी जानकारी जुटाना है।

PM मोदी ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

मिशन सफल होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ISRO की टीम को बधाई दी। उन्होंने इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का पल बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि EOS-05 को जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट तक पहुंचाने वाला GSLV-F17 मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की तकनीकी क्षमता और नए प्रयोगों को दिखाता है। उन्होंने ISRO और भारतीय उद्योगों के बीच बढ़ती साझेदारी को भी अहम बताया।

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खेती से आपदा प्रबंधन तक आएगा काम

EOS-05 को सिर्फ अंतरिक्ष से तस्वीरें लेने वाला उपग्रह नहीं माना जा रहा है। इससे मिलने वाला डेटा कई जरूरी क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। खेती में फसलों और जमीन की स्थिति समझने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा बाढ़, चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी उपयोगी होगी। रियल टाइम डेटा से संबंधित एजेंसियों को हालात समझने और जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

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ISRO प्रमुख ने ‘जासूसी सैटेलाइट’ की बात नकारी

ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने EOS-05 को लेकर चल रही ‘जासूसी सैटेलाइट’ वाली चर्चाओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों की सुरक्षा और देश के विकास से जुड़े कामों के लिए जानकारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि इस मिशन की सफलता के बाद ISRO की टीम अगले बड़े अभियानों पर भी काम कर रही है। इनमें गगनयान का पहला बिना क्रू वाला मिशन प्रमुख है।

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इस वित्त वर्ष में छह और लॉन्च का लक्ष्य

ISRO प्रमुख के मुताबिक इस वित्त वर्ष में संगठन ने छह और लॉन्च का लक्ष्य रखा है। इनमें नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 भी शामिल है। उन्होंने कहा कि टीम लगातार आगे के मिशनों की तैयारी में जुटी है। गगनयान के पहले बिना क्रू वाले मिशन को भी इस कैलेंडर ईयर में लॉन्च करने की दिशा में काम चल रहा है। EOS-05 की सफलता ने इन आगामी अभियानों के लिए ISRO का आत्मविश्वास और मजबूत किया है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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