बदल दी परिभाषा...राज्यपाल मंगुभाई पटेल पांच साल में मप्र के सभी 55 जिलों में पहुंचे, किए 220 से ज्यादा दौरे

मनीष दीक्षित, भोपाल। राज्यपाल का नाम आते ही जेहन में एक ऐसी संवैधानिक संस्था की छवि बनती है, जिसका काम अधिकतर राजभवन तक ही सीमित रहती है। लेकिन मप्र के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने इस धारणा को बदल दिया है। उन्होंने खुद को केवल शपथ समारोहों, विश्वविद्यालय की बैठकों और सरकारी आयोजनों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रदेश के हर कोने तक पहुंचकर लोगों से सीधा संवाद किया। 10 जुलाई 2021 से 21 जून 2026 के बीच उन्होंने प्रदेश के सभी 55 जिलों का दौरा किया। इस अवधि में उन्होंने इतने दौरे (करीब 220) किए हैं, जितने डॉ. मोहन यादव मंत्रिमंडल के किसी भी सदस्य ने भी नहीं किए होंगे। अमरकंटक के जंगल हों, अलीराजपुर के आदिवासी गांव, पांढुर्ना और मऊगंज जैसे नए जिले या मालवा, बुंदेलखंड, महाकौशल, बघेलखंड और चंबल का इलाका उन्होंने पूरे मप्र को करीब से देखा और समझा।
पहली बार किसी राज्यपाल के इतने व्यापक दौरे
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि मप्र के इतिहास में शायद पहली बार किसी राज्यपाल ने प्रदेश का इतना व्यापक भ्रमण किया है। देश की बात करें तो किसी और प्रदेश के राज्यपाल ने इतनी सक्रियता नहीं दिखाई। पीपुल्स समाचार की पड़ताल बताती है कि करीब दो दर्जन जिले तो ऐसे हैं, जहां वह 2 से दर्जनभर बार तक गए।
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मैदानी दौरे बन गए पहचान
उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान उनके मैदानी दौरे बन गए हैं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों, आश्रमों, जनजातीय क्षेत्रों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय नागरिकों से लगातार मुलाकात की। लोकभवन की चाहरदीवारी से बाहर निकलकर उन्होंने संदेश दिया कि संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति भी जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं, संस्कृति और अपेक्षाओं को समझ सकता है।
कड़ी निगरानी...आदिवासियों की योजनाओं के लिए बनाया प्रकोष्ठ
मंगुभाई शायद पहले राज्यपाल होंगे, जो मप्र में आदिवासियों के विकास और उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए खुद काम कर रहे हैं। खुद आदिवासी बिरादरी से आने वाले मंगुभाई ने कार्यभार संभालने के बाद से शायद ही कोई आदिवासी इलाका हो, जहां नहीं पहुंचे हों। आदिवासियों के बीच पहुंचकर न केवल उनकी कुशलक्षेम पूछी, बल्कि सरकार की योजनाओं के बारे में फीडबैक भी लिया। उन्होंने राजभवन में जनजातीय प्रकोष्ठ का गठन भी किया है। यह प्रकोष्ठ आदिवासियों से जुड़ी योजनाओं की निगरानी करता है और उनसे सीधा संवाद स्थापित करता है। राज्यपाल आदिवासी समुदाय में होने वाले आनुवांशिक रोग सिकल सेल एनीमिया को लेकर लगातार काम कर रहे हैं।
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जिलों के दौरे के वक्त क्या करते हैं
- केंद्र और प्रदेश सरकार की आदिवासी कल्याण योजनाओं की समीक्षा।
- आदिवासियों के बीच पहुंचकर समस्याएं सुनते हैं और उनके साथ भोजन करते हैं।
- हितग्राहियों को योजनाओं के लाभ का वितरण। आंगनबाड़ियां का दौरा।
- प्राथमिक विद्यालयों, आदिवासी छात्रावासों का दौरा।
- सिकल सेल एनीमिया के बारे में जानकारी और उसके बचाव के तरीके बताते हैं।
- प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्री आवास के लाभार्थियों से बातचीत।
इन जिलों में सबसे ज्यादा दौरे
राज्यपाल ने सबसे अधिक दौरे इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, रायसेन और छतरपुर जिलों के किए। इन जिलों में शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक कार्यक्रमों और प्रशासनिक आयोजनों में उनकी नियमित मौजूदगी रही। केवल पांच ऐसे जिले हैं, जहां वह सिर्फ एक बार गए।












