Google और Meta पर बढ़ा सरकारी दबाव, ICE के समन के खिलाफ टेक कंपनियों का विरोध, यूजर्स की प्राइवेसी पर सवाल

वॉशिंगटन। अमेरिका में बड़ी टेक कंपनियों और ट्रम्प प्रशासन के बीच यूजर्स की निजी जानकारी को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, Google और Meta जैसी प्रमुख टेक कंपनियां संघीय इमिग्रेशन अधिकारियों की ओर से जारी किए जा रहे सम्मनों (Subpoenas) का विरोध कर रही हैं। इन सम्मनों के जरिए ऑनलाइन सरकार की आलोचना करने वाले लोगों की पहचान और उनसे जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिलिकॉन वैली की कंपनियां सरकारी अनुरोधों का जवाब देने में देरी कर रही हैं। साथ ही, वे सरकार की व्यापक डेटा मांगों को कानूनी चुनौती दे रही हैं और अपने यूजर्स को जानकारी दिए जाने से जुड़ी नोटिफिकेशन पॉलिसी का दायरा भी बढ़ा रही हैं।
चुनावों के पहले आई चुनौती
टेक कंपनियों के सामने यह चुनौती ऐसे समय आई है, जब वे आगामी मध्यावधि चुनावों के बाद डेमोक्रेट्स के नेतृत्व में संभावित कांग्रेसनल जांच की तैयारी कर रही हैं। इसके अलावा, कंपनियों को अपने कर्मचारियों की प्राइवेसी संबंधी चिंताओं, यूजर्स के भरोसे और मौजूदा ट्रम्प प्रशासन के साथ अपने कारोबारी एवं सरकारी संबंधों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
अमेरिकी सांसद भी इन कंपनियों से जवाब मांग रहे
अमेरिकी सांसदों का सवाल है कि आखिर किन परिस्थितियों में यूजर्स की संवेदनशील निजी जानकारी संघीय अधिकारियों के साथ साझा की गई। सिनेटर थानेदार, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में टेक कंपनियों के सरकारी अनुरोधों के अनुपालन की जांच शुरू कराने में भूमिका निभाई थी, ने कहा- उन्हें (कंपनियों को) शपथ लेकर यह बताने के लिए तैयार रहना होगा कि उन्होंने जो किया, वह क्यों किया।
ICE की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ी निगरानी
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल से डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के अधीन काम करने वाली इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) एजेंसी कई बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रख रही है। इन प्लेटफॉर्म्स में YouTube, Facebook, Instagram, Reddit, TikTok और X शामिल हैं। ICE इन सोशल मीडिया नेटवर्क्स को ऐसे माध्यमों के रूप में देखती है, जहां उसके अधिकारियों, एजेंटों और इमिग्रेशन प्रवर्तन से जुड़ी गतिविधियों के लिए संभावित खतरे सामने आ सकते हैं। यूजर्स की पहचान और उनके रिकॉर्ड हासिल करने के लिए संघीय अधिकारी प्रशासनिक सम्मनों (Administrative Subpoenas) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
इन समन को अधिकारी सीधे मजूरी दे सकते हैं
इन सम्मनों की खास बात यह है कि इन्हें न्यायिक वारंट या ग्रैंड जूरी सम्मन की तरह पहले अदालत की समीक्षा से नहीं गुजरना पड़ता। प्रशासनिक सम्मन लिखित आदेश होते हैं, जिन्हें ICE के अधिकारी सीधे मंजूरी दे सकते हैं। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के पूर्व अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को सरकारी एजेंसियों की सामान्य कार्यप्रणाली से एक बड़ा बदलाव बताया है।
Google को मिले 28,600 अमेरिकी सरकारी सम्मन
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में सरकारी एजेंसियों की ओर से भेजे जा रहे अनुरोधों की संख्या का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, Google को जनवरी से जून 2025 के बीच अमेरिकी सरकारी एजेंसियों से करीब 28,600 सम्मन मिले। यह संख्या वर्ष के शेष हिस्से में प्राप्त सम्मनों की संख्या के लगभग बराबर थी। वहीं, Meta ने बताया कि जुलाई से दिसंबर के बीच उसे अमेरिकी सरकार की ओर से मिले कुल डेटा अनुरोधों में से 88.8% मामलों में उसने कम से कम कुछ जानकारी उपलब्ध कराई थी। टेक कंपनियों के विरोध के बीच अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने हाल के हफ्तों में न्याय विभाग के साथ मिलकर ग्रैंड जूरी सम्मन जारी करने शुरू किए हैं। इन कानूनी आदेशों में अनुपालन नहीं करने की स्थिति में अधिक कड़े कानूनी दंड का प्रावधान है।
कानूनी कार्रवाई और सरकारी दबाव के बीच फंसी Google और Meta
सरकारी डेटा मांगों को लेकर Google और Meta के वरिष्ठ अधिकारी अपनी कंपनियों के लिए पैदा हो रहे कानूनी और राजनीतिक जोखिमों पर निजी तौर पर चिंता जता रहे हैं। Meta के शीर्ष अधिकारी इस बात का आकलन कर रहे हैं कि भविष्य में अगर अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का समीकरण बदलता है और डेमोक्रेट्स का प्रभाव बढ़ता है, तो कंपनी को किस तरह की संसदीय जांच और निगरानी का सामना करना पड़ सकता है।




















