गूगल क्लाउड की Vision AI से मैन्युफैक्चरिंग में क्रांति, प्रोडक्शन दोषों की रियल टाइम पहचान से 30% तक घटेगी लागत, भारत के SMBs के लिए बढ़ाई AI सेवाएं

मुंबई। गूगल क्लाउड की विजन एआई तकनीक निर्माताओं को उत्पादन दोषों की रियल टाइम में पहचान करने और डाउनटाइम तथा ऑपरेशनल खर्च को 30 प्रतिशत तक कम करने में मदद कर सकती है। कंपनी भारत के छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMB) के लिए अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेवाओं को लगातार बढ़ा रही है। यह पहल गूगल क्लाउड के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनके तहत छोटे कारोबारों को अपनी कार्यक्षमता में सुधार करने, संचालन को स्वचालित बनाने और ऐसे AI टूल्स को अपनाने में मदद की जा रही है, जो पहले मुख्य तौर पर बड़े संगठनों के लिए ही उपलब्ध थे। गूगल क्लाउड के जापान पैसिफिक SMB और स्केल्ड सर्विसेज के प्रबंध निदेशक, तारू दहिया ने एएनआई को दिए एक ईमेल इंटरव्यू में बताया, स्पेशली डिजाइन किया गया AI ऑपरेशनल बाधाओं को भी दूर करता है। विजन AI मैन्युफैक्चरर्स को प्रोडक्शन डिफेक्ट्स का रियल टाइम डिटेक्शन करने में मदद करता है, जिससे डाउनटाइम और ऑपरेशनल कॉस्ट में 30 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। वहीं जेमिनी एजेंट लॉजिस्टिक्स टीमों के लिए ई-वे बिल और इनवॉइस का मिलान करते हैं।
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बड़े संगठनों वाली क्षमता छोटे व्यवसायों को मिल सकती है
दहिया ने कहा कि AI छोटे व्यवसायों के लिए एक इकोनॉमिक इक्वलाइजर के रूप में उभर रहा है, क्योंकि यह छोटी टीमों को बड़े संगठनों को मिलने वाली स्पीड, इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी तक पहुंच प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा कि कारोबार अब धीरे-धीरे बेसिक AI टूल्स से आगे बढ़कर ऐसे AI एजेंटों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। यह एजेंट वर्कफ्लो को कनेक्ट करने, बिजनेस डेटा तक पहुंचने और जटिल कार्यों को पूरा करने में सक्षम हैं।
कई तरह के ऑफीशियल काम कर सकता है
तारू दहिया ने कहा कि एआई विनिर्माण इकाइयों, खुदरा दुकानों और बैक ऑफिसों में ऑपरेशन संबंधी चुनौतियों को कम करने में मदद कर रहा है। इससे कर्मचारियों को नवाचार, ग्राहक संबंधों और व्यावसायिक विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिल रहा है। एआई को अपनाने में प्रमुख चुनौतियों की पहचान करते हुए दहिया ने फ्रेग्मेंटेड डेटा ( खंडित डेटा), पुरानी प्रणालियों और प्रौद्योगिकी की लागत और जटिलता की ओर इशारा किया। व्यावसायिक जानकारी अक्सर स्प्रेडशीट, अकाउंट सॉफ्टवेयर, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सिस्टम और बिलिंग प्लेटफॉर्म पर फैली होती है।
पायलट प्रोजेक्ट बदलेंगे रीयल में
इसके कारण कंपनियों के लिए पायलट परियोजनाओं से आगे एआई का विस्तार करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा- इन चुनौतियों का समाधान एक चरणबद्ध एआई रणनीति अपनाकर किया जा सकता है जो पूरे संगठन में यूनिफाइड इंटेलिजेंस (एकीकृत बुद्धिमत्ता) लाती है। इसके साथ ही खरीद और कई एआई उपकरणों के अतिरिक्त खर्च को कम करती है। उन्होंने कहा कि तकनीक आज तैयार है और प्राथमिकता व्यवसायों को पायलट प्रोजेक्ट्स से असल उत्पादन की ओर ले जाने में मदद करना है।
कई कामों को इंटीग्रेट कर मदद करता है
गूगल क्लाउड भी जेमिनी को अपने कार्यस्थल प्रयोगों (जिनमें जीमेल, डॉक्स, शीट्स, ड्राइव और मीट शामिल हैं) में एकीकृत कर रहा है। ये उपकरण कर्मचारियों को प्रस्ताव तैयार करने, ग्राहक चर्चा का सारांश बनाने और तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता के बिना भारतीय भाषाओं में नो-कोड एआई एजेंट बनाने में मदद कर सकते हैं। दहिया ने वास्तविक समय की जानकारी प्राप्त करने और व्यावसायिक निर्णयों में सुधार करने के लिए एंटरप्राइज सिस्टम, स्प्रेडशीट, ईमेल और दस्तावेजों से जानकारी को एक साथ लाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।




















