एन. चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन पर टाटा में टकराव, नोएल टाटा बोले- फैसला गैरकानूनी

नई दिल्ली। टाटा सन्स के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को कंपनी के चेयरमैन पद पर अगले पांच साल के लिए बनाए रखने को मंजूरी दे दी है। 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के पक्ष में 4 और विरोध में 1 वोट पड़ा। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया। नोएल टाटा ने मीडिया से बातचीत में बोर्ड के फैसले को ‘गैरकानूनी’ बताया और कहा कि उन्होंने चंद्रशेखरन की नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया था, लेकिन कानूनी राय के आधार पर उनके विरोध को दरकिनार कर दिया गया। टाटा ट्रस्ट्स ने भी बाद में इस फैसले को ‘कानूनी रूप से अमान्य’ बताया है।
अगस्त में चंद्रशेखरन ने नहीं मांगा था तीसरा कार्यकाल
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त में चंद्रशेखरन ने खुद कहा था कि वह फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। इसके बाद टाटा समूह में नए चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब 17 सितंबर के बोर्ड फैसले से स्थिति बदल गई है। टाटा सन्स की ओर से जारी बयान में भी चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए चेयरमैन बनाए रखने की जानकारी दी गई है।
विवाद की जड़ टाटा सन्स के Articles of Association में
पूरे विवाद का एक अहम हिस्सा टाटा सन्स के Articles of Association से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नियुक्त निदेशकों के बहुमत की भूमिका कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में बताई गई है। बोर्ड बैठक में वोट बराबर होने की स्थिति में चेयरमैन के पास निर्णायक वोट होने की कानूनी राय के आधार पर फैसला आगे बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, नोएल टाटा ने इस प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया है। टाटा सन्स के बोर्ड में एन. चंद्रशेखरन, नोएल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, सौरभ अग्रवाल, हरीश मनवानी और अनिता मारंगोली जॉर्ज शामिल हैं।
अब AGM में क्या होगा?
बोर्ड का फैसला अंतिम रूप से महत्वपूर्ण होने के बावजूद आगे की प्रक्रिया में टाटा सन्स की अगली Annual General Meeting (AGM) अहम होगी। कंपनी को यह स्थगित AGM 31 दिसंबर 2026 तक आयोजित करनी है। चंद्रशेखरन का निदेशक के तौर पर रोटेशन से रिटायरमेंट और दोबारा नियुक्ति भी बैठक का महत्वपूर्ण मुद्दा है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा सन्स में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। इसलिए शेयरधारकों के स्तर पर होने वाले फैसले में ट्रस्ट्स की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
पहले ही स्थगित हो चुकी है AGM
टाटा सन्स की 18 अगस्त को होने वाली AGM को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण स्थगित करना पड़ा था। इसके पीछे सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़ी कानूनी स्थिति और दोनों प्रमुख ट्रस्टों के संयुक्त प्रतिनिधि तय नहीं हो पाने की बात सामने आई थी। अब AGM की नई तारीख और उसमें होने वाले फैसलों पर नजर रहेगी।
लिस्टिंग का मुद्दा भी अहम
चंद्रशेखरन के कार्यकाल से जुड़े फैसले के साथ टाटा सन्स के सामने शेयर बाजार में लिस्टिंग का मुद्दा भी है। RBI ने टाटा सन्स की Core Investment Company का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी है। इसके बाद कंपनी के लिए लिस्टिंग से जुड़े नियामकीय सवाल फिर महत्वपूर्ण हो गए हैं। 17 सितंबर की बैठक में लिस्टिंग के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। हालांकि, इस पर बोर्ड में अलग से कोई प्रस्ताव पारित हुआ या नहीं, इस बारे में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। मनीकंट्रोल के मुताबिक बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन कोई प्रस्ताव टेबल नहीं किया गया।
2017 से टाटा सन्स की कमान संभाल रहे हैं चंद्रशेखरन
एन. चंद्रशेखरन 2017 से टाटा सन्स के चेयरमैन हैं। उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने एयर इंडिया के अधिग्रहण के साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एविएशन और अन्य नए क्षेत्रों में विस्तार किया है। अब बोर्ड के ताजा फैसले से उनका कार्यकाल आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है, लेकिन नोएल टाटा और टाटा ट्रस्ट्स के विरोध के चलते इस मामले में अगली अहम नजर AGM और शेयरधारकों के फैसले पर रहेगी।




















