टाटा सन्स में आखिर चल क्या रहा है? चेयरमैन की कुर्सी पर फिर बढ़ी खींचतान

मुंबई। चंद्रशेखरन के चेयरमैन के पद पर अपॉइंटमेंट को लेकर चल रही खींचता ने टाटा में चल रही अंदरूनी कलह को फिर सामने ला दिया है। वैसे यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है। इससे पहले भारत सरकार को टाटा ट्रस्ट के मामले में दखल देना पड़ा था। 7 अक्टूबर 2025 को लीडरशिप से जुड़े एक गंभीर संकट के दौरान भारत सरकार ने टाटा ट्रस्ट्स के बोर्डरूम विवाद में दखल दिया था। टाटा ट्रस्ट्स और उससे जुड़े ट्रस्ट मिलकर टाटा संस का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा कंट्रोल करते हैं। टाटा संस का वेल्यूएशन करीब 20 लाख करोड़ रुपए है।
गुरुवार (17 सितंबर 2026) को हुए घटनाक्रम में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने गुरुवार को चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट किया, लेकिन बोर्ड के बहुमत से प्रस्ताव पास हो गया। हालांकि ट्रस्ट्स ने बाद में कहा कि बोर्ड का प्रस्ताव कानूनी रूप से मान्य नहीं था। गौरतलब है कि पहले भी ऐसी अटकलें थीं कि ट्रस्ट्स बोर्ड के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।
टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर है विवाद
माना जा रहा है कि यह विवाद टाटा संस की शेयर मार्केट की लिस्टिंग को लेकर है। नोएल टाटा इस साल फरवरी से अब तक लिस्टिंग के विरोध में हैं। यहां तक कि जब चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने की बात आई थी तो उन्होंने समर्थन की शर्तों में टाटा संस को अनलिस्टेड रखना भी शामिल किया था। वहीं, टाटा संस में सबसे ज्यादा 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी शापूरजी पल्लोजी ग्रुप लिस्टिंग के समर्थन में है।
यह भी सामने आया है कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन को लिस्टिंग के खिलाफ वोट करने के लिए दबाव डाला गया था। लेकिन श्रीनिवासन ने अपनी स्वतंत्र जिम्मेदारी का हवाला देते हुए इनकार (डायरेक्टर और जॉइंट नॉमिनी के तौर पर) कर दिया।
कंपनी खोज रही है चंद्रशेखरन का सक्सेसर, क्या अटकेगी प्रक्रिया?
चंद्रशेखरन ने अपने वर्तमान कार्यकाल के बाद पद छोड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था क टाटा संस उत्तराधिकारी चुन ले। इसके बाद सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें टाटा स्टील के चीफ एग्जीक्यूटिव टीवी नरेंद्रन, टाटा संस ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर सौरभ अग्रवाल और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के चीफ एग्जीक्यूटिव आशीष चौहान के नाम सामने आए थे। गुरुवार को चंद्रशेखरन को लेकर की गई पहली घोषणा के बाद यह प्रक्रिया रुक सकती थी लेकिन बाद में टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि सिलेक्शन कमेटी 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के अनुसार आगे बढ़ेगी।
2017 से टाटा संस की कमान चंद्रशेखरन के हाथ में
टाटा ट्रस्ट की कमान साल 2017 से चंद्रशेखरन के हाथ में है। 2022 में उन्हें सर्वसम्मति से दूसरे कार्यकाल (5 साल के लिए) के लिए नियुक्त किया गया था। साल 2025 में भी टाटा ट्रस्ट्स ने 2025 में उन्हें तीसरा कार्यकाल दिया था, लेकिन फरवरी 2026 में यह प्रस्ताव अटक गया। उस समय नोएल टाटा ने एयर इंडिया और टाटा डिजिटल में नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने चंद्रशेखरन का टर्म बढ़ाने के लिए शर्तें रखीं, जिनमें टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट न करना शामिल था।
अगर टाटा संस की लिस्टिंग पर सहमति बनती है तो यह भारतीय इतिहास के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है। इसकी 1 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री का 15,000-20,000 करोड़ रुपए की हो सकती है। इससे टाटा संस का वैल्युएशन लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के हो सकता है।




















