फ्रांस के स्कूलों पर बवाल! ट्रंप ने प्रदर्शन को बताया ‘इस्लाम के कब्जे’ से जुड़ा मामला

फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत, शिक्षकों की कमी और जरूरी सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का आंदोलन तेज हो गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आंदोलन को शिक्षा से अलग बताते हुए इसे अनियंत्रित प्रवासन और इस्लाम से जोड़ दिया, जिससे उनका बयान विवादों में आ गया।
 फ्रांस के स्कूलों पर बवाल! ट्रंप ने प्रदर्शन को बताया ‘इस्लाम के कब्जे’ से जुड़ा मामला
फ्रांस के प्रदर्शन पर ट्रंप की टिप्पणी

वॉशिंगटन। फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा विरोध अब देशव्यापी मुद्दा बन चुका है। छात्र, शिक्षक और अभिभावक लंबे समय से स्कूलों में कम संसाधन, भीड़भरी कक्षाओं, शिक्षकों की कमी और खराब इमारतों की शिकायत कर रहे हैं। मंगलवार को देश के कई शहरों में बड़े प्रदर्शन हुए। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर अपनी अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि वहां का संकट केवल स्कूलों की समस्या नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जुड़ा मामला है। ट्रंप की टिप्पणी के बाद फ्रांस में राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

स्कूलों की हालत ने बढ़ाया गुस्सा

फ्रांस में छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि कई स्कूलों में पढ़ाई के लिए जरूरी माहौल तक ठीक नहीं है। कुछ जगहों पर इमारतें जर्जर हैं, कमरों में जरूरत से ज्यादा बच्चे हैं और शिक्षकों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। रखरखाव की कमी के कारण कई स्कूलों में पानी टपकने जैसी दिक्कतें सामने आई हैं। कुछ इलाकों में चूहों के संक्रमण की शिकायत ने भी प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं।

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सितंबर से शुरू हुआ आंदोलन

यह विरोध सितंबर के आखिर में पेरिस के आसपास के कम आय वाले इलाकों से शुरू हुआ था। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर चल रहा आंदोलन धीरे-धीरे दूसरे शहरों तक पहुंच गया। छात्रों के साथ शिक्षक संगठन और अभिभावक भी इसमें शामिल होते गए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में ज्यादा पैसा लगाए और स्कूलों की बुनियादी समस्याओं को जल्द दूर करे।

मंगलवार को सड़कों पर उमड़ी भीड़

मंगलवार को पूरे फ्रांस में प्रदर्शन का असर दिखाई दिया। अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में लोग मार्च में शामिल हुए। मार्सेई और नांत में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नारे लगाए गए, जबकि टूलूज में अभिभावकों ने भी प्रदर्शनकारियों का साथ दिया। कई जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन कुछ शहरों में हालात बिगड़ गए और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव देखने को मिला।

कुछ शहरों में पुलिस से टकराव

स्ट्रासबर्ग, लियोन और रेनेस समेत कुछ इलाकों में प्रदर्शन के दौरान आगजनी और पुलिस पर वस्तुएं फेंके जाने की घटनाएं सामने आईं। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। लेंस में एक 15 वर्षीय छात्र के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने भी विवाद बढ़ा दिया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, छात्र एक पुलिस स्टन ग्रेनेड के संपर्क में आने के बाद घायल हुआ। मामले की जांच जारी है।

स्कूल बंद होने के आंकड़ों पर विवाद

आंदोलन का असर कितने स्कूलों पर पड़ा, इसको लेकर सरकार और यूनियनों के आंकड़े अलग हैं। एक शिक्षक संगठन ने करीब 2,000 हाई स्कूलों के प्रभावित होने का दावा किया है। वहीं शिक्षा मंत्रालय के अनुसार 891 स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह या कुछ हिस्सों में प्रभावित हुई। छात्र संगठनों का दावा इससे भी बड़ा है और उनका कहना है कि देश के आधे से अधिक हाई स्कूल किसी न किसी रूप में आंदोलन से प्रभावित रहे।

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ट्रंप ने दिया बिल्कुल अलग बयान

इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर फ्रांस के आंदोलन को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वहां की स्थिति का संबंध स्कूलों से ज्यादा बड़े पैमाने पर अनियंत्रित प्रवासन से है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे इस्लाम की फ्रांस पर कब्जे की कोशिश है। उनके इस बयान ने फ्रांस में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...Read More

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