बर्लिन। जर्मनी ने दुनिया का सबसे ऊंची पवन टरबाइन तैयार की है। इसकी ऊंचाई लगभग 1,200 फीट तक पहुंच गई है। चालू होने के बाद यह टरबाइन वह डेटा उपलब्ध कराएगी जिसकी जरूरत यह तय करने के लिए है कि क्या ज्यादा ऊंचाई से ऊर्जा उत्पादन में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी मिलती है। पूर्वी जर्मनी में बन रही करीब 1,200 फीट ऊंचा पवन टरबाइन अपनी पूरी ऊंचाई तक पहुंच चुकी है। इससे उन ऊंचाइयों पर पवन ऊर्जा का इस्तेमाल करने का एक नया तरीका सामने आया है जहां हवाएं ज्यादा तेज और स्थिर होती हैं
एक्सपेरिमेंटल है टरबाइन, कलेक्ट करेगी डेटा
शिपकाऊ में लगी यह पायलट टरबाइन टेस्ट करने के लिए बनाई गई है। इसे जर्मन इंजीनियरिंग कंपनी GICON द्वारा फेडरल एजेंसी फॉर डिसरप्टिव इनोवेशन (SPRIND) के लिए डेवलप किया है। इससे यह देखा जाएगा कि क्या बहुत ज्यादा ऊंचाई बढ़ाने से समान पवन इंफ्रास्ट्रक्चर से काफी अधिक बिजली पैदा की जा सकती है।
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जर्मनी की दूसरी सबसे ऊंची संचरना
ब्लेड समेत इसकी ऊंचाई 1,197 फीट है, जो इसे बर्लिन के टीवी टावर के बाद जर्मनी की दूसरी सबसे ऊंची संरचना बनाती है। GICON का कहना है कि यह डिजाइन समान रोटर व्यास वाले एक पारंपरिक टरबाइन की तुलना में लगभग दोगुनी बिजली बना सकती है। हालांकि इस अनुमान को अभी ऑपरेशन में साबित करना बाकी है। ज्यादा ऊंचाई तक पहुंचने के लिए बना पवन टरबाइन GICON के डिजाइन के पीछे मुख्य आइडिया यह है कि इसे वहां लगाया जाए जहां हवा बेहतर हो। हवा की स्पीड आमतौर पर ऊंचाई के साथ बढ़ती है। वहीं, ज्यादा ऊंचाई पर हवा की स्थिति ज्यादा स्थिर भी हो सकती है। इसलिए, जमीन से सैकड़ों मीटर ऊपर ऑपरेट होने वाली टरबाइन को एक पारंपरिक टरबाइन की तुलना में एक बड़े और संभावित रूप से ज्यादा भरोसेमंद एनर्जी सोर्स तक पहुंच मिलती है।
दोगुनी बिजली बना सकती है टरबाइन
शिपकाऊ पायलट प्रोजेक्ट की रेटेड क्षमता 3.8 मेगावाट है, जबकि भविष्य के वर्जन से 7 मेगावाट से ज्यादा की उम्मीद है। कंपनी द्वारा अनुमानित एनर्जी प्रोडक्शन में दोगुनी बढ़ोतरी समय के साथ पैदा होने वाली बिजली को दर्शाती है, न कि टरबाइन की अधिकतम रेटेड पावर को। हालांकि, इतनी ऊंचाई तक पहुंचने के लिए GICON को यह दोबारा सोचना पड़ा कि ऐसी टरबाइन का निर्माण कैसे किया जाए। टावर के टॉप तक पहुंचने में सक्षम पारंपरिक क्रेन का इस्तेमाल करने के बजाय, कंपनी ने एक टेलीस्कोपिंग टावर डिजाइन अपनाया। एक खास लिफ्टिंग मैकेनिज्म ने भीतरी टावर को आसपास की जालीदार संरचना के जरिए ऊपर उठाया और फिर उसे उसकी फाइनल हाइट पर सिक्योर कर दिया। GICON के फाउंडर और CEO जोचेन ग्रॉसमैन ने 1,197 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने को प्रोजेक्ट के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। यह एक कॉन्सेप्ट के तौर पर शुरू हुआ था और बाद में एक फुल-स्केल पायलट फैसिलिटी बन गया।
नए पवन ऊर्जा संयंत्रों के बिना उत्पादन बढ़ाने की कोशिश
एक दिलचस्प संभावना यह है कि नई जगहों की जरूरत के बजाय मौजूदा पवन ऊर्जा फार्मों में ही हाई-एल्टीट्यूड टर्बाइन जोड़े जा सकते हैं। GICON और SPRIND इन सिस्टम्स को पवन ऊर्जा प्रोडक्शन के दूसरे लेवल के रूप में ऑपरेट करने की कल्पना करते हैं। इनमें ऊंची टर्बाइन पारंपरिक पवन टरबाइनों के ऊपर स्थित होंगी। इस तरह, उनके रोटर ज्यादा ऊंचाई पर ऑपरेट होंगे जबकि मौजूदा टर्बाइन नीचे बिजली का उत्पादन जारी रखेंगे।
यह कहते हैं मौजूदा आंकलन
मौजूदा आकलन के अनुसार जर्मनी मौजूदा पवन ऊर्जा फार्मों में संभावित रूप से 4,000 हाई-एल्टीट्यूड टर्बाइन इंस्टॉल कर सकता है। यदि यह कॉन्सेप्ट उम्मीद के मुताबिक काम करता है, तो इससे नए क्षेत्रों में पवन फार्मों का विस्तार किए बिना अतिरिक्त बिजली उत्पादन संभव हो सकेगा। साथ ही मौजूदा ग्रिड कनेक्शन और डेवलप्ड पवन ऊर्जा साइट्स का बेहतर इस्तेमाल भी हो सकेगा। हालांकि स्ट्रक्चर का पूरा होना एक अहम उपलब्धि है, लेकिन इससे भी बड़ी परीक्षा अभी बाकी है। क्योंकि बाकी कंस्ट्रक्शन वर्क पूरा होने के बाद नवंबर में इसे ऑफिशियली कमीशन करने की योजना है। एक बार चालू होने के बाद, टरबाइन वह डेटा देगी जिसकी जरूरत यह तय करने के लिए होगी कि क्या अतिरिक्त ऊंचाई से एनर्जी प्रोडक्शन में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी होती है। क्या, फायदे अतिरिक्त इंजीनियरिंग कॉम्प्लेक्सिटी को जस्टिफाई करते हैं।