हूतियों ने सऊदी अरब को दी चुनौती, एयरपोर्ट और सैन्य ठिकाने पर हमले का दावा

यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का नया दौर शुरू करने का दावा किया। हूतियों के मुताबिक, इन हमलों में सऊदी अरब के एयरपोर्ट, अरामको रिफाइनरी और एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया। हूतियों का यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सरकारी सेना ने लाल सागर के तट पर उनके खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। इससे यमन का संघर्ष अब सऊदी अरब की सीमा तक पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
हूतियों ने इन जगहों को निशाना बनाने का किया दावा
हूतियों के मुताबिक, उनके तीन अलग-अलग ऑपरेशनों में रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, राबिघ की अरामको रिफाइनरी, आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और खमीस मुशैत के एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन हमलों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। सऊदी अरब की ओर से भी इन खास हमलों को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई।
यमन में बढ़ा सैन्य दबाव
यह तनाव उस समय बढ़ा है जब सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों ने पश्चिमी यमन में हूतियों के खिलाफ अभियान तेज किया है। सेना ने लाल सागर के तट पर कुछ इलाकों में बढ़त बनाने का दावा किया है। इनमें बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास के रणनीतिक इलाके भी शामिल हैं। इसके बाद हूतियों पर सैन्य दबाव बढ़ा है और उन्होंने सऊदी अरब को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
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मोचा की ओर बढ़ रही यमनी सेना
यमनी सरकारी बलों ने जलडमरूमध्य के आसपास कुछ इलाकों पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने के बाद मोचा की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है। मोचा लाल सागर के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह क्षेत्र है। सऊदी अरब की हवाई ताकत से मिल रहे समर्थन के बीच सरकारी बलों की यह कार्रवाई हूतियों के लिए चुनौती बढ़ा रही है। जवाब में हूतियों की ओर से सऊदी इलाके को निशाना बनाने के दावे सामने आए हैं।
सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की के बीच बढ़ा सहयोग
बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच सैन्य सहयोग भी चर्चा में है। सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, रियाद में हुई एक आपात बैठक में तीनों देशों ने सऊदी अरब में तय सैन्य बलों और क्षमताओं की तेजी से तैनाती के लिए जरूरी कदम उठाने पर सहमति जताई। इस घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। अगर हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है, तो इसका असर यमन के साथ-साथ लाल सागर क्षेत्र की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।




















