PU Special :UPSC में युवाओं का घटा रुझान, चार साल में 4.81 लाख कम हुए आवेदन; पदों की संख्या में भी आई कमी

रामचन्द्र पाण्डेय, भोपाल। 2023 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा के लिए करीब 13 लाख आवेदन आए थे, जो 2026 में घटकर 8.19 लाख रह गए। विशेषज्ञों के मुताबिक, आवेदन घटने के पीछे सिर्फ पदों की कमी नहीं, बल्कि युवाओं की बदलती करियर सोच भी एक बड़ी वजह है। यूपीएससी की लंबी तैयारी, चयन की अनिश्चितता और सीमित पदों के मुकाबले निजी क्षेत्र में बेहतर पैकेज और तेजी से करियर ग्रोथ युवाओं को आकर्षित कर रही है। कई विद्यार्थी दो-तीन प्रयास के बाद निजी कंपनियों, कॉरपोरेट और अन्य प्रोफेशनल क्षेत्रों में करियर बनाने का विकल्प चुन रहे हैं।
चार साल में 4.81 लाख घट गए आवेदन
UPSC सिविल सेवा परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले युवाओं की संख्या में पिछले चार साल में लगातार कमी आई है। साल 2023 में करीब 13 लाख आवेदन आए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 9.92 लाख, 2025 में 9.37 लाख और 2026 में घटकर 8.19 लाख रह गई। यानी 2023 से 2026 के बीच करीब 4.81 लाख आवेदन कम हुए हैं।
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पदों की संख्या में भी आई कमी
आवेदनों के साथ ही सिविल सेवा में उपलब्ध पदों की संख्या में भी कमी देखने को मिली है। 2023 में 1105 पद थे, जो 2024 में घटकर 1056, 2025 में 979 और 2026 में 933 रह गए। विशेषज्ञों का कहना है कि पदों में कमी आवेदन घटने का एक कारण हो सकती है, लेकिन युवाओं की बदलती करियर प्राथमिकताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
निजी क्षेत्र में बेहतर पैकेज और तेज ग्रोथ
यूपीएससी की तैयारी में कई साल लगने, चयन की अनिश्चितता और सीमित पदों के मुकाबले निजी क्षेत्र में बेहतर पैकेज युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। शुरुआती स्तर पर ही अच्छा वेतन मिलने से युवा आर्थिक रूप से जल्दी आत्मनिर्भर होना चाहते हैं। इसके साथ ही निजी कंपनियों में प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन और वेतन में तेजी से बढ़ोतरी की संभावना भी करियर के लिए युवाओं को आकर्षित कर रही है।
कोर्सों की विविधता और अंग्रेजी भी वजह
प्रतिज्ञा आईएएस अकादमी के संचालक डॉ. अनिल उपाध्याय के मुताबिक, यूपीएससी में युवाओं की रुचि पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन करियर को लेकर उनकी प्राथमिकताएं जरूर बदली हैं। उनके अनुसार पदों की संख्या में कमी, परीक्षा की लंबी तैयारी, चयन की अनिश्चितता और निजी क्षेत्र समेत अन्य करियर विकल्प युवाओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में वन नेशन, वन इलेक्शन और हिंदी को महत्व देने की बात कही जा रही है, लेकिन देशभर के स्कूलों में चल रहे अलग-अलग कोर्सों को एकरूप नहीं किया गया है, वहीं यूपीएससी में अंग्रेजी को प्राथमिकता दिए जाने से भी आवेदकों की संख्या प्रभावित हो रही है।
दो-तीन प्रयास के बाद बदल रहे करियर की राह
कई विद्यार्थी यूपीएससी में दो-तीन प्रयास के बाद वैकल्पिक करियर की ओर बढ़ रहे हैं। अभ्यर्थी आदित्य शर्मा ने बताया कि उन्होंने यूपीएससी के तीन प्रयास किए, लेकिन चयन नहीं हुआ और तैयारी में काफी समय लगा, इसके बाद उन्होंने प्राइवेट कंपनी में नौकरी शुरू की, जहां अच्छा पैकेज और करियर ग्रोथ दोनों मिल रहे हैं।
अभ्यर्थी नेहा वर्मा दो बार दिया एग्जाम
अभ्यर्थी नेहा वर्मा ने बताया कि उन्होंने दो बार यूपीएससी में प्रयास किया, लेकिन लगातार तैयारी के बावजूद सफलता नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में अवसर तलाशा और नौकरी मिलने के बाद लगा कि कम समय में करियर आगे बढ़ सकता है।
UPSC से रुझान कम होने के प्रमुख कारण
प्राइवेट सेक्टर में बेहतर पैकेज, कम समय में करियर की शुरुआत, प्रतियोगिता और चयन की अनिश्चितता, तेज प्रमोशन और करियर ग्रोथ तथा आईटी, मैनेजमेंट, फाइनेंस, डेटा, स्टार्टअप और अन्य प्रोफेशनल क्षेत्रों में बढ़ते करियर विकल्प।



















