MP News :पिता कहते थे मेरी तरह बिजनेसमैन बनेगा बेटा, दबाव में करीब 9 साल के बच्चे ने छोड़ा घर

माता पिता बच्चों को अपने मन के मुताबिक नौकरी या व्यवसाय करना चाहते हैं इसमें बच्चों की खुद की इच्छा मर जाती है। ऐसा ही हुआ एक बच्चे के साथ। उसके पिता उसे बिजनेसमैन बनाना चाहते थे। ऐसी स्थिति में उसने घर छोड़ दिया। उसे भोपाल में ट्रेन में सामान बेचते हुआ रेस्क्यू किया गया। वह डेढ़ साल बाद अपने घर नोएडा पहुंच सका।
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पिता कहते थे मेरी तरह बिजनेसमैन बनेगा बेटा, दबाव में करीब 9 साल के बच्चे ने छोड़ा घर

पल्लवी वाघेला, भोपाल। पिता के सपनों का बोझ नन्हीं सी जान पर इस कदर भारी पड़ा कि उसने छोटी सी उम्र में घर छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठा लिया। यही नहीं सुख-सुविधाओं के बीच पला बच्चा करीब डेढ़ साल तक सड़कों की खाक छानता रहा, लेकिन किस्मत से उसे ट्रेन पर सामान बेचते हुए रेस्क्यू किया गया। जब परिवार ने डेढ़ साल बाद अपने बच्चे को सामने देखा तो न केवल मां बल्कि पिता की आंखें भी आंसुओं से भीग गई। वहीं 11 साल का बच्चा भी बिलखकर रो पड़ा। मां केवल यही कहती रही कि अब बच्चे को अपने से दूर नहीं होने देगी।

चार माह पहले आया भोपाल 

बच्चा करीब चार माह पहले भोपाल आया। वह यूपी की ट्रेन में सामान बेचता हुआ दो-तीन बार भोपाल आया था तो चार माह पहले यहीं रुक गया। तब से वह स्टेशन पर कुछ काम करता या फिर ट्रेन में सामान बेचता या सफाई करता। इस तरह गुजर-बसर हो रही थी। बच्चे ने बताया कि अपने घर नोएडा से निकलने के बाद वह यूपी में ही काम करता रहा। फिर ट्रेन में चढ़कर सामान बेचने की शुरुआत की तो उसे मजा आने लगा। तब से यही काम करता आ रहा था।

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डर के मारे नहीं लौटा 

बच्चे ने काउंसलिंग में बताया था कि उसके पिता नोएडा में बिजनेसमैन हैं। वह हमेशा कहते थे कि बेटा उनसे भी बड़ा बिजनेसमैन बनेगा। बच्चे ने कहा कि उसे दुकान और बिजनेस में कोई रुचि नहीं है। उसे सिंगिंग का शौक है। वह ट्रेन में भी गाता था। एक दिन वह बहन से कह रहा था कि वह बिजनेस नहीं करेगा म्यूजिशियन बनेगा तो पापा ने सुन लिया और खूब डांटा। उसी दिन उसने घर छोड़ने का मन बना लिया और मौका देखकर निकल आया। हालांकि, घर से निकलने के बाद समझ आ गया था कि उसने गलती की।

मन करता था घर लौट जाए, लेकिन...

उसने कहा कि डर भी लगता था, लेकिन धीरे-धीरे उसे इस माहौल में रहना भी आ गया। हालांकि, मन करता था कि घर लौट जाए। बच्चे ने कहा कि उस वक्त तो उसे घर के नंबर भी याद थे लेकिन डर लगा कि घर लौटने पर डांट पड़ेगी इसलिए उसकी हिम्मत नहीं हुई और उसने कभी घर पर कॉल नहीं किया। मामले में बच्चे के माता-पिता ने बताया कि वह लगातार बच्चे को खोज रहे थे, लेकिन उसके भोपाल तक पहुंचने की संभावना नहीं थी। उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी लौट आई है।

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भावनात्मक तनाव का उदाहरण 

इस आयु में बच्चे अपनी पहचान, रुचियों और भावनाओं को विकसित कर रहे होते हैं। यदि उन पर उम्र से अधिक अपेक्षा या भविष्य को लेकर दबाव डाला जाता है, तो वह स्वयं को असुरक्षित, तनावग्रस्त या अनसुना महसूस कर सकते हैं। घर से भागना केवल जिद या अवज्ञा नहीं माना जाना चाहिए। यह अक्सर बच्चे के भीतर चल रहे भावनात्मक तनाव, दबाव या सुने जाने की आवश्यकता का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में सहानुभूति और संवाद सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

दिव्या दुबे मिश्रा, काउंसलर

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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