नकली प्लास्टर कांड: डॉक्टर ने कहा- कोई प्लास्टर नहीं लगाया, जांच में कई पुलिसकर्मी घेरे में

इंदौर। हीरानगर थाना क्षेत्र में सामने आए चर्चित नकली प्लास्टर कांड की जांच तेज हो गई है। वायरल वीडियो के बाद शुरू हुई विभागीय जांच में अब तक थाना प्रभारी (टीआई), एसीपी और संबंधित डॉक्टर के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में सबसे अहम तथ्य डॉक्टर के बयान के रूप में सामने आया है। सूत्रों के अनुसार डॉक्टर ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उन्होंने दोनों आरोपियों के हाथ-पैर में किसी प्रकार का प्लास्टर नहीं लगाया था। इस बयान के बाद पुलिस की कार्रवाई और वायरल वीडियो को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
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जानकारी के अनुसार मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी मयंक और शोभित का हाथ-पैर पर पट्टियां और कथित प्लास्टर बांधकर पुलिस ने सार्वजनिक जुलूस निकाला था। बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दोनों आरोपी जेल परिसर पहुंचने से पहले अपने हाथ-पैर की पट्टियां उतारकर झाड़ियों में फेंकते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद पूरे घटनाक्रम की जांच एडीसीपी ओमप्रकाश को सौंपी गई है।
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सूत्रों के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केवल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब आरोपियों पर गंभीर अपराध दर्ज नहीं था और उन्हें कोई गंभीर चोट भी नहीं थी, तो फिर उनके हाथ-पैर पर प्लास्टर जैसी पट्टियां बांधकर सार्वजनिक जुलूस निकालने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
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जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दोनों आरोपियों को ऐसी कोई चोट नहीं थी, जिसके लिए प्लास्टर की जरूरत हो। डॉक्टर के बयान के बाद इस पहलू को और बल मिला है। हालांकि, जांच पूरी होने तक पुलिस अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। पुलिस महकमे में यह चर्चा भी है कि शहर के कुछ थानों में आरोपियों के हाथ-पैर पर प्लास्टर जैसी पट्टियां बांधने का काम खुफिया शाखा के कुछ कर्मचारियों के माध्यम से कराया जाता रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसी इसी पहलू की भी पड़ताल कर रही है।
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सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के आरोपियों पर फर्जी प्लास्टर चढ़ाकर जुलूस निकाला गया, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।












