
प्रवीण श्रीवास्तव
भोपाल। मुझे करीब एक साल पहले नींद नहीं आने की परेशानी शुरू हुई, पिता ने खुद ही नींद की दवा दे दी। इससे परेशानी और बढ़ गई तो परिवार वाले मुझे गांव के बाबा के पास ले गए। बाबा ने काला जादू बताकर मिर्ची का धुंआ दिया तो चिमटे से दागा। बाद में बाबा ने एक डॉक्टर की भी जानकारी दी, जिन्होंने काउंसिलिंग की और दवा दी। डॉक्टरों ने बताया कि मुझे मेनिया हैै। बाबा के ताबीज और डॉक्टर की दवा से अब परेशानी बहुत कम हो गई है।
दरअसल, हाल के जीवन में बढ़ी आपाधापी के चलते मानसिक परेशानियां भी बढ़ रही हैं। जिनका समाधान खोजने लेकिन लोग बाबा, तांत्रिक के पास पहुंच जाते हैं, जहां पहुंचने के बाद उनकी समस्या घटने की जगह बढ़ जाती है। इन लोगों को बाबाओं से चंगुल से बचाने के लिए एनएचएम द्वारा 2024 में फेथ हीलर्स अभियान की शुरुआत की है । इसमें अब तक प्रदेश से 300 से ज्यादा बाबाओं से संपर्क कर, उनके पास आए 1000 पीड़ितों का उपचार किया गया।
जेपी अस्पताल के क्लीकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. राहुल शर्मा बताते हैं कि वे बाबाओं से संपर्क करते हैं। बाबा जेपी अस्पताल स्थित मनकक्ष में जानकारी देते हैं। बाबा पीड़ित को कहते हैं कि उन्हें दवा की भी जरूरत है फिर चिकित्सकों की टीम पीड़ित का इलाज करती है। ऐसे मामलों में हेल्प लाइन नंबर 14416 और 18008914416 पर भी परामर्श लिया जा सकता है
अधिकारियों का कहना है कि फेथ हीलर्स के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें काउंसिलिंग दी गई। बाबाओं और फकीरों के कामकाज से उन्हें कोई समस्या नहीं है। वे अपना काम करें, लेकिन डॉक्टरों की मदद भी करें।
भोपाल निवासी युवक सीजोफ्रेनिया से ग्रसित हो गया। वह चुपचाप और अकेला रहने लगा। तब परिजन किसी की सलाह पर उसे रतलाम ले गए। समस्य बढ़ी तो साइकेट्रिस्ट ने इलाज शुरू किया तो सुधार होने लगा।
मानसिक स्वास्थ्य संवाद कार्यक्रम मन कक्ष, फेथ हीलर्स और गेट कीपर्स कार्यक्रम भी चल रहे हैं। मनहित ऐप भी जारी किया गया है।
डॉ. सलोनी सिडाना, एमडी, एनएचएम