वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब 25वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि, ईरान पर सैन्य कार्रवाई का फैसला उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सलाह के बाद लिया गया था। ट्रंप के इस बयान ने वॉशिंगटन की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
उन्होंने कहा कि, उनके प्रशासन में कई वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत के बाद यह निर्णय लिया गया था कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के अंदर भी इस युद्ध को लेकर पूरी सहमति नहीं थी। कुछ अधिकारियों ने कार्रवाई का समर्थन किया तो कुछ ने इससे बचने की सलाह दी।
अमेरिका के टेनेसी में आयोजित एक बैठक के दौरान ट्रंप ने बताया कि उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सबसे पहले ऐसे अधिकारी थे जिन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का सुझाव दिया। ट्रंप ने कहा कि, हेगसेथ का मानना था कि ईरान तेजी से परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य कमांडरों से बातचीत की। इसके बाद दो विकल्प सामने थे या तो हालात को नजरअंदाज किया जाए या फिर सीधे कार्रवाई करके खतरे को खत्म किया जाए। अंत में सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया गया।
इस पूरे युद्ध में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सबसे प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं। वे लगातार पेंटागन से मीडिया को जानकारी दे रहे हैं और अमेरिका की सैन्य रणनीति को स्पष्ट कर रहे हैं। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना खास तौर पर तीन क्षेत्रों को निशाना बना रही है-
हेगसेथ के अनुसार इन तीनों क्षमताओं को कमजोर किए बिना क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है।
हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि यह युद्ध कब खत्म होगा तो उन्होंने कोई स्पष्ट समयसीमा बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि, ऑपरेशन योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है और अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रंप ही करेंगे।
इस युद्ध को लेकर ट्रंप प्रशासन के अंदर भी मतभेद सामने आए हैं। ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस सैन्य अभियान को लेकर उतने उत्साहित नहीं थे। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से इसका विरोध भी नहीं किया। कुछ अन्य अधिकारियों ने भी युद्ध को लेकर चिंता जताई थी और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की सलाह दी थी। दूसरी ओर कुछ प्रभावशाली लोगों ने सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मीडिया कारोबारी रूपर्ट मर्डोक जैसे कुछ लोग ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में थे।
इस युद्ध को लेकर चल रहे विवाद के बीच अमेरिकी प्रशासन में एक बड़ा घटनाक्रम भी सामने आया। नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के पूर्व प्रमुख जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने ईरान युद्ध को लेकर प्रशासन के फैसले से असहमति जताई थी। उनका इस्तीफा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार के भीतर इस युद्ध को लेकर गंभीर मतभेद मौजूद हैं।
लगभग चार हफ्तों से चल रहे इस संघर्ष में अब तक भारी नुकसान हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस युद्ध में अब तक ईरान के 1500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, लेबनान में 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इजरायल में 15 लोगों की जान गई है, अमेरिका के 13 सैनिक भी मारे गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि, युद्ध का असर केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर इसका प्रभाव पड़ा है।
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इस युद्ध का एक बड़ा मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य भी बन गया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है जहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि, इस मार्ग को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इसी वजह से अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। ट्रंप ने पहले ईरान को इस मार्ग को खोलने के लिए 48 घंटे की चेतावनी भी दी थी।
तनाव के बीच ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच कुछ मुद्दों पर बातचीत की कोशिशें भी हुई हैं। ट्रंप के अनुसार दोनों देशों के बीच लगभग 15 मुद्दों पर चर्चा हुई है। हालांकि, इन मुद्दों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के कुछ पावर प्लांट्स पर संभावित हमले को फिलहाल 5 दिन के लिए टाल दिया गया है ताकि कूटनीतिक प्रयासों को मौका दिया जा सके।
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जहां अमेरिका बातचीत की संभावना की बात कर रहा है, वहीं ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच फिलहाल किसी भी तरह की सीधी बातचीत नहीं हो रही है। ईरान का कहना है कि अमेरिका पहले सैन्य हमले बंद करे, तभी किसी तरह की बातचीत संभव हो सकती है।
इस युद्ध को खत्म कराने के लिए कई देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये जैसे देश अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत भी की है। इस बातचीत का उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना बताया जा रहा है।
ट्रंप ने यह भी कहा है कि, वे इस युद्ध को खत्म कर ईरान के साथ समझौता करना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि, उनके दामाद जेरेड कुशनर और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ईरान के एक बड़े नेता से संपर्क में हैं। हालांकि, ईरान ने इन दावों को भी खारिज कर दिया है।