मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अचानक बदले रुख ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है। एक तरफ ट्रंप ने ईरान की एनर्जी साइट्स पर पांच दिनों तक हमला न करने की घोषणा की, वहीं दूसरी ओर ईरान के गैस ग्रिड और पावर स्टेशनों पर लगातार हमलों की खबरों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। इस विरोधाभासी स्थिति का सीधा असर शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है। जहां सोमवार को गिफ्ट निफ्टी में जोरदार तेजी आई थी, वहीं अब इसमें गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय शेयर बाजार का रुख आगे क्या रहेगा?
अमेरिका की ओर से पहले ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद बाजारों में भारी घबराहट थी। लेकिन ट्रंप द्वारा अचानक पांच दिनों तक ईरान की ऊर्जा साइट्स पर हमला न करने का ऐलान किए जाने से निवेशकों को राहत मिली। इसका असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दिखाई दिया। गिफ्ट निफ्टी में करीब 900 अंकों की तेज उछाल दर्ज की गई, वहीं अमेरिकी बाजार भी मजबूती के साथ बंद हुए। इस घटनाक्रम के बाद उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय शेयर बाजार में भी मंगलवार को सकारात्मक शुरुआत देखने को मिलेगी।
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हालांकि बाजार की ये सकारात्मक धारणा ज्यादा देर टिक नहीं पाई। ट्रंप के बयान के बावजूद ईरान के गैस नेटवर्क और बिजली संयंत्रों पर हमलों की खबरों ने एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ा दी। इससे गिफ्ट निफ्टी में तेजी की जगह गिरावट देखने को मिली और यह करीब 350 अंक फिसलकर ट्रेड करने लगा। निवेशकों के बीच यह सवाल गहराने लगा है कि क्या वास्तव में तनाव कम हो रहा है या फिर हालात और बिगड़ सकते हैं।
ग्लोबल संकेतों के बीच एशियाई बाजारों का रुख मिश्रित नजर आया। जापान का निक्केई इंडेक्स मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा और इसमें सैकड़ों अंकों की तेजी दर्ज की गई। वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी बढ़त के साथ ट्रेड करता नजर आया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ सकारात्मक संकेत दे रहा था। इससे यह साफ होता है कि वैश्विक निवेशक अभी पूरी तरह से घबराए नहीं हैं, लेकिन सतर्क जरूर हो गए हैं।
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इस पूरे घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। ट्रंप के ‘नो अटैक’ बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड, जो पहले 112 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था, अब गिरकर लगभग 102 डॉलर पर आ गया है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी नीचे फिसल गया है। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देश के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है और इससे शेयर बाजार को सपोर्ट मिल सकता है।
विदेशी बाजारों के उतार-चढ़ाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ तौर पर दिखाई देता है। सोमवार को भारी गिरावट के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि मंगलवार को रिकवरी होगी, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। हालांकि एशियाई बाजारों में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं। इसके बावजूद निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। सेंसेक्स 1800 अंकों से ज्यादा गिरकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 600 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट से निवेशकों को एक ही दिन में लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस तरह की तेज गिरावट ने बाजार की नाजुक स्थिति को उजागर कर दिया है।