Peoples Update Special :पूर्व मुख्यमंत्री डीपी मिश्रा ने कराया था स्वर्णलता तिवारी के पुनर्जन्म केस का इन्वेस्टीगेशन

राजीव सोनी, भोपाल। पुनर्जन्म मामलों की रिसर्च कर रहे पूरी दुनिया के वैज्ञानिक मध्यप्रदेश की प्रो. स्वर्णलता तिवारी (79) के री-बर्थ और पास्ट लाइफ मैमोरी को सबसे ज्यादा प्रामाणिक मानते हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके दोनों पूर्व जन्म सर्वाधिक सुर्खियों में रहे। मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री पं.द्वारका प्रसाद मिश्रा (डीपी मिश्रा) की पहल पर स्वर्णलता के पुनर्जन्म मामले को 'इन्वेस्टीगेट' किया गया। वह स्वयं भी स्वर्णलता से मिलने छतरपुर भी गए थे।
देश-विदेश के विशेषज्ञों ने की रिसर्च
वर्जीनिया-अमेरिका एवं जयपुर यूनिवर्सिटी के पैरासाइकोलॉजिस्ट इयान स्टीवेंशन व डॉ. एचएन बनर्जी एवं ब्रिटिश जर्नलिस्ट ने लंबी रिसर्च के बाद कटनी और सिलहट (बांग्लादेश) में उनके जन्म को वेरिफाई किया। उनका पिछला जन्म कटनी के धनाढ्य पाठक परिवार में (पूर्व मंत्री संजय पाठक के पिता की बुआ) हुआ था और ससुराल मैहर में थी। तब पाठक परिवार 6 वर्षीय बच्ची स्वर्णलता से मिलने के बाद पूरी तरह कन्विंस हो गए थे कि वही पिछले जन्म की बूंदा बाई(बिया) हैं। 73 साल से पूर्व जन्म का यह रिश्ता आज भी चल रहा है।
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साढ़े तीन साल की उम्र में याद आया कटनी का पूर्व जन्म
'पीपुल्स समाचार' के साथ विशेष मुलाकात में प्रो. स्वर्णलता तिवारी ने अपनी पास्ट लाइफ मैमोरी, पुनर्जन्म और पूर्वाभास संबंधी अनेक संस्मरण साझा किए। बॉटनी की प्रोफेसर रहीं स्वर्णलता बताती हैं कि 1952 में जब मैं साढ़े तीन साल की थीं तब पन्ना के रास्ते हम लोग चाय के लिए कटनी की एक होटल पर रुके। कटनी जन्म की मैमोरी उसी दिन ताजा हो गई। मैं अपने पिता से जिद करने लगी कि यहीं पास में मेरा घर है मुझे वहां ले चलो। मेरी जिद को देख मम्मी को लगा कि बच्ची पर ऊपरी बाधा आ गई, खूब झाड़-फूंक भी हुई।
ऐसे पहचाना भाई को
धीरे-धीरे बात फैल गई, मेरे पिछले जन्म के हरि भैया सच्चाई पता करने छतरपुर के घर आ गए। मैं अपनी मम्मी के साथ मंदिर गई थी। पिताजी को उन्होंने कहा हम इलाहाबाद से आए हैं। जैसे ही मैं घर लौटी मैंने उन्हें देखते हुए कहा- अरे कटनी से कब आए बाबू? यह सुनते ही वह अवाक रह गए। खूब बातें हुईं, इसके बाद तो भावुक होकर उन्होंने मेरे पैर छुए और बोले- ये तो मेरी बहन बूंदा बाई (बिया) है। बाद में हम लोग जब कटनी पहुंचे तो मैहर से पिछले जन्म के पति-देवर और बच्चे आए। मैंने सबको पहचाना। मेरे पिता मनोहर लाल मिश्रा शिक्षा विभाग में थे उनका ट्रांसफर नौगांव हो गया। एक दिन मैं असमी- बंगाली गीत गाने लगीं, इस तरह मुझे सिलहट (बांग्लादेश) में हुए दूसरे जन्म की याद आ गई।
ऐसी रही- तीन जन्मों की यात्रा
- कटनी, बूंदा बाई-1900 से 1939। सिलहट(बांग्लादेश) कमलेश गोस्वामी- 1940-47। टीकमगढ़ जिला, स्वर्णलता मिश्रा- 2 मार्च 1948।
- पिछले जन्म की ससुराल मैहर में उनके देवर के बेटे 93 वर्षीय भोला और रिटायर्ड सिविल सर्जन डॉ. राजेश पांडे सहित अन्य परिजन हैं।
- कटनी में पूर्व मंत्री संजय पाठक के पिता की बुआ के रूप में हुआ था उनका पिछला जन्म। पाठक परिवार उन्हें आज भी यही मान-सम्मान देता है।
स्वर्णलता केस: पुनर्जन्म का सबसे प्रामाणिक मामला
डॉ. ज्योति गुप्ता, पैरासाइकोलॉजिस्ट एवं पुनर्जन्म विशेषज्ञ

सवाल: स्वर्णलता पुनर्जन्म के इस मामले में आपकी रिसर्च और क्या आब्जर्वेशन रहा?
जवाब: पुनर्जन्म पर पीएचडी एवं 60 साल तक रिसर्च करते रहे देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रो. कीर्ति स्वरूप रावत (अब दिवंगत) के साथ मैंने भी स्वर्णलता केस की स्टडी की है। री-बर्थ और पास्ट लाइफ मैमोरी का यह दुनिया में सबसे प्रामाणिक मामला है। पिछले जन्म के रिश्तों को भी वह बड़े अच्छे से संभाल रही हैं।
सवाल: पुनर्जन्म और पास्ट लाइफ मैमोरी कैसे वेरिफाई करते हैं?
जवाब: इसकी कई साइंटिफिक मैथड हैं, तथ्यों को ट्रेक करते हुए इन्वेस्टीगेट करते हैं। 90 फीसदी मामले सडन डैथ के पाए गए हैं।
सवाल: प्रो. रावत के साथ आपकी टीम ने ऐसे कितने प्रकरणों पर स्टडी की है?
जवाब: प्रो. रावत के साथ मैं 2008 से काम कर रही थी। उन्होंने देश-दुनिया के कई मामलों पर शोध किया। पुनर्जन्म के 100 प्रकरणों में रिसर्च और 550 का डाक्यूमेंटेशन किया। कुंडली मैथड के जरिए मैं भी सहयोगी रही।
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सीधी बात, प्रो. स्वर्णलता तिवारी
बांके बिहारी जी की कृपा पर पूरा भरोसा करती हूं
सवाल: आपका ईश्वर में कितना भरोसा है, पूजा-पाठ भी करती हैं?
सवाल: आपको पिछले जन्म की याद पहली बार कब आई?
जवाब: मैं साढ़े तीन साल की थी, तब कटनी के पास अचानक मुझे याद आया कि यहीं पास में मेरा बड़ा घर है। पिता और चार भाई हैं। पहले तो किसी को भरोसा नहीं हुआ लेकिन धीरे-धीरे बात फैल गई।
सवाल: आपके पुनर्जन्म पर अब तक कई वैज्ञानिक रिसर्च कर चुके हैं। शुरूआत कहां से हुई?
जवाब: 8-9 साल की उम्र में छतरपुर में स्कूल की फ्रेंड्स, टीचर्स और रिश्तेदारों तक यह बात फैल गई थी। सागर यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति (पूर्व मुख्यमंत्री) पं. द्वारका प्रसाद मिश्रा को जब यह पता चला तो उन्होंने मुझसे पूछताछ की। इसके बाद स्टीवेंशन और डॉ. बनर्जी ने इन्वेस्टीगेशन शुरू किया। ये लोग सिलहट भी गए थे। बीबीसी के जर्नलिस्ट भी मिले थे।
सवाल: पिछले जन्म के घर और ससुराल पक्ष से कभी संपर्क होता है?
जवाब: हां, दोनों परिवारों से 70-72 साल से जीवंत संपर्क है। हर फंक्शन में हम लोग मिलते हैं।
सवाल: आप स्वयं बॉटनी की प्रोफेसर रहीं, अपने मामले को आप कैसे देखती हैं?
जवाब: मुझे लगता है कटनी और सिलहट का जीवन बहुत छोटा और सडन डैथ का रहा। इसलिए पुनर्जन्म में पुरानी बातें याद रह गईं। (उम्र बताते हुए बोलीं) अब तो ईश्वर की बड़ी कृपा है।
सवाल: सुना है आपको घटनाओं का पूर्वाभास भी हो जाता है?
जवाब: पहले ऐसा होता था, अब ऐसा नहीं है।
स्कूली फ्रेंड्स पूछते थे पिछले जन्म की बातें!
स्वर्णलता मेरी स्कूल की सहेली है। साहब प्यारी सिन्हा, सुशीला और हम 4-5 कॉमन फ्रेंड थे। एक क्लास आगे-पीछे थे। पुनर्जन्म की बातों के चलते (1956-57) वह स्कूल में चर्चा का केंद्र थी। हम लोग भी उससे पिछले जन्म की चर्चा करते थे। पढ़ने में वह बहुत प्रतिभाशाली रही।
रमा देवी सोनी, सागर












