MP में अफसरों की लग्जरी गाड़ियों पर उठे सवाल:दो-दो वाहन इस्तेमाल कर रहे कलेक्टर, फ्यूल बचत के लिए सरकार लाएगी नए आदेश

मध्य प्रदेश में अफसरों की लग्जरी गाड़ियों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े हो गए हैं। खासकर कलेक्टर्स द्वारा दो-दो वाहन इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है जिसके बाद सरकार अब फ्यूल बचत के लिए नए आदेश लाने की तैयारी में है।
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दो-दो वाहन इस्तेमाल कर रहे कलेक्टर, फ्यूल बचत के लिए सरकार लाएगी नए आदेश

पश्चिम एशिया संकट और बढ़ती फ्यूल कीमतों के बीच प्रधानमंत्री मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील के बाद मध्यप्रदेश सरकार भी सक्रिय हो गई है। राज्य का वित्त विभाग जल्द ही पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने संबंधी नए निर्देश जारी करने की तैयारी में है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में इस समय 600 से अधिक लग्जरी वाहन किराए पर संचालित किए जा रहे हैं जिन पर हर महीने करीब 25 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।

PM मोदी ने की है अपील

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में लोगों से पेट्रोलियम उत्पादों का समझदारी से उपयोग करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जहां संभव हो वहां वर्चुअल मीटिंग्स की जाएं, कार पूलिंग को बढ़ावा दिया जाए और ई-व्हीकल का इस्तेमाल बढ़ाया जाए। अब इसी दिशा में मध्यप्रदेश सरकार भी ईंधन बचत को लेकर सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है।

नियमों के बावजूद अफसरों के पास 35 लाख की गाड़ियां

वित्त विभाग ने अधिकारियों के लिए किराए पर वाहन लेने के स्पष्ट नियम तय कर रखे हैं। नियमों के अनुसार अपर मुख्य सचिव और मुख्य सचिव स्तर तक के अधिकारी भी 18 लाख रुपए से महंगी गाड़ी किराए पर नहीं ले सकते। इसके बावजूद कई विभागों के अधिकारी 35 लाख रुपए तक की महंगी इनोवा क्रिस्टा जैसी गाड़ियों का उपयोग कर रहे हैं। इनमें पीडब्ल्यूडी के उपयंत्री, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उप संचालक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त आयुक्त, आरटीओ और तहसीलदार स्तर के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

कलेक्टरों के पास दो-दो वाहन

सूत्रों के मुताबिक जिला कलेक्टरों के पास पहले से सरकारी वाहन उपलब्ध हैं लेकिन मनरेगा के जिला प्रमुख होने के चलते कई कलेक्टर अलग से महंगी इनोवा क्रिस्टा भी किराए पर ले रहे हैं। इन वाहनों पर हर महीने 50 हजार रुपए से ज्यादा किराया खर्च हो रहा है। इसी तरह मंत्रालय में ऐसे सचिव और प्रमुख सचिव जिनके पास एक से ज्यादा विभागों या निगम-मंडलों का प्रभार है वे भी दो से तीन वाहनों का उपयोग कर रहे हैं।

प्रदेश में रोज 8 हजार किलोलीटर पेट्रोल की खपत

मध्यप्रदेश में वर्तमान में 7,147 रिटेल पेट्रोल पंप संचालित हैं। इनके जरिए प्रतिदिन करीब 8 हजार किलोलीटर पेट्रोल और 16 हजार किलोलीटर डीजल की खपत हो रही है। बढ़ती खपत और अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए सरकार अब ईंधन बचत पर फोकस कर रही है।

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वाहन उपयोग के नियम क्या कहते हैं

नियमों के मुताबिक 5400 ग्रेड पे वाले अधिकारी 7 से 10 लाख रुपए तक की गाड़ी खरीद या किराए पर ले सकते हैं। वहीं मेट्रिक-17 स्तर तक के अधिकारी अधिकतम 18 लाख रुपए कीमत का वाहन उपयोग कर सकते हैं। इसके बावजूद कई मामलों में नियमों से ज्यादा महंगी गाड़ियों के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है।

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जल्द जारी होंगे नए निर्देश

वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी ने कहा कि तकनीकी रूप से किसी अधिकारी को दो सरकारी वाहन आवंटित नहीं किए जा सकते। किराए के वाहनों के लिए भी स्पष्ट मापदंड तय हैं। उन्होंने बताया कि ई-वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की व्यवस्था पहले से मौजूद है और अब पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए जल्द ही नए निर्देश जारी किए जाएंगे।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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