पहले फोटो, फिर एक मैसेज... कंपनी से 1.5 करोड़ की ठगी, जानिए क्या है बॉस स्कैम?

इस तरह की साइबर ठगी को बॉस स्कैम कहा जाता है, जिसमें अपराधी कंपनी के सीईओ या बॉस के नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करते हैं। जांच में फर्जी सिम कार्ड, ओटीपी, व्हाट्सऐप अकाउंट और मैलवेयर के इस्तेमाल की बात सामने आई है। पुलिस ने करीब 4,500 सिम कार्ड से जुड़ी जानकारी के आधार पर 26 राज्यों में दर्ज 251 शिकायतों की पड़ताल की है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार भारत के अलावा चीन, पाकिस्तान और हांगकांग से जुड़े होने की जानकारी मिली है। पुलिस ने लोगों को अनजान ZIP, .exe, .dll और .apk फाइलें खोलने से बचने और किसी भी भुगतान से पहले स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने की सलाह दी है।
एक मैसेज के बाद कंपनी खाते से हुआ बड़ा ट्रांसफर
अहमदाबाद में सामने आए इस मामले ने साइबर ठगी के बदलते तरीके को उजागर किया है। अपराधियों ने कंपनी के बॉस की पहचान का इस्तेमाल कर कर्मचारियों को इस तरह मैसेज भेजा कि उन्हें लगा कि निर्देश सीधे उनके वरिष्ठ अधिकारी की ओर से आया है। इसके बाद कंपनी के बैंक खाते से करीब 1.5 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। पुलिस के मुताबिक, इस तरह के मामलों में अपराधी पहले भरोसा पैदा करते हैं और फिर कर्मचारी पर तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाते हैं।
ये भी पढ़ें: Zomato पर खाना ऑर्डर करना महंगा, कैश ऑन डिलीवरी पर देना होगा अतिरिक्त चार्ज
बॉस के नाम और फोटो से बनाते हैं भरोसा
बॉस स्कैम में साइबर अपराधी कंपनी के सीईओ, निदेशक या किसी वरिष्ठ अधिकारी के नाम और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल करते हैं। भले ही मैसेज वास्तविक बॉस के मोबाइल नंबर से नहीं आया हो, लेकिन कर्मचारी के फोन में वह बॉस के नाम से दिखाई दे सकता है। इसके बाद लेखा या वित्त विभाग के कर्मचारी को किसी खाते में तत्काल रकम ट्रांसफर करने का निर्देश दिया जाता है। जल्दबाजी और वरिष्ठ अधिकारी के नाम की वजह से कर्मचारी कई बार मैसेज की पुष्टि किए बिना भुगतान कर देता है।
RBI अधिकारी बनकर भेजी ZIP फाइल
शिकायत के अनुसार, 23 जून 2026 को एक अज्ञात मोबाइल नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज मिला था। मैसेज भेजने वाले ने खुद को भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के रिस्क कंट्रोल विभाग से जुड़ा बताया और कंपनी के बैंक खाते में असामान्य लेनदेन होने की बात कही। मैसेज में खाते को बैन या सस्पेंड किए जाने की चेतावनी दी गई और साथ में एक ZIP फाइल भेजी गई। करीब छह महीने से ऐसे संदेश मिल रहे थे और लगातार लिंक आने के कारण उन्हें लगा कि ये RBI से जुड़े हो सकते हैं।
ZIP फाइल में छिपा हो सकता है मैलवेयर
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच के मुताबिक, अपराधी पहले RBI या किसी सरकारी एजेंसी के अधिकारी बनकर कंपनी के सीईओ, निदेशक या कर्मचारी को व्हाट्सऐप या ईमेल पर ZIP फाइल भेजते हैं। इसमें .exe या .dll जैसी मैलिशियस फाइलें हो सकती हैं। अगर ऐसी फाइल कंपनी के कंप्यूटर या लैपटॉप पर व्हाट्सऐप वेब के जरिए चला दी जाए, तो अपराधी व्हाट्सऐप वेब सेशन पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं। इसके बाद सीईओ या निदेशक की पहचान और प्रोफाइल फोटो का इस्तेमाल कर कंपनी के वित्त या लेखा विभाग को भुगतान के निर्देश भेजे जाते हैं।
4,500 सिम कार्ड और 251 शिकायतों की जांच
पुलिस की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े फर्जी सिम कार्ड, ओटीपी, व्हाट्सऐप अकाउंट और मैलवेयर के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने करीब 4,500 सिम कार्ड से जुड़ी जानकारी के आधार पर देश के 26 राज्यों में दर्ज 251 एनआरसीपी शिकायतों की पड़ताल की। इनमें 194 ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, तीन बॉस स्कैम और 29 ऑनलाइन, सोशल मीडिया से जुड़े अपराध शामिल थे। शुरुआती जानकारी में नेटवर्क के तार भारत के साथ चीन, पाकिस्तान और हांगकांग से जुड़े होने की बात भी सामने आई है और इस संबंध में जांच जारी है।
ये भी पढ़ें: अजिंक्य रहाणे की भविष्यवाणी, वैभव सूर्यवंशी प्लेइंग इलेवन से होंगे बाहर?
साइबर क्राइम-एज-ए-सर्विस से बढ़ा खतरा
अहमदाबाद पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधियों को अब पूरा तकनीकी ढांचा खुद तैयार करने की जरूरत नहीं है। कोई व्यक्ति फर्जी सिम उपलब्ध कराता है, कोई ओटीपी की व्यवस्था करता है, कोई व्हाट्सऐप अकाउंट तैयार करता है और दूसरा व्यक्ति पीड़ित से संपर्क कर पैसे ट्रांसफर करवाता है। पुलिस ने ऐसी तैयार डिजिटल सेवाओं और संसाधनों को साइबरक्राइम-एज-ए-सर्विस यानी सीएएएस का उदाहरण बताया है। पुलिस ने सलाह दी है कि अनजान नंबर या ईमेल से आई ZIP, .exe, .dll या .apk फाइल डाउनलोड या ओपन न करें। अगर बॉस या सीईओ के नाम से तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का मैसेज आए, तो कॉल, वीडियो कॉल या किसी ज्ञात वैकल्पिक नंबर से पुष्टि जरूर करें।



















