नई दिल्ली। 26 सितंबर से 11 अक्टूबर तक राजस्थान के जोधपुर में भारतीय वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलेगा। IAF बेस पर मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज 'तरंग शक्ति' का आयोजन होने जा रहा है। इस मेगा एयर ड्रिल में अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी समेत करीब 40 देशों के शामिल होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि पिछले साल मई में पाकिस्तानी एयरबेस पर हुई कार्रवाई के बाद IAF की यह सबसे बड़ी एक्सरसाइज मानी जा रही है, जिसमें 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मिले अनुभवों और रणनीतियों को बड़े स्तर पर परखा जाएगा। इस एक्सरसाइज के बारे में जानकारी देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में IAF के वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' से फोर्स को कई अहम सबक मिले हैं। उन्होंने बताया कि सहयोगी देश भी अपना कॉम्बैट अनुभव इस अभ्यास में लेकर आ रहे हैं। उनके मुताबिक, असल ट्रेनिंग जैसे माहौल में इन सभी अनुभवों को एक साथ लाने से रणनीतियों को परखने, मौजूदा प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने और शामिल होने वाली एयर फोर्सेज के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने में मदद मिलेगी। एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान विकसित की गई रणनीतियां इस एक्सरसाइज में देखने को मिलेंगी, हालांकि इसमें से कितना अपनाना है, यह हिस्सा लेने वाले देशों पर निर्भर करेगा।
ड्रोन वॉरफेयर भी शामिल हो सकता है
ड्रोन वॉरफेयर को लेकर पूछे गए सवाल पर वाइस चीफ ने संकेत दिया कि ड्रिल में सभी संभावित हालातों को शामिल किया जाना चाहिए और इसके लिए प्रतिभागियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। IAF अधिकारियों ने बताया कि इस एक्सरसाइज में बड़े स्तर पर गतिविधियां होंगी। इसमें हाई-वैल्यू एरियल एसेट्स, एयर मोबिलिटी ऑपरेशन, डायनामिक टारगेटिंग और कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू जैसे मिशन शामिल होंगे, ताकि प्रतिभागियों को एयर ऑपरेशन के अलग-अलग पहलुओं का अनुभव मिल सके।
F-35 पहली बार भारत में करेगा एक्सरसाइज
'तरंग शक्ति' एक्सरसाइज में एयर पावर का जबरदस्त नजारा देखने को मिलेगा। IAF अपने दो सबसे ताकतवर फाइटर जेट राफेल और सुखोई-30MKI को मैदान में उतारेगी। सबसे बड़ी खासियत अमेरिकी F-35 की मौजूदगी होगी। F-35 पहली बार भारत की धरती पर किसी मिलिट्री एक्सरसाइज में हिस्सा लेगा। इससे पहले इसे सिर्फ बेंगलुरु एयर-शो में डिस्प्ले किया गया था। गौरतलब है कि IAF जुलाई में ऑस्ट्रेलिया में हुई 'पिच ब्लैक' एक्सरसाइज में F-35 के साथ उड़ान भर चुकी है। अमेरिका और फ्रांस के साथ-साथ जर्मनी, UAE, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका भी अपने एयर एसेट्स भेज रहे हैं। इसके अलावा 32 अन्य देश इस मेगा ड्रिल में ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल होंगे।
युद्ध के हालात के हिसाब से ढलने की तैयारी
यह मेगा एक्सरसाइज 'ऑपरेशन सिंदूर' के डीप असेसमेंट के बाद हो रही है। इस ऑपरेशन ने भविष्य की जंग को लेकर कई अहम सबक दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में संघर्ष छोटे लेकिन तेज तीव्रता वाले होंगे, जिनमें तेजी से हालात के हिसाब से ढलना, आक्रामक एक्शन और मल्टी-डोमेन क्षमताओं का मजबूत होना बेहद जरूरी होगा। ऑपरेशन सिंदूर में सरप्राइज अटैक, एक जगह पर पूरी ताकत झोंकना और कमांड में एकजुटता जैसे फैक्टर्स निर्णायक साबित हुए थे। IAF ने भी शुरुआती दौर में ही अपनी रणनीति को तेजी से बदला और दुश्मन के कई एयरफील्ड्स पर हमला करने से पहले उसके एयर डिफेंस और मिसाइल सिस्टम को तबाह कर दिया था। नई दिल्ली के थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट में IAF के 'सेंट्रलाइज्ड कमांड, डिस्ट्रिब्यूटेड कंट्रोल और डिसेंट्रलाइज्ड एग्जीक्यूशन' मॉडल को बड़ी ताकत बताया गया है, जो इस तरह के ऑपरेशन्स में गेम चेंजर साबित हुआ।
रिमोट से चलने वाले एयरक्राफ्ट्स हो सकते हैं शामिल
रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान के हवाई हमले को नाकाम करने में S-400 और आकाश जैसे प्लेटफॉर्म से लैस लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका अहम रही। इसे इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम से मैनेज किया गया था। IAF अब रिमोट से चलने वाले एयरक्राफ्ट को आक्रामक अभियानों में शामिल करने, स्टैंड-ऑफ हथियारों का स्टॉक बढ़ाने, जमीन-आधारित एयर डिफेंस को मजबूत करने और फाइटर जेट्स के घटते बेड़े की समस्या को दूर करने पर काम कर रही है।