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शेयर बाजार में दिवाली से पहले धमाकेदार तेजी, सेंसेक्स 2008 अंक उछला; निवेशकों की कमाई ₹8 लाख करोड़ बढ़ी

धनतेरस से एक दिन पहले शेयर बाजार में जोरदार तेजी आई। सेंसेक्स 2008 अंक चढ़कर 79,310 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 24,537 पर पहुंचा।
शेयर बाजार में दिवाली से पहले धमाकेदार तेजी, सेंसेक्स 2008 अंक उछला; निवेशकों की कमाई ₹8 लाख करोड़ बढ़ी
शेयर बाजार में दिवाली से पहले धमाकेदार तेजी

धनतेरस से एक दिन पहले गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 2008 अंक की बढ़त के साथ 79,310 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 576 अंक चढ़कर 24,537 के स्तर पर पहुंच गया। इस तेजी से निवेशकों की कमाई में 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ।

करीब 7 महीने बाद बाजार में बड़ी तेजी

निफ्टी ने 4 सितंबर के बाद पहली बार 24 हजार का स्तर पार किया है। वहीं सेंसेक्स के लिए यह इस साल की दूसरी सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त रही। इससे पहले 8 अप्रैल को सेंसेक्स में 2,946 अंकों का उछाल आया था। यानी करीब सात महीने बाद बाजार में इतनी बड़ी तेजी देखने को मिली है। धनतेरस से ठीक पहले बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। बाजार में इस उछाल के पीछे अमेरिकी चुनाव के नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों और डॉलर में कमजोरी की उम्मीद जैसे चार प्रमुख कारण रहे हैं।

बाजार में तेजी की 4 बड़ी वजहें

1. अमेरिकी चुनाव के नतीजों से ग्लोबल बाजार में उत्साह

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी को दोनों सदनों में हार मिलने के बाद ग्लोबल बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। बाजार में इस घटनाक्रम को ईरान युद्ध के जल्द खत्म होने की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। अगर युद्ध थमता है तो अंतरराष्ट्रीय कारोबार और सप्लाई चेन को राहत मिल सकती है। इसी उम्मीद में निवेशकों का भरोसा बढ़ा और शेयर बाजार में खरीदारी देखने को मिली। चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

2. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत की उम्मीद

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी भारतीय शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह रही। ईरान युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर 94 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम हो सकता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटने, महंगाई को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद रहती है। इसी संभावना से निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हुआ।

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3. कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों से बढ़ा भरोसा

सितंबर तिमाही में कई बड़ी कंपनियों के बेहतर नतीजों ने भी बाजार को सहारा दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और TCS जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स में शामिल 30 बड़ी कंपनियों के शेयरों में आई बढ़त का असर सीधे इंडेक्स पर पड़ता है। गुरुवार को इनमें से ज्यादातर कंपनियों के शेयरों में खरीदारी हुई, जिससे सेंसेक्स को मजबूती मिली। कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन से निवेशकों को आगे भी बाजार में बेहतर संभावनाएं नजर आ रही हैं।

4. डॉलर कमजोर होने की उम्मीद से विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना

डॉलर में कमजोरी की उम्मीद भी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। आमतौर पर जब डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश आकर्षक हो सकता है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में पूंजी का प्रवाह बढ़ता है। इससे सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर जाने में मदद मिल सकती है। इसी उम्मीद के चलते बाजार में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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